केंद्रीय मंत्री बंडी संजय के बेटे पर POCSO मामला दर्ज: दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से मामला गरमाया,हैदराबाद में दर्ज हुआ मामला, जांच में जुटी पुलिस

हैदराबाद में केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ है। 17 वर्षीय लड़की के परिवार ने आरोप लगाया है कि उसने शादी का झांसा देकर नाबालिग का यौन शोषण किया।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय के बेटे पर POCSO मामला दर्ज: दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप से मामला गरमाया,हैदराबाद में दर्ज हुआ मामला, जांच में जुटी पुलिस

17 वर्षीय लड़की के परिवार के गंभीर आरोप

3. 7–8 महीने पुराने संबंध का दावा

4. आरोपी का पलटवार: हनीट्रैप और 5 करोड़ की मांग

5. 50,000 रुपये देने का दावा

हैदराबाद में केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह मामला 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से जुड़े आरोपों पर आधारित है। लड़की के परिवार का दावा है कि भागीरथ ने लड़की से संबंध बनाए और उसका यौन उत्पीड़न किया।

दूसरी ओर, भागीरथ ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे “हनीट्रैप” का मामला बताया है और लड़की के परिवार पर 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

लड़की पक्ष का आरोप: शादी का झांसा देकर शोषण

पीड़ित बताई जा रही 17 वर्षीय छात्रा की मां के अनुसार, उनकी बेटी और बंडी भागीरथ के बीच करीब 7–8 महीने पहले जान-पहचान हुई थी। धीरे-धीरे यह रिश्ता कथित रूप से प्रेम संबंध में बदल गया।

परिवार का आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की का यौन शोषण किया। मां का कहना है कि जब उन्हें इस संबंध की जानकारी मिली, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, हालांकि अभी तक लड़की का विस्तृत बयान दर्ज नहीं किया गया है, क्योंकि वह नाबालिग है और प्रक्रिया के अनुसार विशेष सावधानी बरती जा रही है।

पुलिस जांच: शुरुआती स्तर पर जुटाए जा रहे सबूत

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला गंभीर प्रकृति का है क्योंकि इसमें नाबालिग से जुड़ा POCSO एक्ट लागू होता है। जांच में डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के बयान अहम भूमिका निभाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि कानून के तहत निष्पक्ष जांच की जाएगी।

आरोपी का पक्ष: हनीट्रैप और 5 करोड़ की मांग का आरोप

बंडी भागीरथ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि वह एक साजिश का शिकार हैं। उन्होंने करीमनगर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

उनका कहना है कि लड़की और उसके परिवार ने पहले उन्हें भरोसे में लिया, पारिवारिक कार्यक्रमों में बुलाया और धार्मिक यात्राओं में साथ चलने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी।

भागीरथ के अनुसार, जब उन्होंने शादी का प्रस्ताव ठुकराया, तो लड़की के परिवार ने उन पर दबाव बनाना शुरू किया और बाद में 5 करोड़ रुपये की मांग की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी गई कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज किया जाएगा।

50,000 रुपये देने का दावा

अपनी शिकायत में भागीरथ ने यह भी दावा किया है कि दबाव और डर के कारण उन्होंने लड़की के पिता को 50,000 रुपये दिए थे। उनका कहना है कि इसके बावजूद परिवार लगातार भारी रकम की मांग करता रहा और मानसिक दबाव बनाया गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें यह कहकर डराया गया कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो लड़की की मां आत्महत्या जैसा कदम उठा सकती है और इसका आरोप उन पर लगाया जाएगा।

राजनीतिक बयानबाजी शुरू, मामला बना विवाद का केंद्र

जैसे ही मामला सामने आया, यह राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया। केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने अपने बेटे के खिलाफ लगे आरोपों को “राजनीतिक साजिश” बताया है।

उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन पूरी तरह पारदर्शी रहा है और वे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं। उनके अनुसार, उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

बंडी संजय ने यह भी आरोप लगाया कि यह मामला उनकी राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य और केंद्र की राजनीति में गतिविधियां तेज हैं।

विपक्ष का हमला: ‘बेटी बचाओ’ अभियान पर सवाल

इस मामले ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। विपक्षी दलों ने कहा कि जब मामला एक प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ा है, तो जांच और कार्रवाई की पारदर्शिता महत्वपूर्ण है।

एक प्रमुख विपक्षी नेता ने सवाल उठाया कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों की सच्चाई क्या है, अगर ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती।

विपक्ष ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि किसी तरह का राजनीतिक दबाव न रहे।

कानूनी पहलू: POCSO एक्ट की गंभीरता

इस मामले में POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act) लागू होने के कारण कानून बेहद सख्त है। इस कानून के तहत नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार का यौन संबंध या शोषण गंभीर अपराध माना जाता है।

अगर आरोप साबित होते हैं, तो इसमें कठोर सजा का प्रावधान है। वहीं झूठी शिकायत या फर्जी आरोप साबित होने पर भी कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

जांच के अहम बिंदु

पुलिस फिलहाल निम्न पहलुओं पर जांच कर रही है:

दोनों पक्षों के बीच चैट और कॉल रिकॉर्ड

सोशल मीडिया बातचीत

गवाहों के बयान

यात्रा और मुलाकातों के प्रमाण

वित्तीय लेन-देन के आरोप

 पक्षों के दावों से मामला जटिल

यह मामला फिलहाल आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। एक तरफ नाबालिग के साथ शोषण का गंभीर आरोप है, तो दूसरी तरफ इसे हनीट्रैप और रंगदारी का मामला बताया जा रहा है।

पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया ही तय करेगी कि सच्चाई क्या है। फिलहाल मामला संवेदनशील स्थिति में है और सभी की नजरें जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।