“स्टेडियम में गुंडागर्दी! इंचार्ज ने कोच को पीटा, बोला– ‘मेरे बेटे टीआई-पटवारी, पुलिस कुछ नहीं बिगाड़ सकती’”

उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में इंचार्ज रामकुमार मिश्रा पर शूटिंग कोच विराज परिहार से मारपीट और धमकी देने का आरोप लगा है। कोच का कहना है कि मिश्रा ने गाली-गलौच करते हुए थप्पड़-घूंसे मारे और रेंज से बाहर धकेल दिया

“स्टेडियम में गुंडागर्दी! इंचार्ज ने कोच को पीटा, बोला– ‘मेरे बेटे टीआई-पटवारी, पुलिस कुछ नहीं बिगाड़ सकती’”

उज्जैन स्टेडियम में बवाल: इंचार्ज पर शूटिंग कोच से मारपीट और धमकी देने का आरोप

उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में एक गंभीर विवाद सामने आया है, जिसने खेल परिसर की सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टेडियम इंचार्ज रामकुमार मिश्रा पर शूटिंग कोच विराज परिहार के साथ मारपीट, गाली-गलौच और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद मामला और तूल पकड़ गया है।

क्या है पूरा मामला

शूटिंग कोच विराज परिहार, जो नागझिरी क्षेत्र के निवासी हैं, ने नानाखेड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 अप्रैल को शाम करीब 7:20 बजे स्टेडियम इंचार्ज रामकुमार मिश्रा शूटिंग रेंज पर पहुंचे और बिना किसी बातचीत के उनके साथ अभद्रता शुरू कर दी।

परिहार के अनुसार, घटना से पहले उन्होंने मिश्रा को व्हाट्सऐप के जरिए शूटिंग रेंज की स्थिति की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि रेंज में सफाई के बाद लाइट चालू थी और लॉक खुला हुआ था। इस संबंध में उन्होंने इंचार्ज को सूचित किया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

शाम को जब मिश्रा मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने गाली-गलौच शुरू कर दी और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। आरोप है कि मिश्रा ने कोच परिहार को थप्पड़ और घूंसे मारे, फिर उन्हें धक्का देकर शूटिंग रेंज से बाहर निकाल दिया।

“मेरे बेटे टीआई और पटवारी हैं” – धमकी का आरोप

कोच परिहार ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि मारपीट के दौरान मिश्रा ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि “मेरे बेटे टीआई और पटवारी हैं, पुलिस मेरा कुछ नहीं कर सकती।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि “जहां भी दिखेगा, वहीं मारूंगा।”

परिहार के मुताबिक, मिश्रा ने खुद को पूर्व एसआई (सब-इंस्पेक्टर) बताते हुए पुलिस कार्रवाई से बचने की बात कही और अपने प्रभाव का हवाला देकर उन्हें डराने की कोशिश की।

मौके पर मौजूद लोगों की भूमिका

घटना के समय स्टेडियम में अन्य कोच और खिलाड़ी भी मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद करीब 15 से 20 मिनट तक चलता रहा। कई लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन मिश्रा शांत नहीं हुए।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि खिलाड़ियों में डर का माहौल बन गया। कई अभिभावकों ने भी इस घटना को लेकर चिंता जताई है और स्टेडियम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

पहले भी हो चुका है विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब स्टेडियम इंचार्ज रामकुमार मिश्रा का नाम विवादों में आया हो। कोच परिहार ने बताया कि 19 अप्रैल को भी मिश्रा बिना अनुमति शूटिंग रेंज में घुस आए थे। उस समय उन्होंने कथित तौर पर एक लोडेड पिस्टल की बैरल उनकी ओर तान दी थी, जिससे वहां मौजूद खिलाड़ी और स्टाफ भयभीत हो गए थे।

हालांकि, उस समय मामला ज्यादा नहीं बढ़ा, लेकिन अब दोबारा हुई घटना ने स्थिति को गंभीर बना दिया है।

बैडमिंटन कोच के साथ भी विवाद

शूटिंग कोच ने यह भी आरोप लगाया कि मिश्रा का व्यवहार पहले से ही आक्रामक रहा है। हाल ही में उन्होंने बैडमिंटन कोच मोनिका खलोटिया के साथ भी विवाद किया था। यह विवाद बच्चों को स्टेडियम से बाहर निकालने को लेकर हुआ था।

उस समय खेल अधिकारी ओपी हेराड ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाया था। लेकिन बार-बार सामने आ रहे विवाद यह संकेत देते हैं कि स्टेडियम में अनुशासन और प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

स्टाफ और खिलाड़ियों को धमकाने का आरोप

कोच विराज परिहार ने अपनी शिकायत में यह भी कहा कि मिश्रा अक्सर स्टेडियम के स्टाफ और खिलाड़ियों के साथ भी दुर्व्यवहार करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इंचार्ज का रवैया डराने-धमकाने वाला है, जिससे खेल का माहौल प्रभावित हो रहा है।

परिहार ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने अपने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की है।

पुलिस और प्रशासन की भूमिका

मामले की शिकायत नानाखेड़ा थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और वीडियो फुटेज को भी साक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

खेल विभाग के अधिकारियों पर भी इस मामले में दबाव बढ़ रहा है कि वे स्टेडियम के माहौल को सुरक्षित और अनुशासित बनाएं।

खेल परिसर की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने खेल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां खिलाड़ियों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण मिलना चाहिए, वहां इस तरह की घटनाएं उनके मनोबल को गिराने का काम करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि खेल संस्थानों में अनुशासन और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। यदि प्रशासनिक पदों पर बैठे लोग ही नियमों का उल्लंघन करें, तो इसका सीधा असर खिलाड़ियों के भविष्य पर पड़ता है।

खिलाड़ियों और अभिभावकों की चिंता

इस घटना के बाद कई अभिभावकों ने अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि स्टेडियम में ही इस तरह का माहौल रहेगा, तो बच्चों को वहां भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ खिलाड़ियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे पहले भी इंचार्ज के व्यवहार से असहज महसूस कर चुके हैं, लेकिन खुलकर सामने आने से डरते हैं।

उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में हुआ यह विवाद केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे खेल तंत्र में मौजूद खामियों की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे खेल संस्कृति और खिलाड़ियों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और निष्पक्षता से कार्रवाई करते हैं, और क्या खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल मिल पाता है या नहीं।