सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव को हटाया:CBSE OSM विवाद पर पीएम मोदी सख्त, चेयरमैन और सचिव की छुट्टी; जांच के लिए कमेटी का गठन
केंद्र सरकार ने मंगलवार को ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद के बीच CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा OSM सर्विस के टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है।
सीबीएसई में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) मूल्यांकन में गड़बड़ियों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव को हटा दिया गया है। ओएसएम टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब बड़े प्रशासनिक बदलाव का कारण बन गया है। केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो टेंडर प्रक्रिया, खरीद व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।
सूत्रों के अनुसार, ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में टेंडर प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। इस मुद्दे पर लगातार आलोचना होने के बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी इस मामले को लेकर गंभीर था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के पक्ष में था। सरकार का मानना है कि यदि किसी व्यवस्था में खामियां सामने आती हैं तो उन्हें समय रहते दूर किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया।
जानकारी के मुताबिक, ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जुड़ी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और तकनीकी समस्याओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के बाद छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई थी। कई शिक्षाविदों ने भी इस व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सरकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का फैसला किया है।
सरकार द्वारा गठित जांच समिति को ओएसएम प्रणाली की खरीद प्रक्रिया, टेंडर आवंटन, तकनीकी संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति यह भी जांच करेगी कि कहीं इस प्रणाली की खामियों का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर तो नहीं पड़ा। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। परीक्षक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्तरों का मूल्यांकन करते हैं और अंक दर्ज करते हैं। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ उत्तर पुस्तिकाओं के खोने या क्षतिग्रस्त होने जैसी समस्याओं में कमी आने की उम्मीद की गई थी।
सीबीएसई का भी दावा रहा है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली से समय की बचत होती है और मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होती है। इसके अलावा मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है। लेकिन हालिया विवाद के बाद इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल उठ खड़े हुए हैं।
कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, डेटा अपलोडिंग, अंक दर्ज करने और अंतिम परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में तकनीकी खामियां सामने आई थीं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए व्यापक जांच का रास्ता चुना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा और मूल्यांकन जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी गड़बड़ी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए जांच आवश्यक है।
इस कार्रवाई को सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि शीर्ष अधिकारियों को हटाने का फैसला यह संदेश देता है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और वास्तविक जिम्मेदारी का निर्धारण समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही होना चाहिए।
छात्र संगठनों और अभिभावक समूहों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मूल्यांकन प्रणाली में किसी प्रकार की खामी रही है तो उसे जल्द से जल्द दूर किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। कई अभिभावकों ने यह भी कहा कि परीक्षा परिणामों की विश्वसनीयता शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और इसमें किसी भी प्रकार की चूक स्वीकार्य नहीं हो सकती।
उधर, शिक्षा जगत में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को और अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बनाने के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाने चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि तकनीकी ऑडिट, स्वतंत्र निगरानी और नियमित समीक्षा जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की संभावना कम हो सके।
सरकार द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल चेयरमैन और सचिव को हटाए जाने के फैसले ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में वास्तव में कोई खामी थी या नहीं और यदि थी तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने देश की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा परीक्षा प्रणाली के संचालन और डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस