जिले के किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न होने पर उपज लड़ेगा लड़ाई, पत्रकार सुरक्षा कानून की उठी मांग; 30 मई को सिटी सेंटर सभागार में मनाया जाएगा हिंदी पत्रकारिता दिवस
जिले के किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न होने पर उपज लड़ेगा पूरी मजबूती से लड़ाई: अनिल शर्मा, पत्रकार सुरक्षा कानून की उठी जोरदार मांग; 30 मई को सिटी सेंटर सभागार में भव्य रूप से मनाया जाएगा हिंदी पत्रकारिता दिवस
जिले के किसी भी पत्रकार के उत्पीड़न पर उपज लड़ेगा लड़ाई: अनिल शर्मा
30 मई को सिटी सेंटर सभागार में मनाया जाएगा हिंदी पत्रकारिता दिवस, पत्रकार सुरक्षा कानून की उठी मांग
उरई। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (उपज) ने स्पष्ट किया है कि जिले के किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न होने की स्थिति में संगठन पूरी मजबूती के साथ उसके पक्ष में खड़ा होगा और संघर्ष करेगा। यह निर्णय गुरुवार को शहर के सिटी सेंटर सभागार में आयोजित उपज की एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में पत्रकारों के हितों, सुरक्षा, अधिकारों और भविष्य की योजनाओं को लेकर कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए।
बैठक की अध्यक्षता उपज के संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा तथा संरक्षक संजय श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन जिलाध्यक्ष अचल शर्मा ने किया।
पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा पर जोर
बैठक को संबोधित करते हुए संरक्षक अनिल शर्मा ने कहा कि आज के समय में कुछ लोग सुनियोजित तरीके से यह प्रचारित करने का प्रयास कर रहे हैं कि पत्रकार अधिक भ्रष्ट हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि समाज में अधिकांश पत्रकार निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ कार्य कर रहे हैं, लेकिन कुछ घटनाओं को आधार बनाकर पूरे पत्रकार वर्ग को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि “पत्रकार समाज का लाइट हाउस होता है, जो अंधेरे में भी समाज को दिशा दिखाने का कार्य करता है। ऐसे में पत्रकारों को इस तरह की साजिशों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा और अपनी भूमिका को और मजबूत बनाना होगा।”
मीडिया की गरिमा बनाए रखने पर बल
संरक्षक संजय श्रीवास्तव ने कहा कि मीडिया की जो पवित्र और विश्वसनीय छवि हमें वरिष्ठ पत्रकारों से विरासत में मिली है, उसे बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपने आचरण और कार्यशैली में पारदर्शिता लानी होगी, ताकि जनता का विश्वास मीडिया पर बना रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि बदलते समय में मीडिया की भूमिका और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है, इसलिए पत्रकारों को तकनीकी और नैतिक दोनों स्तरों पर मजबूत होना आवश्यक है।
सच्चाई को सामने लाने की जिम्मेदारी
वरिष्ठ पत्रकार व प्राचार्य डॉ. राकेश द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान समय में सच्चाई के सामने कई प्रकार की चुनौतियाँ और बाधाएं खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि समाज आज पत्रकारों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है और पत्रकारों की जिम्मेदारी है कि वे निष्पक्ष होकर जनता के हित में सच्चाई को सामने लाएं।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने और जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
कवरेज की अनुमति और पारदर्शिता की मांग
वरिष्ठ पत्रकार अजय सोनी ने कहा कि पत्रकार कोई “उगालदान” नहीं है, बल्कि समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले की तरह ही पत्रकारों को विभागीय बैठकों और सरकारी कार्यक्रमों में कवरेज की अनुमति दी जानी चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि जब पत्रकारों को उचित कवरेज की सुविधा मिलेगी, तभी जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंच सकेगी। अन्यथा सूचना व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता
वरिष्ठ पत्रकार व अधिवक्ता मतलूब चंदेल ने बैठक में जोर देते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए देश और प्रदेश स्तर पर जल्द से जल्द पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकारों को बिना किसी ठोस कारण के उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जिसे रोकने के लिए कानूनी सुरक्षा बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पत्रकार चौथा स्तंभ है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
बुजुर्ग पत्रकारों के लिए पेंशन की मांग
उपज के जिलाध्यक्ष अचल शर्मा ने बैठक में कहा कि देश के कई राज्यों जैसे राजस्थान, बिहार, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में वरिष्ठ पत्रकारों के लिए मासिक पेंशन की व्यवस्था लागू है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बुजुर्ग पत्रकारों के लिए भी पेंशन योजना लागू की जाए।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज की सेवा करने वाले पत्रकारों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनका जीवन सम्मानपूर्वक व्यतीत हो सके।
हिंदी पत्रकारिता दिवस का आयोजन
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी 30 मई को सिटी सेंटर सभागार में उपज के तत्वाधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। इस कार्यक्रम में जिले के पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।
इस आयोजन का उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता के इतिहास, उसकी वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करना होगा। साथ ही युवा पत्रकारों को मार्गदर्शन देने के लिए वरिष्ठ पत्रकार अपने अनुभव साझा करेंगे।
बैठक में उठाए गए अन्य मुद्दे
बैठक के दौरान कई अन्य पत्रकारों ने भी अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। पत्रकार सुधीर राणा, सलिल तिवारी, शैलेंद्र यागिक, रामकुमार सिंह जादौन, अनिल ओझा सहित अन्य वक्ताओं ने पत्रकारों की सुरक्षा, कार्य परिस्थितियों और प्रशासनिक सहयोग को लेकर अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकारों को फील्ड में काम करते समय कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में प्रशासन और संगठनों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बड़ी संख्या में पत्रकारों की उपस्थिति
इस बैठक में जिले के कई वरिष्ठ और युवा पत्रकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इनमें विष्णु चंदोलिया, राहुल दुबे, प्रकाश नारायण द्विवेदी, सुशील पांडेय, रामनिवास शुक्ला, कुलदीप गोस्वामी, अलीम अहमद, ध्रुव यादव, बृजेश बादल, मनोज सैनी, शिवम यादव, मुशीर अहमद, मुजीब आलम, चंद्र प्रकाश दुबे, अब्दुल अजीज, दुष्यंत सिंह, विजय विक्रम सिंह, भूपेंद्र यादव, देवेंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार शर्मा, राहुल गुप्ता, जयदीप, नीरज श्रीवास्तव सहित कई अन्य पत्रकार शामिल रहे।
बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि पत्रकारों की एकता, सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है। उपज ने यह भी दोहराया कि यदि किसी भी पत्रकार का उत्पीड़न होता है तो संगठन हर स्तर पर उसके साथ खड़ा रहेगा और न्याय की लड़ाई लड़ेगा।
आने वाले समय में हिंदी पत्रकारिता दिवस के आयोजन को भव्य बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिससे पत्रकारिता के मूल्यों और उसके महत्व को समाज में और अधिक मजबूती से स्थापित किया जा सके।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस