CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने लिया यू-टर्न, एयरपोर्ट पर भीड़ जुटाने की अपील वापस; अब समर्थकों को सीधे जंतर-मंतर पहुंचने को कहा
कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस सतर्क है. पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए अभी तक कोई अनुमति आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. अधिकारियों ने कहा कि यदि आवेदन आता है तो उसकी जांच की जाएगी.
कॉकरोच जनता पार्टी एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जो भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की हालिया कॉकरोच टिप्पणी के बाद सामने आया। CJP के इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। इसे अभिजीत दिपके ने बनाया है।
एयरपोर्ट से जंतर-मंतर तक बदली रणनीति: CJP फाउंडर अभिजीत दिपके ने समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील की, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को प्रदर्शन
नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भारत लौटने से ठीक पहले अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कुछ दिन पहले तक समर्थकों से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर उनका स्वागत करने और समर्थन दिखाने की अपील करने वाले दिपके ने अब यू-टर्न लेते हुए लोगों से एयरपोर्ट न आने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि अपेक्षा से कहीं अधिक समर्थन मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग एयरपोर्ट पहुंच सकते हैं, जिससे आम यात्रियों, सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
4 जून की रात करीब 10 बजे सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में अभिजीत दिपके ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी भी प्रकार की अव्यवस्था पैदा करना नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे दिल्ली एयरपोर्ट पर एकत्रित होने के बजाय सीधे जंतर-मंतर पहुंचें, जहां आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
दिपके ने अपने संदेश में कहा, “मैं एयरपोर्ट से सीधे संसद मार्ग थाना जाऊंगा और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया पूरी करूंगा। आप सभी लोग वहीं पहुंचें। एयरपोर्ट पर भीड़ जमा करने की आवश्यकता नहीं है। हमें जिम्मेदारी और अनुशासन के साथ आगे बढ़ना होगा।”
गिरफ्तारी की आशंका भी जताई थी
इससे पहले अभिजीत दिपके ने एक अन्य वीडियो संदेश में दावा किया था कि भारत पहुंचते ही उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि उनके आंदोलन और सरकार के खिलाफ उठाई जा रही आवाज को दबाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि अब उन्होंने अपने नए संदेश में मुख्य रूप से भीड़ प्रबंधन और आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने पर जोर दिया है।
दिपके 6 जून को अमेरिका से भारत लौट रहे हैं। उनकी वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा चल रही है और बड़ी संख्या में युवा उनके समर्थन में पोस्ट और वीडियो साझा कर रहे हैं। इसी समर्थन को देखते हुए उन्होंने एयरपोर्ट पर भीड़ एकत्रित न करने का फैसला लिया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
CJP लंबे समय से देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की मांग उठा रही है। पार्टी का कहना है कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विवादों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग कर रही है।
पार्टी का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार संतोषजनक जवाब देने में विफल रही है और जिम्मेदारी तय नहीं की गई। इसी के विरोध में 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
प्रदर्शन में शामिल होने वालों के लिए विशेष निर्देश
CJP ने अपने समर्थकों और आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। पार्टी ने कहा है कि दिल्ली में गर्मी और तेज धूप को देखते हुए प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग सुबह 9 बजे तक जंतर-मंतर पहुंचें। साथ ही उन्हें सनस्क्रीन लगाने, टोपी या सिर ढकने वाले कपड़े पहनने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है।
पार्टी ने यह भी कहा है कि प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोग खाली पेट न आएं ताकि लंबे समय तक कार्यक्रम में भाग लेने के दौरान उन्हें किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े। यह अपील दर्शाती है कि संगठन आंदोलन को लंबे और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने की तैयारी कर रहा है।
दिल्ली में पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस
4 जून को CJP ने दिल्ली में अपनी पहली औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की। इस प्रेस वार्ता में पार्टी के तीन प्रमुख प्रवक्ता पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए और उन्होंने अपनी मांगों तथा आंदोलन की रूपरेखा को विस्तार से रखा।
प्रवक्ताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल विशेष के समर्थन या विरोध के लिए नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार या विपक्ष उनकी मांगों पर बातचीत करना चाहता है तो पार्टी इसके लिए तैयार है।
CBSE अधिकारियों के तबादले पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने हाल ही में हुए CBSE प्रशासनिक बदलावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता के तबादले को “सिर्फ दिखावटी कदम” बताया।
उनका कहना था कि केवल अधिकारियों का स्थानांतरण कर देने से शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और नीतिगत स्तर पर सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक ऐसे बदलाव महज प्रतीकात्मक साबित होंगे।
प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं से जवाब नहीं मांगा गया। इसलिए आंदोलन का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना है।
युवाओं को जोड़ने की कोशिश
CJP लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। पार्टी का दावा है कि उसे देशभर से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों और युवा पेशेवरों का समर्थन मिल रहा है। इसी कारण 6 जून के प्रदर्शन को लेकर संगठन विशेष रूप से उत्साहित दिखाई दे रहा है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति या संगठन का नहीं बल्कि उन लाखों युवाओं की आवाज है जो शिक्षा व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। उन्होंने देशभर के युवाओं से जंतर-मंतर पहुंचकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है।
सोनम वांगचुक के शामिल होने की संभावना
CJP ने यह दावा भी किया है कि प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता Sonam Wangchuk आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पार्टी का कहना है कि विभिन्न सामाजिक और जनहित मुद्दों से जुड़े लोग इस अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।
यदि सोनम वांगचुक या अन्य प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल होते हैं तो इससे प्रदर्शन को व्यापक राष्ट्रीय ध्यान मिल सकता है। हालांकि फिलहाल यह संभावना ही मानी जा रही है।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP का आंदोलन युवाओं की बढ़ती असंतुष्टि और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का प्रतीक बनता जा रहा है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे अभियान तेजी से लोकप्रिय हो जाते हैं और राष्ट्रीय बहस का विषय बन सकते हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें 6 जून पर टिकी हैं, जब अभिजीत दिपके भारत लौटेंगे और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को आगे बढ़ाएंगे। एयरपोर्ट पर भीड़ न जुटाने की अपील के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जंतर-मंतर पर कितनी संख्या में लोग पहुंचते हैं और आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है। CJP का कहना है कि वह पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखेगी तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक अपनी आवाज उठाती रहेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस