मोहन सरकार ने फिर लिया 1800 करोड़ रुपए का कर्ज, 7.86 प्रतिशत ब्याज पर सरकार के खाते में आज आएंगे 1800 करोड़; डेढ़ महीने में बाजार से उठाए 6400 करोड़

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने 1800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है, जिसमें 1200 करोड़ और 600 करोड़ के दो राज्य विकास ऋण शामिल हैं। यह ऋण 7.86% ब्याज दर पर 16 साल (2042 तक) के लिए लिया गया है।

मोहन सरकार ने फिर लिया 1800 करोड़ रुपए का कर्ज, 7.86 प्रतिशत ब्याज पर सरकार के खाते में आज आएंगे 1800 करोड़; डेढ़ महीने में बाजार से उठाए 6400 करोड़

सरकार का कहना है कि इस कर्ज राशि से वे राज्य की उत्पादक विकास योजनाओं और विभिन्न परियोजनाओं के उपयोग करेंगे। जिसके लिए केंद्र सरकार से अनुमति ले ली गई है। बता दें कि राज्य सरकार पर 31 मार्च 2025 तक कुल 4 लाख 14 हजार 611.56 करोड़ रुपए का ऋण बकाया है। इसमें बाजार, वित्तीय संस्थानों और केंद्र सरकार से लिया गया कर्ज शामिल हैं।

मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर बाजार से ऋण लेने जा रही है। राज्य सरकार ने कुल 1800 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाने का निर्णय लिया है, जो आज सरकार के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब राज्य पहले ही पिछले डेढ़ महीने में लगभग 6400 करोड़ रुपए का ऋण बाजार से जुटा चुका है। लगातार बढ़ती उधारी ने राज्य की वित्तीय रणनीति और राजकोषीय स्थिति पर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है।

इस ताज़ा ऋण में दो अलग-अलग राज्य विकास ऋण (State Development Loans - SDL) शामिल हैं—1200 करोड़ रुपए और 600 करोड़ रुपए। दोनों को मिलाकर कुल 1800 करोड़ रुपए का यह पैकेज तैयार किया गया है। वित्त विभाग के अनुसार इस ऋण की नीलामी भारतीय रिज़र्व बैंक के मुंबई कार्यालय के माध्यम से ई-कुबेर (E-Kuber) प्रणाली पर सफलतापूर्वक पूरी की गई।

7.86% ब्याज पर 16 साल की अवधि का बॉन्ड

सरकार ने इस बार जो बॉन्ड जारी किया है, वह “7.86% मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण 2042” के नाम से है। इस बॉन्ड पर निवेशकों को 7.86 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाएगा।

इस ऋण की अवधि 16 वर्षों की तय की गई है और इसकी परिपक्वता (maturity) 15 अप्रैल 2042 को होगी। सरकार ने ब्याज भुगतान की व्यवस्था अर्धवार्षिक रखी है, जिसके तहत निवेशकों को हर साल 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को ब्याज का भुगतान किया जाएगा।

नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की गई और इसे भारतीय रिज़र्व बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए संपन्न किया गया। राज्य सरकार ने नीलामी में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कुल अधिसूचित राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा गैर-प्रतिस्पर्धात्मक बोलीदाताओं के लिए आरक्षित रखा है, जबकि किसी भी एकल बोलीदाता को अधिकतम 1 प्रतिशत तक ही आवंटन की अनुमति दी गई।

अप्रैल से अब तक 6400 करोड़ की उधारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार यह नया कर्ज मिलाकर मध्य प्रदेश सरकार पिछले डेढ़ महीने में लगभग 6400 करोड़ रुपए बाजार से जुटा चुकी है। इससे पहले अप्रैल महीने में ही सरकार ने 4600 करोड़ रुपए का बड़ा ऋण उठाया था। अब 1800 करोड़ रुपए का यह नया ऋण जुड़ने के बाद कुल उधारी का आंकड़ा तेजी से बढ़ गया है।

वित्त विभाग के अनुसार चालू वित्त वर्ष में विकास परियोजनाओं और विभिन्न योजनाओं के वित्तपोषण के लिए यह धन आवश्यक बताया गया है। सरकार का कहना है कि यह ऋण पूरी तरह “उत्पादक विकास कार्यों” में खर्च किया जाएगा, जिससे राज्य की आधारभूत संरचना और सामाजिक योजनाओं को गति मिलेगी।

सरकार का दावा: विकास कार्यों के लिए जरूरी है कर्ज

राज्य सरकार का तर्क है कि तेजी से बढ़ती विकास आवश्यकताओं और चल रही परियोजनाओं के कारण बाजार से धन जुटाना जरूरी हो गया है। सरकार का कहना है कि सड़क, सिंचाई, ऊर्जा, शहरी विकास और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता है, जिसे केवल राजस्व से पूरा करना संभव नहीं है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस ऋण के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली गई है। इसके साथ ही यह भी दावा किया गया है कि राज्य की वित्तीय स्थिति नियंत्रण में है और उधारी का उपयोग योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

राज्य की वित्तीय स्थिति और राजस्व अधिशेष

वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024-25 में मध्य प्रदेश को लगभग 1573.12 करोड़ रुपए का राजस्व अधिशेष प्राप्त हुआ था। हालांकि, वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में यह अधिशेष घटकर मात्र 7.26 करोड़ रुपए रह गया है, जो राज्य की वित्तीय दबाव की स्थिति को दर्शाता है।

31 मार्च 2025 तक राज्य सरकार पर कुल 4 लाख 14 हजार 611.56 करोड़ रुपए का ऋण बकाया बताया गया है। इस कुल ऋण में बाजार से लिया गया कर्ज, वित्तीय संस्थानों से प्राप्त ऋण, केंद्र सरकार से लिए गए ऋण और अन्य देनदारियां शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य की दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धताओं को दर्शाता है।

2042 तक चलेगा यह कर्ज

इस नए बॉन्ड की अवधि लंबी अवधि यानी 16 वर्ष रखी गई है, जिससे यह ऋण वर्ष 2042 में समाप्त होगा। इसका मतलब है कि आने वाले डेढ़ दशक तक राज्य को इस कर्ज की मूल राशि और ब्याज भुगतान की जिम्मेदारी निभानी होगी।

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय के बॉन्ड का उद्देश्य तत्काल वित्तीय दबाव को कम करना होता है, लेकिन इससे भविष्य में ब्याज भुगतान का बोझ बढ़ सकता है।

राजनीतिक और आर्थिक चर्चा तेज

इस लगातार बढ़ती उधारी ने राज्य की वित्तीय नीति पर राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चर्चा शुरू कर दी है। विपक्षी दल सरकार पर कर्ज के बढ़ते बोझ को लेकर सवाल उठा सकते हैं, जबकि सरकार इसे विकास योजनाओं के लिए जरूरी कदम बता रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उधारी का उपयोग सही तरीके से उत्पादक निवेश में किया जाता है, तो इससे आर्थिक विकास की गति तेज हो सकती है, लेकिन यदि परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं तो यह कर्ज भविष्य में बोझ भी बन सकता है।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया यह 1800 करोड़ रुपए का नया ऋण राज्य की विकास रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, लगातार बढ़ती उधारी और पहले से मौजूद भारी कर्ज ने राज्य की वित्तीय स्थिति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह धन कितना प्रभावी रूप से विकास कार्यों में उपयोग होता है और क्या इससे राज्य की आर्थिक वृद्धि को वास्तविक मजबूती मिलती है या नहीं।