नीतीश के फैसले पर जदयू में बगावत! CM आवास के बाहर नेता आमरण अनशन पर, पार्टी दफ्तर में जबरदस्त हंगामा

राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज हो गई है। जदयू और भाजपा कोटे से कितने कितने मंत्री बनेंगे? सामाजिक समीकरण का कितना ख्याल रखा जाएगा। किस पार्टी का डिप्टी सीएम और किसका सीएम होगा? किन नामों की चर्चा चल रही है

नीतीश के फैसले पर जदयू में बगावत! CM आवास के बाहर नेता आमरण अनशन पर, पार्टी दफ्तर में जबरदस्त हंगामा

जदयू नेताओं के आक्रोश को देखते हुए सीएम हाउस और प्रदेश कार्यालय के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है।  

बिहार की राजनीति में हलचल: नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर जदयू में नाराजगी

बिहार की सियासत में हलचल मची हुई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की घोषणा से जदयू कार्यकर्ता और नेता बेहद नाराज हैं। इसी आक्रोश के बीच जदयू के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास त्रिलोक ने पटना में मुख्यमंत्री आवास के ठीक बाहर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

अनशन की चेतावनी: "जरूरत पड़ी तो अपनी जान भी देंगे"

"हम लोग किसी भी हालत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दिल्ली नहीं जाने देंगे। जरूरत पड़ी तो अपनी जान भी दे देंगे," यह चेतावनी दी जदयू के प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास त्रिलोक ने। उन्होंने हाथ में बैनर लिए नीतीश कुमार से बिहार न छोड़ने की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री के राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद जदयू कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है।

पूरे बिहार में प्रदर्शन और हंगामा

बीते दिन पूरे बिहार में जदयू कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। कई जगहों पर पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई। नाराज कार्यकर्ताओं ने एमएलसी संजय गांधी की गाड़ी को घेर लिया और सीएम हाउस के सामने जमकर नारेबाजी हुई। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है।

नेता और कार्यकर्ताओं पर आरोप

जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई। कार्यकर्ताओं ने उन पर भाजपा से मिले होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक साजिश की गई है। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि यह जनता के जनादेश और नीतीश कुमार के आत्मसम्मान का हनन है।

वे जोर दे रहे हैं कि 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट दिया था और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इसलिए बिहार छोड़कर दिल्ली जाना अन्याय है। कार्यकर्ताओं ने चिल्लाकर कहा, "बिहार नीतीश कुमार का परिवार है, वह जनता को छोड़कर कैसे जा सकते हैं?"

सुरक्षा बढ़ाई गई, पोस्टरों से पट गया पटना

बढ़ते तनाव को देखते हुए पटना स्थित जदयू और भाजपा प्रदेश कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। जदयू दफ्तर के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर चस्पा किए गए हैं, जिनमें नीतीश कुमार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई है। समर्थकों का कहना है कि बिहार की जनता इस 'छल' का बदला नरेंद्र मोदी से लेगी और वे चुप नहीं बैठेंगे।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के निर्देश पर सीएम हाउस और जदयू प्रदेश कार्यालय के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री पद पर फिर चौंका सकती है भाजपा

सबसे अधिक सवाल मुख्यमंत्री कौन बनेगा? यह ही पूछे जा रहे हैं। भाजपा के नेताओं को यह भी लग रहा है कि कोई चौंकाने वाला नाम अचानक सीएम के रूप में न सामने आ जाए। नितिन नवीन को जब भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया था, तब यह कहा गया कि उन्हें दिल्ली में रखकर कुछ समय तक तैयार किया जाएगा और फिर बिहार का सीएम बनाया जाएगा। अचानक मुख्यमंत्री बदलने की बात आने से पहले ही इस चर्चा पर विराम लग गया, क्योंकि नितिन को विधानसभा से इस्तीफा दिलाने की तैयारी के तहत राज्यसभा के लिए उनका नाम जारी कर दिया गया। अब भाजपा फिर कुछ नया दांव भी खेल ले तो अजूबा नहीं होगा। बिहार चुनाव हो चुका है। चुनाव अब लगभग पांच साल बाद होना है। ऐसे में प्रयोग के लिए किसी नए चेहरे को सीएम बनाने पर भी कोई अंतर नहीं पड़ना है। भाजपा ऐसा करती रही है, इसलिए खुलकर प्रदेश के नेता कुछ नहीं बोल रहे हैं। यही कारण है कि संजीव चौरसिया का भी नाम उछल रहा है। इसके अलावा सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय के नाम की चर्चा की भी खूब हो रही है। हालांकि, इन तीनों में सम्राट चौधरी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। कारण है कि कुशवाहा समाज से आते हैं, जो जदयू के सामने भाजपा को मजबूत करने में काम आएगा- यह कहा गया था। भाजपा ने चुनावों में उसका असर देखा है। इसलिए, उनकी संभावना बनी हुई भी है और नहीं भी।