भारतीय युवा कांग्रेस की जोनल नियुक्तियों से मचा बवाल, स्वीटी पाटिल का नेतृत्व पर सीधा हमला-महिलाओं की अनदेखी पर फूटा गुस्सा
भारतीय युवा कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में प्रदेश उपाध्यक्षों को जोनल इंचार्ज बनाकर 7 नेताओं को जिलों की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन सूची में सिर्फ दो महिलाओं को जगह मिलने से विवाद खड़ा हो गया। प्रदेश उपाध्यक्ष स्वीटी पाटिल ने वीडियो जारी कर नेतृत्व पर महिलाओं की अनदेखी का आरोप लगाया, जिसके बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया
महिलाओं को नजरअंदाज करने के आरोपों से घिरी भारतीय युवा कांग्रेस, संगठन के भीतर बढ़ा असंतोष
भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने मध्यप्रदेश प्रदेश उपाध्यक्षों को जोनल इंचार्ज बनाते हुए विभिन्न जिलों का प्रभार सौंपा है। 7 नेताओं की इस लिस्ट में सिर्फ दो महिला प्रभारी बनाई गईं हैं। इस सूची के जारी होते ही संगठन के भीतर असंतोष के स्वर उभरने लगे हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष स्वीटी पाटिल ने एक वीडियो जारी कर नेतृत्व पर महिलाओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है।
यह है पूरा विवाद
युवा कांग्रेस से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्षों और उपाध्यक्षों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है । इस लिस्ट में स्वीटी पाटिल को रतलाम और आगर जिले का प्रभार दिया है।
स्वीटी पाटिल ने कहा अभी जो लिस्ट आई है उसको देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बोला कुछ और जा रहा है किया कुछ और जा रहा है। अभी भोपाल में हमारे राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा आए थे। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण की बात कही थी, ओबीसी की बात कही थी। तब मुझे बड़ी खुशी मिली थी।
स्वीटी ने कहा- मैं यूथ कांग्रेस में प्रदेश उपाध्यक्ष हूं। महिला होने के नाते मुझे बहुत अच्छा लगा था कि हमारा वरिष्ठ नेतृत्व तो इस तरह की बातें करते हुए हमें अधिकार दे रहा है। जब ऐसी चीज होती हैं तो बड़ी खुशी होती है लेकिन, आज जब मैंने लिस्ट देखी उसे लिस्ट को और उन बातों को अगर मैं कंपेयर करूं तो बहुत गलत हुआ है।
इस लिस्ट के अनुसार तो महिलाओं को तो कोई अधिकार ही नहीं मिल रहे। जहां महिलाओं के आरक्षण की बात हो रही है ओबीसी की बात हो रही है और लिस्ट को देखकर लग रहा है कि सब विपरीत हो रहा है ऐसा क्यों? यह हमारे प्रभारी जी से पूछना चाहती हूं।
अभी जो लिस्ट होल्ड पर रखी गई थी आपने अच्छा काम करने वाले लोग जिला अध्यक्षों को होल्ड पर कर दिया। यूथ कांग्रेस में यह क्या हो रहा है? हमने 2018 से काम किया है तब और अब में बहुत फर्क है यह सही नहीं हो रहा है।
इस लिस्ट को देखकर ऐसा लग रहा है कि पता नहीं महिला आरक्षण की यह सारी बातें क्या बोलने के लिए हैं? जब अधिकारों की बातें आती है तब आप अधिकारों को क्यों छीन लेते हो? आप महिलाओं का अधिकार छीन रहे हो? एक तरफ आप कुछ और बोल रहे हो यह क्या है। किसे मिला कहाँ का प्रभार?
उपाध्यक्ष आवंटित जिले
अभिषेक परमार (Sr. VP) रीवा, सतना, सिंगरौली, सीधी, मऊगंज, कटनी, मैहर, होशंगाबाद, बैतूल, नरसिंहपुर, अनूपपुर, डिंडोरी
देवेंद्र सिंह दादू इंदौर (शहर व ग्रामीण), धार, खंडवा, खरगोन, टीकमगढ़, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर
शिवराज सिंह यादव भोपाल (शहर व ग्रामीण), रायसेन, अशोकनगर, हरदा, श्योपुर, निवारी
राजवीर सिंह कुड़िया ग्वालियर, गुना, भिंड, मुरैना, दतिया, शिवपुरी
स्वीटी पाटिल रतलाम, आगर
शुभांगना जामनिया अलीराजपुर, झाबुआ, बरवानी
प्रमोद खरे जबलपुर (ग्रामीण व शहर), मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा
3 महीने का अल्टीमेटम
संगठन ने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह नियुक्तियां स्थायी नहीं हैं । 3 महीने के बाद सभी प्रभारियों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी । खराब प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनके कार्यक्षेत्र में फेरबदल भी किया जा सकता है ।
यह आदेश मध्यप्रदेश प्रभारी शिवी सिंह चौहान, सह-प्रभारी रूपेश सिंह भदौरिया, दीपाली सासाने और प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया के हस्ताक्षर से जारी किया है। अब देखना यह है कि प्रदेश उपाध्यक्ष के इन आरोपों के बाद क्या संगठन अपनी सूची में कोई संशोधन करता है या नहीं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस