सेक्स सीडी कांड: सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस, भूपेश बघेल का बयान

छत्तीसगढ़ के ‘सेक्स सीडी’ मामले नया मोड़ आया है। मामले में कॉन्ग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें भूपेश बघेल को बरी कर दिया गया था।

सेक्स सीडी कांड: सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी कांग्रेस, भूपेश बघेल का बयान

सेक्स सीडी कांड पर कांग्रेस का बड़ा कदम: सेशन कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएगी पार्टी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ऐलान

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित सेक्स सीडी कांड मामले में कांग्रेस अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने साफ किया है कि रायपुर सेशन कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ कांग्रेस हाईकोर्ट में अपील करेगी।

भूपेश बघेल ने कहा कि यह मामला पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें पहले ही इस केस से डिस्चार्ज किया जा चुका था, लेकिन अब सीबीआई ने सेशन कोर्ट में दोबारा अपील की है।

 छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। 2017 के बहुचर्चित 'सेक्स सीडी' मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित सभी आरोपियों के लिए राहत भरा फैसला पलट दिया गया है।

रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत (सेशन कोर्ट) ने शनिवार 24 जनवरी 2026 को दिए अपने आदेश में निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) के 2024 के उस फैसले को रद कर दिया, जिसमें भूपेश बघेल को दोषमुक्त (डिस्चार्ज) घोषित किया गया था।

कोर्ट ने सीबीआई की रिव्यू याचिका को मंजूर करते हुए स्पष्ट किया कि निचली अदालत का निर्णय कानून के अनुरूप नहीं था। इस फैसले के साथ ही अब पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के खिलाफ मुकदमा फिर से चलेगा।

कोर्ट ने मामले के अन्य आरोपियों कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा और विजय भाटिया द्वारा आरोप तय करने के खिलाफ दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया है।

क्या है सेशन कोर्ट का ताजा फैसला

दरअसल, रायपुर सेशन कोर्ट ने CBI की उस रिव्यू याचिका को मंजूरी दे दी है, जिसमें लोअर कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। इसके साथ ही सेशन कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नियमित कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की दोबारा सुनवाई होगी।

मार्च 2025 में CBI की विशेष अदालत ने भूपेश बघेल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है। इसी फैसले को चुनौती देते हुए CBI ने सेशन कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल की थी।

बचाव पक्ष ने बताया था झूठा मामला

इससे पहले भूपेश बघेल की ओर से जबलपुर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने कोर्ट में दलीलें रखी थीं। उन्होंने कहा था कि भूपेश बघेल को झूठे मामले में फंसाया गया है। न तो उन्होंने किसी CD का निर्माण कराया और न ही उसका वितरण किया। बचाव पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया था कि बघेल की ओर से किसी तरह का कोई अपराध नहीं किया गया।

मुरारका-विनोद वर्मा को नहीं मिली राहत

इस मामले में कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए सेशन कोर्ट में आवेदन दिया था। हालांकि कोर्ट ने दोनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट का कहना है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उन्हें ट्रायल का सामना करना होगा।

इस केस में भूपेश बघेल के अलावा कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने केस सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी।