बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर महाकाल मंदिर की जमीन हड़पने का आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा केस, उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा

महाकाल मंदिर की पार्किंग की सरकारी जमीन को बताया निजी, विधायक चिंतामणि मालवीय के खिलाफ जनहित याचिका लगाई

बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय  पर महाकाल मंदिर की जमीन हड़पने का आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा केस, उमंग सिंघार ने MP सरकार को घेरा

महाकाल मंदिर की जमीन विवाद पर घमासान: BJP विधायक चिंतामणि मालवीय पर आरोप, हाईकोर्ट पहुंचा मामला; उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा

उज्जैन में महाकाल मंदिर क्षेत्र से जुड़ी जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मामला महाकाल मंदिर के पास पार्किंग के रूप में उपयोग हो रही जमीन से जुड़ा है, जिस पर अब कथित तौर पर फाइव स्टार होटल निर्माण की तैयारी होने के आरोप लगाए गए हैं। इस मामले में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिकायतें लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी हैं, जबकि कांग्रेस ने इसे बड़ा भ्रष्टाचार बताते हुए राज्य सरकार पर हमला बोला है।

यह पूरा विवाद लगभग 45 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार 2 मार्च 2026 को इस जमीन को यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने 3.82 करोड़ रुपए में खरीदा। कंपनी के डायरेक्टर और साझेदारों में आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय और इकबाल सिंह गांधी का नाम बताया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जिन खसरों की जमीन का सौदा हुआ, उनमें कुछ हिस्सा वर्तमान में महाकाल मंदिर क्षेत्र की पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा रहा है। दावा किया गया है कि यह भूमि पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी, लेकिन बाद में इसे निजी खातों में दर्ज कर दिया गया।

सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी जमीन?

शिकायत में कहा गया है कि खसरा नंबर 3664/1 और 3666/1 वर्ष 1950 तथा 1967-68 के राजस्व अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थे। आरोप लगाया गया है कि बाद में मिलीभगत कर इन जमीनों की प्रकृति बदलकर निजी भूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया।

कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुवाल ने इस मामले की लिखित शिकायत मुख्य सचिव, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू को सौंपी है। साथ ही इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ में जनहित याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री में गड़बड़ी का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जमीन का वास्तविक उपयोग व्यावसायिक होने के बावजूद इसे कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री कराई गई। दस्तावेजों के अनुसार कलेक्टर गाइडलाइन में इस क्षेत्र की जमीन का मूल्य 75,400 रुपए प्रति वर्गमीटर बताया गया है, लेकिन रजिस्ट्री में इसे 22,500 रुपए प्रति वर्गमीटर दर्शाया गया।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इससे सरकार को करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान हुआ।

सरकार को 3.40 करोड़ रुपए नुकसान का दावा

दस्तावेजों के आधार पर शिकायत में कहा गया है कि 4180 वर्गमीटर जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 31.51 करोड़ रुपए बैठती है। इसके अनुसार लगभग 2.99 करोड़ रुपए स्टांप शुल्क और करीब 94.55 लाख रुपए पंजीयन शुल्क देय था।

हालांकि आरोप है कि केवल 40.36 लाख रुपए स्टांप शुल्क और 12.90 लाख रुपए पंजीयन शुल्क जमा कराया गया। इस तरह सरकार को लगभग 3.40 करोड़ रुपए के नुकसान का दावा किया गया है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जमीन पर पहले से मैरिज गार्डन और अन्य निर्माण मौजूद थे, लेकिन रजिस्ट्री के दौरान इन्हें छिपाकर केवल टिन शेड दर्शाया गया, जिससे टैक्स देनदारी कम हुई।

महाकाल पार्किंग को लेकर भी सवाल

महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हरि फाटक और कल्प क्षेत्र की पार्किंग नगर निगम के अधीन आती है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार जमीन के उपयोग और स्वामित्व से जुड़ी विस्तृत जानकारी नगर निगम स्तर से प्राप्त की जा सकती है।

इस बयान के बाद अब पार्किंग उपयोग और भूमि स्वामित्व को लेकर अलग-अलग एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

विधायक चिंतामणि मालवीय ने आरोपों को बताया झूठा

मामले में भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह दस्तावेजों के आधार पर हुई है और सभी स्टांप शुल्क व पंजीयन शुल्क नियमों के अनुसार जमा किए गए हैं।

विधायक ने आरोपों को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और किसी भी जांच में सत्य सामने आ जाएगा।

उमंग सिंघार का सरकार पर हमला

इस विवाद को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की पार्किंग के रूप में उपयोग हो रही जमीन को निजी कंपनी को बेच दिया गया और अब वहां फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी है।

उमंग सिंघार ने कहा, “महाकाल की नगरी में अब आस्था नहीं, भाजपा का लैंड मॉडल चल रहा है।”

उन्होंने दावा किया कि करोड़ों रुपए की जमीन को कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री की गई, जिससे लगभग 3.40 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की कथित चोरी हुई।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले सरकारी जमीन को निजी नामों पर दर्ज कराया गया और बाद में भाजपा विधायक से जुड़ी कंपनी को बेचा गया।

उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या महाकाल लोक और मंदिर क्षेत्र भी अब राजनीतिक और व्यावसायिक सौदों का हिस्सा बन चुके हैं।

सिंघार ने कहा कि पहले महाकाल लोक परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और अब महाकाल मंदिर की जमीन को लेकर नए आरोप सामने आए हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर धर्म और आस्था को व्यवसाय में बदलने का आरोप लगाया।

फिलहाल मामला शिकायत, दस्तावेजी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के चरण में है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद अब प्रशासनिक और कानूनी जांच की दिशा में आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।