MP में UCC ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक पर गरमाई सियासत, जीतू पटवारी ने उठाए सवाल, BJP बोली- समिति के सामने दें सुझाव

मध्य प्रदेश में UCC को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर जमकर हमला किया है. उन्होंने कहा कि UCC केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और इसे लागू करने से पहले इसके व्यापक प्रभावों का गंभीर अध्ययन किया जाना चाहिए. उन्होंने अर्थव्यवस्था और घुसपैठियों को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया..

MP में UCC ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक पर गरमाई सियासत, जीतू पटवारी ने उठाए सवाल, BJP बोली- समिति के सामने दें सुझाव

मध्य प्रदेश में यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक को लेकर सियासत तेज हो गई है. जीतू पटवारी ने यूसीसी कमेटी की राजनैतिक दलों के साथ बैठक को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने अधिकारियों के सामने सुझाव देने की सलाह दी 

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में सोमवार को भोपाल में यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति राजनीतिक दलों, धार्मिक नेताओं, विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद यूसीसी विधेयक का अंतिम मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जा सकता है।

हालांकि बैठक शुरू होने से पहले ही इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यूसीसी को लेकर कई सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने कांग्रेस से सुझाव देने की अपील करते हुए उसके विरोध को राजनीतिक बताया है।

भाजपा ने कांग्रेस को दिए सुझाव रखने के लिए आमंत्रण

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यदि कांग्रेस के पास यूसीसी को लेकर कोई सुझाव या आपत्ति है तो उसे प्रशासनिक अकादमी में आयोजित बैठक में समिति के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल बयानबाजी करने के बजाय अपने विचार विशेषज्ञों और अधिकारियों के सामने रखे।

रामेश्वर शर्मा ने कहा, "कांग्रेस यूसीसी के विषय में यदि कोई सुझाव देना चाहती है तो प्रशासनिक अकादमी जाकर अधिकारियों और समिति के सदस्यों के सामने अपनी बात रख सकती है। वे बता सकते हैं कि प्रदेश में किस प्रकार का कानून होना चाहिए, कौन से प्रावधान शामिल किए जाएं और किन विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाए।"

उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी से आदिवासी समाज को कोई नुकसान नहीं होगा। भाजपा का दावा है कि समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान जिम्मेदारियां सुनिश्चित करेगी। शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल राजनीतिक कारणों से यूसीसी का विरोध कर रही है।

जीतू पटवारी ने उठाए कई सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यूसीसी ड्राफ्टिंग कमेटी की राजनीतिक दलों के साथ होने वाली बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार जनता के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

पटवारी ने कहा कि यूसीसी पहले गुजरात, उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों में लागू या प्रस्तावित किया गया है, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि इससे आम लोगों को क्या लाभ मिला। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 60 लाख आदिवासी निवास करते हैं, जिनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था है। ऐसे में यूसीसी लागू करते समय उनकी परंपराओं और अधिकारों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "सरकार कभी एनआरसी की बात करती है, कभी घुसपैठियों का मुद्दा उठाती है, लेकिन आज तक एक भी घुसपैठिए को सार्वजनिक रूप से चिन्हित नहीं कर सकी। अब यूसीसी का मुद्दा सामने लाकर जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ा जा रहा है।"

महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया

जीतू पटवारी ने प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और कानून व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य के गृह मंत्री भी हैं, लेकिन प्रदेश में महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं।

पटवारी ने दावा किया कि मध्य प्रदेश से बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां लापता हुई हैं, लेकिन सरकार इस पर जवाब देने के बजाय नए मुद्दे खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता को सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर जवाब चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि यूसीसी जैसे विषयों पर व्यापक सामाजिक संवाद जरूरी है और सरकार को सभी वर्गों की राय लेने के बाद ही कोई निर्णय करना चाहिए।

दिनभर चलेगा सुझावों और बैठकों का दौर

भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासन अकादमी में आयोजित बैठकों का सिलसिला पूरे दिन चलेगा। समिति विभिन्न वर्गों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त करेगी। महिला आयोग, बाल अधिकार आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के प्रतिनिधि अपनी-अपनी राय समिति के समक्ष रखेंगे।

दोपहर के सत्र में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा होगी। इस दौरान विभिन्न दल अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। वहीं शाम को धार्मिक संगठनों और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी।

समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूसीसी का अंतिम मसौदा तैयार करते समय समाज के सभी वर्गों की चिंताओं और अपेक्षाओं को ध्यान में रखा जाए। सूत्रों के अनुसार समिति को अब तक विभिन्न संगठनों और नागरिकों से बड़ी संख्या में सुझाव प्राप्त हो चुके हैं।

क्या है यूसीसी?

समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ऐसा कानून है, जिसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू किए जाते हैं। वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।

यूसीसी के समर्थकों का मानना है कि इससे समानता और न्याय की भावना मजबूत होगी, जबकि विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि इससे विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं पर प्रभाव पड़ सकता है।

अंतिम मसौदे पर टिकी निगाहें

मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी को लेकर गंभीरता से काम कर रही है और ड्राफ्टिंग कमेटी विभिन्न वर्गों से राय लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और सामाजिक समूहों से सुझाव प्राप्त होने के बाद समिति अपने अंतिम मसौदे को सरकार को सौंप सकती है।

फिलहाल यूसीसी को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो चुकी है। एक ओर भाजपा इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसके औचित्य और समय को लेकर सवाल उठा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बन सकता है।.