ममता बनर्जी बोलीं- मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, ऐसा अत्याचार नहीं देखा-CRPF महिलाओं और बच्चों को पीट रही

सेंट्रल फोर्स पर निशाना साधते हुए सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें बॉर्डर की रक्षा करनी चाहिए, लेकिन इसकी जगह वे एक राजनीतिक दल की रक्षा कर रहे हैं.

ममता बनर्जी बोलीं- मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, ऐसा अत्याचार नहीं देखा-CRPF महिलाओं और बच्चों को पीट रही

पश्चिम बंगाल चुनाव में दूसरे चरण का मतदान: उत्साह के बीच राजनीतिक घमासान

शाम तक 78.68% मतदान, कई बूथों पर दिखा भारी उत्साह

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, केंद्रीय बलों की तैनाती से स्थिति नियंत्रण में

ममता बनर्जी का आरोप: CRPF पर महिलाओं और बच्चों से दुर्व्यवहार का दावा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान बुधवार को राज्य की सियासत में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। 142 सीटों पर हो रहे मतदान के बीच जहां एक ओर वोटिंग प्रतिशत में उत्साहजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर गंभीर विवाद भी सामने आए। मतदान प्रक्रिया लगभग शांतिपूर्ण बताई गई, लेकिन कुछ स्थानों पर छिटपुट तनाव और झड़पों की खबरों ने माहौल को गरमा दिया।

निर्वाचन आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, शाम तक दूसरे चरण में लगभग 78.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इस चरण को अपेक्षाकृत सक्रिय मतदान के रूप में दर्शाता है। आयोग के अनुसार, केंद्रीय सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती और 142 सामान्य पर्यवेक्षकों तथा 95 पुलिस पर्यवेक्षकों की मौजूदगी के कारण कई संवेदनशील क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में रही।

हालांकि, इस चुनावी प्रक्रिया के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार और केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप लगाए। भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदान करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने 1984 से चुनाव देखे हैं, लेकिन इस तरह की स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।

ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को जिस तरह से तैनात किया गया है, वह निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलों की कार्रवाई एक विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई जगहों पर उनके पार्टी एजेंटों को मतदान केंद्रों से बाहर कर दिया गया, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “CRPF इस तरह लोगों को परेशान नहीं कर सकती। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, लेकिन ऐसा अत्याचार पहले कभी नहीं देखा।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि कई इलाकों में महिलाओं और बच्चों के साथ भी कथित रूप से दुर्व्यवहार हुआ है और कई पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।

दूसरी ओर, राज्य में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता Suvendu Adhikari ने ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए सख्ती जरूरी है।

सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कई स्थानों पर अराजकता फैलाने की कोशिश की गई, जिसे केंद्रीय बलों ने नियंत्रित किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा मतदान प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश की जा रही थी, जिसे समय रहते रोक दिया गया। उन्होंने मतदाताओं से शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने की अपील की।

इसी बीच, चुनावी माहौल में एक और तीखी टिप्पणी सामने आई, जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में सामाजिक और धार्मिक आधार पर तनाव पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन मतदाता जागरूक हैं और उन्होंने बड़े पैमाने पर मतदान किया है।

मतदान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निर्वाचन आयोग ने पहले ही व्यापक इंतजाम किए थे। संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई थी। आयोग ने स्पष्ट किया था कि मतदान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भवानीपुर क्षेत्र, जहां मुख्यमंत्री स्वयं मतदान करती हैं, इस बार भी राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहा। यहां मतदान केंद्र पर उस समय दिलचस्प स्थिति बनी जब ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी लगभग एक ही समय पर अलग-अलग बूथों पर मौजूद थे। हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ, लेकिन उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया।

राज्य के विभिन्न हिस्सों से मिली रिपोर्टों के अनुसार, कुछ स्थानों पर मतदान केंद्रों के बाहर भीड़ और हल्की झड़पों की घटनाएं सामने आईं, लेकिन पुलिस और केंद्रीय बलों की त्वरित कार्रवाई से स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि सभी शिकायतों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस चरण में उच्च मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि जनता में चुनाव को लेकर उत्साह बना हुआ है। हालांकि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इस प्रक्रिया को काफी हद तक प्रभावित किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चुनाव हमेशा से ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और संवेदनशील रहे हैं, और इस बार भी स्थिति उससे अलग नहीं है। सुरक्षा बलों की भूमिका, स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती तनातनी ने चुनाव को सुर्खियों में बनाए रखा है।

निर्वाचन आयोग ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है। आयोग का कहना है कि सभी मतदान केंद्रों की निगरानी की जा रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कुल मिलाकर, दूसरे चरण का मतदान जहां एक ओर बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता दिखा, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोपों और सुरक्षा बलों की भूमिका को लेकर विवाद भी गहराता नजर आया। आने वाले चरणों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या स्थिति और अधिक शांत होती है या राजनीतिक तनाव और बढ़ता है।