DM साहब ये अपमान याद रखूंगा -प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल के बीच बहस
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से मिलने पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में जीतू पटवारी छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल को फोन पर धमकाते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों से मिलने पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी की छतरपुर कलेक्टर से फोन पर गर्मागर्म बहस.
छतरपुर में गरमाई सियासत: जीतू पटवारी और कलेक्टर पार्थ जैसवाल के बीच तीखी बहस, केन-बेतवा परियोजना पर बढ़ा विवाद
मध्यप्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। इसी बीच छतरपुर जिले में मंगलवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को चर्चा के केंद्र में ला दिया। जीतू पटवारी और पार्थ जैसवाल के बीच फोन पर हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी कलेक्टर पर नाराजगी जताते हुए कहते सुनाई दे रहे हैं— “डीएम साहब, आपका ये अपमान हमेशा याद रखूंगा। जब तक आप नौकरी करोगे, तब तक आज का दिन याद रखूंगा।”
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब जीतू पटवारी छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों, किसानों और आदिवासियों से मिलने पहुंचे थे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें परियोजना स्थल तक जाने की अनुमति नहीं दी। इसी बात को लेकर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और फोन पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष तथा कलेक्टर के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।
बताया जा रहा है कि जीतू पटवारी कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ बांध प्रभावित गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनना चाहते थे। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा और अनुमति का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद नाराज जीतू पटवारी ने सीधे कलेक्टर पार्थ जैसवाल को फोन लगाया और अपनी नाराजगी जाहिर की। वायरल वीडियो में उनकी आवाज काफी आक्रामक दिखाई दे रही है।
हालांकि प्रशासन की रोक ज्यादा देर तक प्रभावी नहीं रह सकी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ जीतू पटवारी कथित तौर पर गेट फांदकर अंदर पहुंच गए और वहां मौजूद ग्रामीणों से मुलाकात की। इस दौरान मौके पर भारी गहमागहमी देखने को मिली। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ने लगा। भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
केन-बेतवा लिंक परियोजना पिछले कई महीनों से विवादों में बनी हुई है। यह परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच जल साझेदारी और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सरकार का दावा है कि इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन को बड़ा फायदा मिलेगा। लेकिन दूसरी ओर परियोजना से प्रभावित ग्रामीण, किसान और आदिवासी लगातार विस्थापन और जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।
प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था नहीं मिली है। इसी मुद्दे को लेकर कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने आंदोलन छेड़ रखा है। कांग्रेस भी इस आंदोलन के समर्थन में खुलकर सामने आ रही है। जीतू पटवारी का यह दौरा भी उसी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा माना जा रहा है।
इस पूरे मामले में कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा सरकार में प्रशासनिक अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और विपक्षी नेताओं को जनता से मिलने से रोका जा रहा है। छतरपुर के पूर्व विधायक आलोक चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने भी कलेक्टर से बातचीत की थी, लेकिन उन्हें भी प्रभावित क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि परियोजना स्थल पर सुरक्षा कारणों से कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे और कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। हालांकि कलेक्टर पार्थ जैसवाल की ओर से इस वायरल वीडियो और बहस पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस विवाद के बीच केन-बेतवा परियोजना स्थल पर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद ग्रामीणों में और ज्यादा नाराजगी फैल गई। धरना स्थल पर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने चिता आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी चिताओं पर लेटकर विरोध जता रहे हैं और परियोजना को रोकने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार उनकी जमीन और जीवन दोनों छीन रही है।
हालांकि बाद में प्रशासन ने अमित भटनागर को रिहा कर दिया, लेकिन आंदोलन अभी भी जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक विरोध प्रदर्शन बंद नहीं होगा। लगातार बढ़ते विरोध और राजनीतिक बयानबाजी ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। कांग्रेस इस मामले को आदिवासी और किसान अधिकारों से जोड़कर सरकार पर हमला बोल रही है, जबकि भाजपा सरकार विकास और सिंचाई परियोजना के लाभ गिनाने में जुटी हुई है।
फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे जीतू पटवारी और कलेक्टर के बीच बहस वाले वीडियो ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि यह मामला केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में राजनीतिक संघर्ष और तेज होता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस