तीन संतान पर बर्खास्त सब-रजिस्ट्रार को बड़ी राहत, शासन ने सेवा समाप्ति आदेश पर लगाई रोक, पद पर बने रहेंगे

सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को राज्य शासन से बड़ी राहत मिली है। दो से अधिक संतान होने के आधार पर 11 जून 2026 को उनकी सेवा समाप्त कर दी गई थी, लेकिन अपील के बाद शासन ने इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। शासन ने माना कि अंतिम निर्णय में समय लग सकता है और इस दौरान सेवा समाप्ति से अपूरणीय क्षति हो सकती है। अब अपील के अंतिम निपटारे तक परिहार अपने पद पर बने रहेंगे।

तीन संतान पर बर्खास्त सब-रजिस्ट्रार को बड़ी राहत, शासन ने सेवा समाप्ति आदेश पर लगाई रोक, पद पर बने रहेंगे

तीन संतान के आधार पर बर्खास्त सब-रजिस्ट्रार को बड़ी राहत, राज्य शासन ने सेवा समाप्ति आदेश पर लगाई रोक

भोपाल/सिंगरौली। मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान होने के आधार पर सेवा से बर्खास्त किए गए सिंगरौली के उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) अशोक सिंह परिहार को बड़ी राहत मिली है। राज्य शासन ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अपील के अंतिम निर्णय तक परिहार अपने पद पर बने रहेंगे और यथास्थिति कायम रहेगी।

यह मामला तब चर्चा में आया जब महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक कार्यालय द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश में अशोक सिंह परिहार की सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। विभाग का तर्क था कि परिहार दो से अधिक संतान रखने के कारण संबंधित नियमों के दायरे में आते हैं, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ परिहार ने राज्य शासन के समक्ष अपील दायर कर राहत की मांग की थी।

अपील में उठाया महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष

अशोक सिंह परिहार ने 15 जून 2026 को राज्य शासन के समक्ष दायर अपनी अपील में कहा कि उनके तीसरे बच्चे का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। उनका तर्क था कि लगभग 23 वर्ष पुराने पारिवारिक तथ्य के आधार पर वर्तमान समय में सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई करना न्यायसंगत नहीं है।

उन्होंने अपील में यह भी कहा कि जिस समय उनके तीसरे बच्चे का जन्म हुआ था, उस समय की परिस्थितियों और बाद में नियमों में हुए संशोधनों को ध्यान में रखते हुए मामले की समीक्षा की जानी चाहिए। परिहार ने सेवा समाप्ति आदेश को निरस्त करने तथा अंतरिम राहत प्रदान करने का अनुरोध किया था।

उपमुख्यमंत्री के समक्ष रखा पक्ष

सूत्रों के अनुसार, अशोक सिंह परिहार ने उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा से मुलाकात कर अपना पक्ष भी रखा था। बताया जाता है कि उन्होंने विभागीय कार्रवाई को चुनौती देते हुए व्यक्तिगत और कानूनी दोनों आधारों पर अपनी बात रखी।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन स्तर पर इसकी सुनवाई की गई। अपील पर विचार करते हुए यह माना गया कि अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है और यदि इस बीच सेवा समाप्ति का आदेश प्रभावी रहता है तो अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

शासन ने दिया अंतरिम संरक्षण

अपील पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद वाणिज्यिक कर विभाग ने 11 जून 2026 को जारी सेवा समाप्ति आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का निर्णय लिया। विभाग के अपर सचिव राजेश ओगरे द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अपील के अंतिम निराकरण तक सेवा समाप्ति का आदेश स्थगित रहेगा।

इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि अशोक सिंह परिहार की सेवाएं फिलहाल बहाल मानी जाएंगी और वे अपने पद पर बने रहेंगे। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

तीन संतान नियम पर फिर छिड़ी बहस

इस प्रकरण के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान संबंधी नियमों और उनकी व्याख्या को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। कई कर्मचारी संगठनों और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में नियमों के लागू होने की तिथि, कर्मचारी की नियुक्ति, तथा संतान के जन्म का समय जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।

कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई कई वर्षों बाद की जाती है, तो न्यायिक समीक्षा के दौरान समय-सीमा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि शासन ने अंतिम निर्णय आने तक सेवा समाप्ति आदेश को स्थगित रखना उचित समझा।

मुख्यमंत्री की नीति का भी असर

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि राज्य सरकार पहले ही संकेत दे चुकी है कि केवल तीन संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी समाप्त करने जैसे मामलों की संवेदनशीलता से समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कह चुके हैं।

इसी संदर्भ में माना जा रहा है कि शासन ने अपीलकर्ता को तत्काल राहत देते हुए अंतिम निर्णय तक उनके सेवा अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी चर्चा

अशोक सिंह परिहार का नाम पहले भी विभिन्न विवादों में सामने आता रहा है। उन पर विभागीय कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार संबंधी आरोप लगते रहे हैं। विभाग के भीतर भी उनकी कार्यशैली को लेकर शिकायतों की चर्चा रही है।

हालांकि, वर्तमान कार्रवाई आधिकारिक रूप से केवल दो से अधिक संतान संबंधी नियम के आधार पर की गई थी। वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि अन्य शिकायतों और विभागीय असंतोष की पृष्ठभूमि भी इस पूरे घटनाक्रम के पीछे चर्चा का विषय रही है। हालांकि इन आरोपों पर कोई अंतिम विभागीय निष्कर्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

अंतिम निर्णय पर टिकी निगाहें

फिलहाल राज्य शासन द्वारा दी गई अंतरिम राहत के बाद अशोक सिंह परिहार को बड़ी राहत मिली है। अब सभी की निगाहें अपील की अंतिम सुनवाई और शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि अपील स्वीकार होती है तो सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त हो सकता है, जबकि विपरीत स्थिति में शासन आगे की कार्रवाई भी कर सकता है।

इस मामले ने न केवल प्रशासनिक हलकों में चर्चा पैदा की है, बल्कि सरकारी सेवाओं में लागू पारिवारिक और सेवा नियमों की व्याख्या तथा उनके क्रियान्वयन को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में शासन का अंतिम फैसला इस तरह के अन्य मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।