उरई नगर पालिका में सभासदों का धरना, ईओ पर करोड़ों के घोटाले के आरोपों से गरमाया माहौल
उरई नगर पालिका में ईओ रामअचल कुरील पर करोड़ों रुपये के घोटाले और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए सभासदों ने धरना शुरू कर दिया है। सभासदों का कहना है कि ई-निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी कर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया और कई विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
उरई नगर पालिका में बढ़ा विवाद, ईओ और सभासदों में तनातनी
ईओ रामअचल कुरील पर करोड़ों के घोटाले के आरोप
ई-निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का गंभीर आरोप
उरई। नगर पालिका में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। सोमवार को अधिशासी अधिकारी (ईओ) और सभासदों के बीच हुई तीखी नोकझोंक के बाद मामला मंगलवार को सीधे धरने तक पहुंच गया। नगर पालिका परिसर में दर्जन भर से अधिक सभासद धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए ईओ पर गंभीर आरोप लगाए।
ईओ और सभासदों के बीच बढ़ता तनाव
नगर पालिका के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। सभासदों का आरोप है कि अधिशासी अधिकारी रामअचल कुरील द्वारा नगर पालिका में कई स्तरों पर अनियमितताएं की जा रही हैं और विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। सोमवार को दोनों पक्षों के बीच हुई बहस इतनी बढ़ गई कि मामला हाथापाई जैसे माहौल तक पहुंच गया, जिसके बाद मंगलवार को सभासदों ने धरना शुरू कर दिया।
धरने पर बैठे सभासदों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों और टेंडरों में भारी गड़बड़ियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि जब भी किसी कार्य की जानकारी या दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो प्रशासन की ओर से टालमटोल किया जाता है या फिर पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती।
करोड़ों के घोटाले और ई-निविदा पर सवाल
धरने पर बैठे सभासदों ने सबसे गंभीर आरोप ई-निविदा प्रक्रिया को लेकर लगाए हैं। उनका कहना है कि ई-निविदा में पारदर्शिता नहीं बरती गई और कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रक्रिया में हेरफेर किया गया। आरोप है कि करोड़ों रुपये के कार्य बिना उचित जांच और प्रतिस्पर्धा के स्वीकृत कर दिए गए।
सभासदों ने यह भी कहा कि जिन फर्मों को ठेके दिए गए, उनके चयन की प्रक्रिया संदिग्ध है और कई योग्य कंपनियों को जानबूझकर बाहर रखा गया। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और अधिक बढ़ गई है।
जिलाधिकारी को भेजा गया शिकायती पत्र
सभासदों ने इस पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी को एक विस्तृत शिकायती पत्र भी भेजा है। पत्र में फरवरी 2026 में जारी ई-निविदाओं की पूरी जानकारी मांगी गई है। इसमें पूछा गया है कि किन-किन फर्मों ने निविदा प्रक्रिया में भाग लिया, किस आधार पर टेंडर आवंटित किए गए और किस फर्म को कितना भुगतान किया गया।
इसके अलावा पत्र में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान हुए विभिन्न विकास कार्यों का पूरा लेखा-जोखा भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है। इसमें रैन बसेरों, शेल्टर होम, मेडिकल कॉलेज से जुड़े कार्यों और अन्य विकास मदों में किए गए भुगतान की विस्तृत जानकारी शामिल है।
आउटसोर्सिंग और फंड उपयोग पर भी सवाल
सभासदों ने केवल टेंडर ही नहीं, बल्कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर पालिका में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति में भी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने मांग की है कि नई निविदा प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए और सभी नियुक्तियों की जांच कराई जाए।
इसके साथ ही सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड फंड का उपयोग बिना उचित अनुमति और पारदर्शिता के किया गया है। उन्होंने कहा कि फंड से किए गए सभी खर्चों का पूरा स्टेटमेंट सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार को उस समय हुई जब नगर पालिका परिसर में ईओ और सभासदों के बीच तीखी बहस हुई। इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे मामला और अधिक तूल पकड़ गया। वीडियो में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप साफ देखे जा सकते हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा तेज हो गई और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। कई नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
धरने से बढ़ा प्रशासनिक दबाव
मंगलवार को शुरू हुए धरने के बाद नगर पालिका प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया है। सभासदों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और सभी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
कुछ सभासदों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और जिला स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।
जनता में बढ़ रही चिंता
नगर पालिका के इस विवाद का असर अब आम जनता पर भी दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोग विकास कार्यों में देरी और पारदर्शिता की कमी को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में इस तरह की अनियमितताएं हो रही हैं तो इसका सीधा असर शहर के विकास पर पड़ेगा।
कई नागरिकों ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।
आगे की स्थिति पर नजर
फिलहाल उरई नगर पालिका में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सभासदों का धरना जारी है और प्रशासनिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं। लेकिन अभी तक किसी ठोस समाधान की घोषणा नहीं की गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या वाकई आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी या मामला यूं ही राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान में उलझा रहेगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस