2800 करोड़ का नया कर्ज लेगी MP सरकार, राज्य पर कुल देनदारी 5 लाख करोड़ रुपये के पार
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार विकास और अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए बाजार से 2800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। यह राशि 8 और 22 साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी कर जुटाई जाएगी। नए ऋण के बाद राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 5.02 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा। सरकार का कहना है कि यह धन सड़क, सिंचाई, बिजली, जल संसाधन और अन्य सार्वजनिक विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
मध्य प्रदेश पर कुल लोन 5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच जाएगा
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार दो चरणों में बॉन्ड जारी होंगे
आरबीआई के ई-कुबेर के जरिए नीलामी होगी
MP सरकार फिर लेगी 2800 करोड़ का कर्ज, कुल देनदारी 5 लाख करोड़ के पार
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए वित्त विभाग ने राज्य विकास ऋण (State Government Securities) के तहत दो चरणों में बॉन्ड जारी करने की अधिसूचना जारी की है। इस नए ऋण के बाद प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा।
राज्य सरकार 1600 करोड़ रुपये और 1200 करोड़ रुपये के दो बॉन्ड जारी कर राशि जुटाएगी। इनमें 1600 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश एसजीएस-2034 के री-इश्यू से प्राप्त किए जाएंगे, जिसकी अवधि 8 वर्ष होगी। वहीं 1200 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश एसजीएस-2048 के माध्यम से जुटाए जाएंगे, जिसे 22 वर्षों के लिए लिया जाएगा। दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए की जाएगी।
वित्त विभाग के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष में यह नया कर्ज जोड़ने के बाद सरकार द्वारा लिया गया कुल ऋण लगभग 13,500 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगा। वित्तीय दस्तावेज बताते हैं कि 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। अब 2800 करोड़ रुपये के नए ऋण के साथ यह आंकड़ा बढ़कर करीब 5.02 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगा।
सरकार का कहना है कि बॉन्ड से जुटाई गई राशि का उपयोग प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त कर ली गई है। राज्य सरकार के मुताबिक यह धन सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था के विस्तार, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजीगत परियोजनाओं के लिए लिया गया ऋण लंबे समय में राज्य की आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकता है। हालांकि लगातार बढ़ता कर्ज वित्तीय प्रबंधन और भविष्य की देनदारियों को लेकर चिंता का विषय भी बना हुआ है। सरकार का दावा है कि पूर्व में लिए गए ऋण का उपयोग ऊर्जा, सिंचाई, सहकारी संस्थाओं और अन्य विकास कार्यों में किया गया है, जिससे राज्य की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।
प्रदेश में विकास योजनाओं और अधोसंरचना निर्माण को गति देने के उद्देश्य से लिया जा रहा यह नया ऋण आने वाले वर्षों में राज्य की वित्तीय स्थिति और विकास मॉडल पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
सब हेडिंग्स:
2800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेगी सरकार
8 और 22 साल के बॉन्ड से जुटाई जाएगी राशि
RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर होगी नीलामी
कुल सरकारी कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये के पार
सड़क, सिंचाई और बिजली परियोजनाओं पर होगा खर्च
बढ़ते कर्ज के बीच विकास और वित्तीय संतुलन की चुनौती
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