दुनिया के सबसे बड़े गैस हब पर वार से मचा हड़कंप, कच्चे तेल की कीमतें उछलीं,कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल हमला

इजरायल और अमेरिका ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया है. जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के पांच तेल और गैस ठिकानों पर हमलों की धमकी दी है. इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं.

दुनिया के सबसे बड़े गैस हब पर वार से मचा हड़कंप, कच्चे तेल की कीमतें उछलीं,कतर के रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल हमला

ईरान ने कतर के रस लफ्फान औद्योगिक शहर पर मिसाइलों से हमले किए हैं. कतर एनर्जी के मुताबिक मिसाइल हमले से भीषण आग लगी है और काफी ज्यादा नुकसान हुआ है.

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 20वां दिन है। ईरान ने बुधवार रात को कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट ‘रास लफान’ पर मिसाइल हमला किया। हमले के बाद वहां आग लग गई और काफी नुकसान हुआ, जिसे काबू करने के लिए तुरंत इमरजेंसी टीमें भेजी गईं।

कतर ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। कतर के विदेश मंत्रालय का कहना है कि ईरान ने “रेड लाइन पार कर दी है” क्योंकि उसने आम लोगों और जरूरी जगहों को निशाना बनाया।

कतर ने कहा कि ऐसे हमले से पूरे इलाके में हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए सभी देशों को मिलकर तनाव कम करना चाहिए और शांति बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।

वहीं ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने धमकी दी है कि सिक्योरिटी चीफ अली लाराजानी की हत्या का बदला लिया जाएगा। खामेनेई ने चेतावनी दी है कि ‘हर खून की एक कीमत होती है’।

ईरान में दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड पर हमला

अमेरिका-इजराइल ने बुधवार को दक्षिणी ईरान में साउथ पार्स गैस फील्ड और असालुयेह शहर की तेल-गैस सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक की। साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड मानी जाती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में गैस के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया गया। इजराइली मीडिया ने भी बुशहर क्षेत्र में गैस फैसिलिटी पर हमले की जानकारी दी।

इससे पहले इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा था कि आज ईरान और लेबनान में ‘बड़े सरप्राइज’ देखने को मिलेंगे, जिसे इन हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में बड़े हमलों की चेतावनी दी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने लोगों से सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के प्रमुख तेल और गैस ठिकानों से दूर रहने को कहा। वहीं कतर ने ईरान के गैस फील्ड पर हमले की निंदा की।

किस स्थिति में भारत को दूसरे देशों से लेनी पड़ेगी गैस?

अगर कतर में गैस उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो भारत को दूसरी जगहों से महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है. इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है, क्योंकि घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण भारत के कुछ गैस टैंकर समुद्र में भी फंसे हुए हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. हालांकि सरकार ने कहा है कि फिलहाल देश में गैस की कोई कमी नहीं है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते हमलों से अब यह खतरा बढ़ गया है कि जंग केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दुनिया की एनर्जी सप्लाई को भी प्रभावित करेगी. इसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है.