किसान नेता के जिलाबदर के विरोध में उज्जैन में उग्र प्रदर्शन, पुलिस से भिड़ंत; लाठीचार्ज में कई कार्यकर्ता हिरासत में
उज्जैन में किसान कांग्रेस अध्यक्ष अशोक जाट को जिलाबदर किए जाने के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन उग्र हो गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता ट्रैक्टरों के साथ कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने बड़नगर रोड पर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई और हालात बिगड़ने पर लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसमें तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।
उज्जैन में किसान कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, पुलिस से भिड़ंत
अशोक जाट के जिलाबदर के विरोध में ट्रैक्टर रैली
बड़नगर रोड पर पुलिस ने रोका काफिला, बढ़ा तनाव
उज्जैन में किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अशोक जाट को जिलाबदर किए जाने के विरोध में सोमवार को कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन उग्र रूप ले गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और फिर लाठीचार्ज तक पहुंच गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता ट्रैक्टरों के साथ उज्जैन पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें बड़नगर रोड स्थित ब्रिज के नीचे रोक दिया, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया।
ट्रैक्टर रैली रोके जाने पर भड़के कार्यकर्ता
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। जैसे ही ट्रैक्टरों का काफिला रोका गया, कार्यकर्ता मौके पर ही धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी।
करीब एक घंटे तक दोनों पक्षों के बीच बहस और तनाव का माहौल बना रहा। इस दौरान कई बार स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। पुलिस ने बार-बार भीड़ को समझाने की कोशिश की, लेकिन कार्यकर्ता आगे बढ़ने पर अड़े रहे।
लाठीचार्ज के बाद बढ़ा तनाव
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया। इसके बाद मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कुछ नेताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया।
इस कार्रवाई में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि भीड़ को नियंत्रित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
महेश परमार और पुलिस अधिकारियों में तीखी बहस
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक और महेश परमार भी मौके पर मौजूद रहे। उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हुई। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि प्रशासन विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में आवाज उठाने वाले नेताओं पर कार्रवाई करना गलत है।
वहीं कांग्रेस नेता मुकेश भाटी ने भी पुलिस कार्रवाई को अनुचित बताया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया।
अशोक जाट के जिलाबदर पर विवाद
कांग्रेस के किसान संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक जाट को हाल ही में प्रशासन द्वारा जिलाबदर किया गया था। इसी आदेश के विरोध में कांग्रेस ने प्रदर्शन का आह्वान किया था।
प्रदेश किसान कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि किसानों के साथ व्यापारियों द्वारा अनियमितताएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों से प्रति क्विंटल 8 से 10 किलो तक अधिक अनाज लिया जा रहा है, जिसकी शिकायत अशोक जाट ने उठाई थी।
चौहान ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद संबंधित व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उल्टा अशोक जाट पर सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज कर उन्हें जिलाबदर कर दिया गया।
कलेक्टर परिसर तक नहीं पहुंच सके कार्यकर्ता
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्टर परिसर तक जाने से रोक दिया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी गई थी ताकि भीड़ आगे न बढ़ सके।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार नहीं दिया गया। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना था कि किसी भी तरह की अव्यवस्था और कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
आगे और बड़े आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगला बड़ा प्रदर्शन भोपाल में किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसानों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वे इस मुद्दे को पूरे प्रदेश में उठाएंगे।
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस घटना के बाद उज्जैन में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है, वहीं प्रशासन इसे कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
घटना के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।
उज्जैन में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर किसानों की समस्याओं, प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक टकराव को सामने ला रहा है। जहां एक ओर किसान संगठन इसे न्याय की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था का हवाला दे रहा है।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन राजनीतिक तनाव अभी भी बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस