भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बताया 'नकारा'; मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ भी खोला मोर्चा

मध्य प्रदेश BJP के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान अब खुलकर सड़कों और बयानों में सामने आने लगी है. गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने अपनी ही सरकार के दो कद्दावर मंत्रियों ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है.

भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को बताया 'नकारा'; मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ भी खोला मोर्चा

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- बिजली कटौती पर भड़के विधायक पन्नालाल शाक्य, सिंधिया, ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री पर साधा निशाना

- अफसरों से कहा- अपने अधीनस्थों के नट-बोल्ट कसो, नाकारा मंत्रियों को हटाओ

गुना में अघोषित बिजली कटौती को लेकर प्रदर्शन, अधिकारियों की लगाई क्लास, बयान से बढ़ी राजनीतिक गर्मी

गुना में बिजली संकट पर सियासी तूफान

मध्यप्रदेश के गुना जिले में अघोषित और अनिश्चित बिजली कटौती को लेकर जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी जनसामान्य समस्या को लेकर गुना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खुलकर मोर्चा खोल दिया।

विधायक अपने समर्थकों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों के साथ बिजली विभाग के कार्यालय पहुंचे और वहां जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों से तीखे सवाल किए और व्यवस्था पर नाराजगी जताई।

बिजली विभाग कार्यालय का घेराव, जनता के साथ प्रदर्शन

विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती ने आम लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। किसानों से लेकर छोटे व्यापारियों और घरेलू उपभोक्ताओं तक सभी परेशान हैं।

प्रदर्शन के दौरान विधायक ने बिजली विभाग के कार्यालय का घेराव किया और अधिकारियों से जवाब तलब किया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की, लेकिन विधायक की नाराजगी कम नहीं हुई।

ऊर्जा मंत्री पर तीखा हमला, ‘नकारा’ कहकर की आलोचना

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधायक ने राज्य के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पर बेहद तीखे शब्दों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि मंत्री सिर्फ मंचों पर दिखावे की राजनीति करते हैं और जनता की वास्तविक समस्याओं से दूर हैं।

विधायक ने कहा कि

“ऊर्जा मंत्री बहुत बड़े ज्ञानी और भगवान के बंदे हैं, जो मंच पर ही ढोंग करने लगते हैं। कभी बिजली के खंभे पर चढ़ जाते हैं तो कभी नाली में उतर जाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे “नकारा मंत्री” की आवश्यकता नहीं है और उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए। विधायक ने आरोप लगाया कि ऊर्जा विभाग की खराब कार्यशैली के कारण मुख्यमंत्री की छवि भी प्रभावित हो रही है।

योग्यता पर सवाल, शिक्षा को लेकर टिप्पणी

अपने बयान में विधायक ने आगे कहा कि प्रदेश में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई है जिनकी प्रशासनिक समझ पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राइमरी या मिडिल स्तर की शिक्षा वाले लोगों को महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जाने से नीतिगत निर्णयों पर असर पड़ता है।

विधायक ने सुझाव दिया कि विभागों की जिम्मेदारी ऐसे व्यक्तियों को दी जानी चाहिए जिनके पास उच्च शैक्षणिक योग्यता जैसे MA या PhD हो, ताकि प्रशासनिक दक्षता में सुधार हो सके।

हालांकि इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह टिप्पणी सीधे तौर पर मंत्री की योग्यता पर सवाल उठाती है।

‘हवाई पट्टी पर मुझे पीछे धकेला’—प्रभारी मंत्री पर भी आरोप

विधायक पन्नालाल शाक्य ने केवल ऊर्जा मंत्री ही नहीं बल्कि गुना जिले के प्रभारी मंत्री पर भी गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि एक कार्यक्रम के दौरान हवाई पट्टी पर उन्हें जानबूझकर किनारे कर दिया गया और उचित सम्मान नहीं दिया गया। विधायक ने कहा कि

“हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, हमें इस तरह पीछे धकेला जाना गलत है।”

उन्होंने यह भी कहा कि प्रभारी मंत्री का प्रभाव इतना अधिक है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आवाज दबाई जा रही है।

बिजली विभाग अधिकारियों से तीखी बहस

घेराव के दौरान बिजली विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी अशोक शर्मा ने स्थिति को समझाने की कोशिश की और अन्य शहरों में हो रही बिजली व्यवस्था का उदाहरण दिया।

लेकिन विधायक ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें अन्य शहरों से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि

“हमें ग्वालियर से मतलब नहीं है, वहां क्या हो रहा है उससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। हमें केवल गुना की जनता की चिंता है।”

इस दौरान माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया, हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्थिति को संभाल लिया।

भाजपा के भीतर गुटबाजी की चर्चा तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बयानबाजी के पीछे पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी भी एक कारण हो सकती है।

हाल ही में ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना क्षेत्र के दौरे पर पहुंचे थे और संगठनात्मक गतिविधियों में शामिल हुए थे। ऐसे में स्थानीय स्तर पर असंतोष की अटकलें और तेज हो गई हैं।

हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि संगठन में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है।

मुख्यमंत्री पर टिप्पणी और राजनीतिक संदेश

विधायक ने अपने बयान में यह भी कहा कि ऊर्जा मंत्री की कार्यशैली से मुख्यमंत्री की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधे हस्तक्षेप करने की मांग की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल स्थानीय असंतोष नहीं बल्कि संगठनात्मक दबाव और प्रशासनिक खींचतान को भी दर्शाता है।

वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार में इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी को गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

जनता की समस्या या राजनीतिक टकराव?

गुना में बिजली कटौती की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। जहां एक ओर जनता राहत की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के भीतर ही आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

गुना में बिजली संकट को लेकर शुरू हुआ विरोध अब मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। विधायक पन्नालाल शाक्य के तीखे बयानों ने न केवल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष की चर्चाओं को भी हवा दे दी है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इस विवाद और बिजली संकट को कैसे संभालती है और क्या जमीनी स्तर पर लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।