जीतू पटवारी समेत हिरासत में कई नेता,मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद होने पर दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन,सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को नहीं मिली राहत

मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रदर्शन किया। कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी समेत अनेक विधायक दिल्ली में एकजुट हुए और नामांकन रद्द किए जाने का विरोध किया।

जीतू पटवारी समेत हिरासत में कई नेता,मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद होने पर दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन,सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस को नहीं मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी

राज्यसभा नामांकन विवाद पर दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन, जीतू पटवारी समेत कई नेता हिरासत में

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। इस विवाद को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ सत्याग्रह और विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया और नामांकन निरस्त किए जाने को अन्यायपूर्ण तथा अलोकतांत्रिक बताया।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। कई बैनरों पर लिखा था, “पहले वोट चोरी, अब सीट चोरी” और “चुनाव आयोग की मनमानी बंद करो”। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी आधारों पर नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव में रद्द किया गया है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

जंतर-मंतर पर गरमाया माहौल

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इस दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू की तो जीतू पटवारी ने इसका विरोध किया।

काफी देर तक चली नोकझोंक के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बस में बैठाया। उनके साथ कई अन्य कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं था।

राष्ट्रपति से मुलाकात न मिलने पर नाराजगी

इस बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राष्ट्रपति से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पूरे देश की संवैधानिक प्रमुख हैं, किसी राजनीतिक दल की नहीं।

उमंग सिंघार ने कहा कि जिस प्रकार राष्ट्रपति भवन की ओर से मुलाकात के लिए समय न दिए जाने की सूचना भेजी गई, उससे गलत संदेश जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्ष रहना चाहिए और लोकतंत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों पर विपक्ष की बात भी सुनी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से बड़ी उम्मीदें

उमंग सिंघार ने कहा कि राज्यसभा नामांकन विवाद केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय को ऐसा निर्णय देना चाहिए जो भविष्य के लिए उदाहरण बने।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग लगातार विपक्ष की आपत्तियों को नजरअंदाज कर रहा है और न्यायिक संस्थाओं के समक्ष पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं रख रहा। सिंघार ने कहा कि यदि इस तरह के मामलों में समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज करने का फैसला पूरी तरह गलत और असंवैधानिक है।

पंवार ने आरोप लगाया कि कांग्रेस उम्मीदवार को राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में निष्पक्ष अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को पारदर्शी तरीके से पूरे मामले की समीक्षा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर देशभर में आवाज उठाएगी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस को न्यायिक मोर्चे पर भी झटका लगा। मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में सीधे हस्तक्षेप किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 329 की भावना से परे होगा। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा करने से भविष्य में एक नई परंपरा शुरू हो सकती है, जिसमें चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन संबंधी हर विवाद सीधे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने लगेगा।

कोर्ट की इस टिप्पणी को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि न्यायालय से उसे तत्काल राहत मिल सकती है। हालांकि अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की।

भाजपा ने हासिल की निर्विरोध जीत

मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों पर भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत दर्ज कर चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि उसके उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव प्रक्रिया का संतुलन प्रभावित हुआ, जबकि भाजपा और चुनाव आयोग का पक्ष है कि पूरी प्रक्रिया कानून और नियमों के तहत संचालित हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है। कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी कर रही है, जबकि चुनाव आयोग और सरकार अपने फैसलों को नियमसम्मत बता रहे हैं।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस अब राजनीतिक और जनआंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ती दिख रही है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि देशभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी बात रखी जाएगी।

मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक दलों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।