माल बिकाऊ नहीं…”: गोपाल भार्गव का मंच से सियासी धमाका, दिग्विजय के ऑफर का खुलासा; हरिसिंह सप्रे ने भी खोले राज
गोपाल भार्गव ने इसी मंच से ये भी कहा कि मैनें पार्टी को जीवन दिया, पूरा जीवन पार्टी को समर्पित कर दिया. उनके इस बयान को लेकर फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं कि गोपाल भार्गव अब इंतजार के नहीं, बल्कि अपने मन की पीढ़ा को सार्वजनिक करने का मन बना चुके हैं. क्योंकि उन्हें अंदाजा नहीं था कि निर्विवाद राजनीति और बिना किसी आरोप के सबसे वरिष्ठ विधायक होने के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी. 2 साल बीत जाने के बाद गोपाल भार्गव का इंतजार जारी है.
मध्यप्रदेश BJP के सबसे वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने एक सार्वजनिक मंच से अपना दर्द बयां किया है। उन्होंने बताया कि दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान उन्हें मंत्री पद के कई ऑफर मिले, लेकिन वे डिगे नहीं।
भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंत्री और रहली से वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव का एक बार फिर बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने सोमवार को दिए अपने बयान में कांग्रेस से ऑफर आने की बात कही है। रहली में विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच को संबोधित करते हुए गोपाल भार्गव ने अपने राजनीतिक सफर, पार्टी के प्रति निष्ठा और वर्तमान परिस्थितियों को लेकर खुलकर बात की। संबोधन में पूर्वमंत्री गोपाल भार्गव ने कहा कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ देती है। अगर किसी व्यक्ति की बात सरकार नहीं सुनती तो उसका मन टूट जाता है।
20 साल मन बांधा, कांग्रेस में जाने का ऑफर था संघर्ष करता रहे, जूझता रहता रहे, अपनी मांगें रखता रहे। लेकिन सरकार नहीं माने तो शायद कोई भी आदमी होगा तो उसका हौंसला टूट जाएगा। उसकी ताकत खत्म हो जाएगी। मन गिर जाएगा। लेकिन मैंने 20 साल मन को बांधे रखा। कई मंत्री, मुख्यमत्री कहते थे। दिग्विजय सिंह कहते थे गोपालजी वहां क्या रखा है बीजेपी में? कुछ नहीं है। आप हमारे पास आ जाओ, मैं आपको अच्छे विभाग का मंत्री बना दूंगा। लेकिन मैंने कहा कि राजा साहब एक बात कहता हूं, ये माल टिकाऊ है बिकाऊ नहीं है।
मैं 20 साल रहा, लोग तो यहां 20 महीने में पलटी मार जाते हैं। लेकिन हमने कोशिश की। जब हमारी सरकार आएगी तो हम अपने क्षेत्र का विकास करवा लेंगे। जनता ने भी मेरा पूरा साथ दिया। जनता के साथ से आज विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
9 बार के विधायक हैं भार्गव पूर्वमंत्री भार्गव का बयान वर्तमान राजनीतिक हालात और संगठन के भीतर की स्थिति की ओर इशारा करता है। उल्लेखनीय है कि गोपाल भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा से 9 बार विधायक चुने जा चुके हैं। भाजपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। वे पूर्व में लोक निर्माण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए उन्हें हमेशा पार्टी का मजबूत स्तंभ माना गया है।
हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन यादव की वर्तमान कैबिनेट में गोपाल भार्गव को मंत्री पद नहीं दिया गया। इसके बाद से ही उनके बयानों में नाराजगी और पीड़ा के स्वर लगातार सामने आते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर बयान दिया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि सारे नियम-कानून ब्राह्मणों के खिलाफ बनाए जा रहे हैं और हमें योजनाबद्ध तरीके से पीछे धकेला जा रहा है।
यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं
भार्गव ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, "कोई भी व्यक्ति संघर्ष करता रहे और सरकार उसकी मांग न माने, तो हौसला टूट जाता है। मैंने 20 साल तक अपने मन को बांधे रखा।" उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का जिक्र करते हुए बड़ा खुलासा किया कि उन्हें कांग्रेस में शामिल होने और बड़े विभाग का मंत्री बनने के कई प्रलोभन दिए गए थे। भार्गव ने गर्व से कहा कि उन्होंने राजा साहब (दिग्विजय सिंह) को दो टूक जवाब दिया था कि— "यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं है।"
उपेक्षा से जुड़ी जा रही है पीड़ा
ये दूसरा मौका है, जब विधायक गोपाल भार्गव ने अपना दर्द बयां किया है, सियासी गलियारों में गोपाल भार्गव के इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि भार्गव अपनी वरिष्ठता की अनदेखी से आहत हैं। 1985 से अजेय रहे भार्गव को उम्मीद थी कि इस कार्यकाल में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें 'वेटिंग लिस्ट' में रखा गया है। उनका यह कहना कि "लोग 20 महीने में पलटी मार देते हैं", सीधे तौर पर उन नेताओं पर निशाना माना जा रहा है जो दूसरी पार्टियों से आकर सत्ता सुख भोग रहे हैं।
भार्गव बोले- 20 साल मन को बांधे रखा
दरअसल, सोमवार को रहली के जूड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान गोपाल भार्गव ने दलबदल की राजनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन्हें कई बार कांग्रेस में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन उन्होंने कभी अपनी पार्टी से गद्दारी नहीं की।
भार्गव ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा, "जब कोई व्यक्ति लगातार संघर्ष करे, जूझता रहे और अपनी बात रखे, लेकिन सरकार फिर भी उसकी न सुने, तो किसी का भी हौसला टूट सकता है। इंसान की हिम्मत और ताकत जवाब देने लगती है और मन दुखी हो जाता है। इसके बावजूद, मैंने 20 साल तक खुद को संभाल कर रखा।"
उन्होंने आगे बताया, "दिग्विजय सिंह और उनके कई मंत्री मुझसे कहते थे कि गोपाल जी, बीजेपी में क्या रखा है? आप हमारे साथ आ जाइए, आपको मनचाहा विभाग और मंत्री पद देंगे। लेकिन मैंने हमेशा यही कहा— राजा साहब, यह माल 'टिकाऊ' है, 'बिकाऊ' नहीं। मुझे बहुत लालच दिए गए, पर मैं अपनी निष्ठा पर अड़ा रहा। मैं अपनी जनता का भी शुक्रगुजार हूँ जिन्होंने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया।"
विधायक हरिसिंह सप्रे ने भी किया दावा
गोपाल भार्गव के बयान के बाद कुरवाई से विधायक हरिसिंह सप्रे ने भी सनसनीखेज दावा किया। सप्रे ने कहा कि 2018 में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब उन्हें भी पाला बदलने का ऑफर मिला था। उन्होंने कहा, "दिग्विजय सिंह ने गलत जगह निशाना लगाया था। हम 16 साल की उम्र से संघ से जुड़े हैं, हमारी निष्ठा नहीं बिकती।"
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस