सरकार को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत, लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल, सदन के बाहर NDA की महिला सांसदों ने किया प्रदर्शन

लोकसभा में संविधान संशोधन बिल वोटिंग में गिर गया है. इस बिल पर चर्चा का गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया. गृह मंत्री के जवाब के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह बिल विचार और पारित करने के लिए पेश कर दिया. यह बिल पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी.

सरकार को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत, लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल, सदन के बाहर NDA की महिला सांसदों ने किया प्रदर्शन

लोकसभा महिला आरक्षण बिल पर चर्चा पूरी होने के बाद वोटिंग प्रक्रिया हुई. इलेक्ट्रॉनिक डेटा के अनुसार, इस दौरान कुल 489 वोटों में से पक्ष में 278 वोट और खिलाफ में 211 वोट पड़े. इसके साथ ही ये बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाया. हालांकि, फाइनल डेटा का अंतर कुछ और रहा. वोटिंग से कुछ देर पहले ही अमित शाह ने विरोध करने वाले पार्टी को कहा कि अगर इस बिल को पास नहीं होने दिया तो चुनावी मैदान में मातृ-शक्ति करारा जवाब देगी.

नई दिल्ली:Women Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका. संविधान संशोधन होने के कारण इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी. बिल के पक्ष के 298 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 230 वोट. ऐसे में इस बिल के लिए कुल 528 सांसदों ने वोट डाले, जिसका दो-तिहाई 352 होता है. लेकिन इस बिल के पक्ष में 298 वोट ही पड़े. लिहाजा यह बिल लोकसभा में 54 वोट से गिर गया. वोटिंग के बाद स्पीकर ओम बिरला ने इस बात की जानकारी दी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, "संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका, क्योंकि सदन में मतदान के दौरान इसे दो-तिहाई बहुमत प्राप्त नहीं हुआ."

संविधान का 131वां (संशोधन) विधेयक, 2026 पर हुई वोटिंग

इस संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा की सीटें 850 करने का प्रस्ताव है, राज्यों से 815 और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 सीटें हो सकती है. संविधान (131वां संशोधन) संशोधन बिल के लिए लोकसभा में कुल 489 वोट पड़े. बिल के पक्ष में 298 वोट, जबकि बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े. बिल पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, ऐसे में यह बिल पास नहीं हो सका.

21 घंटे की चर्चा, 130 सांसदों ने रखे विचार, फिर हुई वोटिंग

मालूम हो कि गुरुवार को संसद के विशेष सत्र के पहले दिन इन तीन बिल पर देर रात तक बहस चली, आज शुक्रवार को भी कई घंटे की बहस हुई. जिसके बाद इस पर लोकसभा में वोटिंग हुई. बताया गया कि बिल पर 21 घंटे चर्चा हुई. कुल 130 सांसदों ने अपने विचार रखें इनमें 56 महिला सांसद थीं.

गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर परिसीमन लटकाए रखने का आरोप लगाया और कहा कि 50 साल से जनता को आबादी के अनुपात में अपना प्रतिनिधि नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल का विरोध कर रहे हैं. चुनाव में इनको माताओं-बहनों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा, रास्ता नहीं मिलेगा.

इस बिल पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को भी पक्ष और विपक्ष में जमकर तकरार हुई. जोरदार हंगामा हुआ. महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर सरकार सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों के अपने तर्क थे. वहीं, विपक्ष ने सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया. अखिलेश यादव ने तो यहां तक कह दिया कि बीजेपी यह लिखकर दे दे कि अगला प्रधानमंत्री महिला को बनाएंगे, तब भी हम भरोसा नहीं करेंगे

देना होगा महिलाओं को जवाब'

सूत्रों ने कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से कहा है कि विपक्ष को इसके परिणामों का सामना करना होगा और महिलाओं को जवाब देना होगा। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "उन्होंने देश की महिलाओं को निराश किया है। यह संदेश हर एक व्यक्ति तक, हर एक गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए।"

बिल गिरने के बाद विपक्ष पर भाजपा हमलावर

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार को इस बात का दुख है कि महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन पारित नहीं हो सके।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह हार सरकार की विफलता नहीं है। उन्होंने इसे कांग्रेस और उसके सहयोगियों द्वारा "देश पर एक बड़ा हमला" बताया, इसे पार्टी पर एक "काला धब्बा" कहा और सवाल उठाया कि वे विधेयक की हार का जश्न कैसे मना सकते हैं। साथ ही उन पर बहाने बनाने का आरोप लगाया।

भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर महिलाओं से अवसर छीनने का जश्न मनाने का आरोप लगाया और कहा कि बिल के गिर जाने के बाद पार्टी ने खुशी मनाई। वहीं, भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि वे आमतौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा पर टिप्पणी करने से बचते हैं, लेकिन उन्होंने उनकी टिप्पणियों की आलोचना करते हुए उनके इस दावे पर सवाल उठाया कि मौजूदा राजनीतिक बहस में महिलाओं का "इस्तेमाल" किया जा रहा है।

संसद परिसर में बीजेपी की महिला सांसदों का प्रोटेस्ट

महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल मतदान के दौरान गिर गए. इस बिल के लोकसभा में गिर जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. संसद के मकर द्वार से यह प्रोटेस्ट शुरू हुआ. अब बीजेपी और एनडीए में शामिल दलों के कार्यकर्ता कल यानी 18 अप्रैल से इंडिया ब्लॉक से जुड़ी पार्टियों के नेताओं के घर के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे. 

कम पड़़ गए 54 वोट, 352 की जगह मिल पाए 298

महिला आरक्षण से जुड़े बिल पर 528 वोट पड़े. यह संविधान संशोधन बिल थे, जिन्हें पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी होता है. ऐसे में बिल पारित कराने के लिए 352 वोट की जरूरत थी, लेकिन बिल के पक्ष में 298 वोट ही पड़े. इस बिल के विरोध में 230 वोट पड़े.