9 पसलियां टूटने के बाद भी परीक्षा देने पहुंची सृष्टि दुबे, इस जांबाज बेटी के लिए शिक्षा मंत्री ने बदले नीट के नियम

9 पसलियां टूटने और वेंटिलेटर से उतरने के बाद भी हौसला न हारते हुए सृष्टि दुबे आज कोलकाता में नीट परीक्षा दे रही हैं. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के दखल के बाद परीक्षा केंद्र पर अलग कमरा, मेडिकल सपोर्ट और एंबुलेंस का इंतजाम किया गया.

9 पसलियां टूटने के बाद भी परीक्षा देने पहुंची सृष्टि दुबे, इस जांबाज बेटी के लिए शिक्षा मंत्री ने बदले नीट के नियम

एक सड़क हादसे में घायल हुई छात्रा के लिए परीक्षा केंद्र पर विशेष व्यवस्था की गई। शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया। छात्रा के पिता ने मदद की अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। गंभीर चोटों के बावजूद सृष्टि दुबे ने हार नहीं मानी। 9 पसलियां टूटने और वेंटिलेटर से बाहर आने के बाद भी वह कोलकाता में NEET परीक्षा देने पहुंचीं।

सृष्टि दुबे की जिद और हौसले ने लाखों छात्रों के लिए एक मिसाल पेश की है। सड़क दुर्घटना में नौ पसलियां टूटने, फेफड़ों में गंभीर चोट लगने और वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी इसी दृढ़ इच्छाशक्ति को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर परीक्षा देने के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित कराई। शिक्षा मंत्रालय, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और चिकित्सा विशेषज्ञों के समन्वय से परीक्षा केंद्र पर ऐसा माहौल तैयार किया गया, जिससे सृष्टि अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद परीक्षा में शामिल हो सकीं।

9 पसलियां टूटीं, फेफड़े हुए घायल, फिर भी नहीं टूटा हौसला

कोलकाता की रहने वाली सृष्टि दुबे 14 जून को एक गंभीर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। इस हादसे में उनकी नौ पसलियां टूट गईं और फेफड़ों में गंभीर चोटें आईं। डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए बड़ी वैस्कुलर सर्जरी करनी पड़ी। कुछ समय तक उन्हें आर्टिफिशियल वेंटिलेशन पर भी रखा गया। दुर्घटना के बाद उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी और परिवार के सामने सबसे बड़ी चिंता उनकी जान बचाने की थी।

हालांकि, इस कठिन परिस्थिति में भी सृष्टि ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने की उम्मीद के साथ उन्होंने दोबारा आयोजित की जा रही NEET परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया। डॉक्टरों और परिवार के सदस्यों ने उनकी स्थिति को देखते हुए कई चिंताएं जताईं, लेकिन सृष्टि अपने लक्ष्य को लेकर अडिग रहीं।

माता-पिता ने लगाई मदद की गुहार

सृष्टि की हालत को देखते हुए उनके माता-पिता ने परीक्षा अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं से विशेष सहायता की मांग की। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी परीक्षा देना चाहती है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में परीक्षा केंद्र तक पहुंचना और वहां बैठकर परीक्षा देना उसके लिए संभव नहीं होगा।

मामला शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचा, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्वयं इसमें रुचि दिखाई। उन्होंने NTA अधिकारियों से बात कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि छात्रा को परीक्षा देने का पूरा अवसर मिले और उसकी स्वास्थ्य सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

शिक्षा मंत्री के दखल से बने विशेष इंतजाम

धर्मेंद्र प्रधान के हस्तक्षेप के बाद NTA और स्थानीय प्रशासन ने परीक्षा केंद्र पर विशेष व्यवस्थाएं कीं। कोलकाता के ढाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल में सृष्टि के लिए ग्राउंड फ्लोर पर एक अलग कमरा उपलब्ध कराया गया ताकि उन्हें सीढ़ियां चढ़ने या अधिक शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके अलावा, उन्हें चेस्ट ड्रेन सहित आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के साथ परीक्षा देने की अनुमति दी गई। सामान्य नियमों के तहत परीक्षा केंद्रों में इस प्रकार की मेडिकल सुविधाओं की अनुमति नहीं होती, लेकिन सृष्टि की विशेष परिस्थिति को देखते हुए जरूरी छूट प्रदान की गई।

परीक्षा केंद्र पर डॉक्टरों की टीम और एंबुलेंस तैनात

सृष्टि की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ILS अस्पताल के डॉक्टरों और पैरामेडिक्स की एक टीम को परीक्षा केंद्र पर तैनात किया गया। परीक्षा के दौरान चिकित्सकीय विशेषज्ञ लगातार उनकी निगरानी करते रहे ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता दी जा सके।

इसके साथ ही एक स्टैंडबाय एंबुलेंस भी केंद्र पर मौजूद रखी गई। यदि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या उत्पन्न होती तो तत्काल अस्पताल ले जाने की व्यवस्था पहले से तैयार थी। अधिकारियों ने कहा कि सभी इंतजाम इस प्रकार किए गए कि छात्रा बिना किसी अतिरिक्त तनाव के परीक्षा दे सके।

हौसले की कहानी बनी प्रेरणा

सृष्टि दुबे की कहानी आज पूरे देश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जहां कई लोग सामान्य कठिनाइयों के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाते हैं, वहीं सृष्टि ने गंभीर चोटों और दर्द के बीच भी अपने सपनों को प्राथमिकता दी। उनका यह साहस बताता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने बड़ी से बड़ी बाधा भी छोटी पड़ सकती है।

सोशल मीडिया पर भी उनकी कहानी की व्यापक चर्चा हो रही है। लोग उनके साहस, आत्मविश्वास और संघर्ष को सलाम कर रहे हैं। कई शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने भी सृष्टि के जज्बे की सराहना की है।

परिवार ने जताया आभार

सृष्टि के माता-पिता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, NTA और सभी संबंधित अधिकारियों का धन्यवाद व्यक्त किया। उनका कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिलती तो उनकी बेटी परीक्षा नहीं दे पाती। उन्होंने कहा कि प्रशासन की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई ने उनकी बेटी को अपने सपने की ओर एक और कदम बढ़ाने का अवसर दिया।

NEET परीक्षा की तैयारियों का भी लिया जायजा

इधर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिल्ली के ओखला स्थित NTA मुख्यालय पहुंचकर NEET UG की दोबारा परीक्षा की तैयारियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से परीक्षा के सुचारू संचालन, पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सृष्टि दुबे का मामला केवल एक छात्रा की परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, मानवीय संवेदनाएं और छात्र का दृढ़ संकल्प एक साथ आते हैं, तो असंभव दिखने वाली परिस्थितियां भी बदली जा सकती हैं। नौ पसलियां टूटने, बड़ी सर्जरी और वेंटिलेटर से बाहर आने के बाद परीक्षा केंद्र तक पहुंचना अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। सृष्टि ने साबित कर दिया कि सच्चे सपने वही होते हैं, जिनके लिए इंसान हर मुश्किल से लड़ने को तैयार रहता है।