फिर मिलेगा मिट्टी का तेल: रसोई गैस के विकल्प के रूप में केरोसिन बिक्री शुरू, प्रति परिवार 3 लीटर कोटा तय, कीमत भी निर्धारित

मप्र सरकार ने रसोई गैस की संभावित कमी के कारण पांच साल बाद केरोसिन वितरण फिर से शुरू किया है। यह व्यवस्था मांग आधारित होगी, जिसमें प्रति परिवार तीन लीटर केरोसिन मिलेगा। केंद्र ने राज्य को 10 लाख लीटर केरोसिन आवंटित किया है।

फिर मिलेगा मिट्टी का तेल: रसोई गैस के विकल्प के रूप में केरोसिन बिक्री शुरू, प्रति परिवार 3 लीटर कोटा तय, कीमत भी निर्धारित

खाद्य आयुक्त कर्मवीर शर्मा ने बताया कि सभी कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में मांग का आकलन कर प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

भोपाल। प्रदेश में रसोई गैस के विकल्प के तौर पर केरोसिन बेचा जाएगा। पांच साल बाद यह व्यवस्था मांग के आधार पर लागू होने जा रही है। जिलों से कलेक्टर मांग करते हैं तो फिर प्रति परिवार तीन लीटर के हिसाब से खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग केरोसिन उपलब्ध कराएगा। प्रदेश को भारत सरकार ने 10 लाख लीटर केरोसिन का आवंटन दिया है।

उज्ज्वला योजना के बाद बंद हुई व्यवस्था फिर होगी शुरू

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उज्ज्वला योजना में गैस चूल्हे और सिलिंडर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बाद केरोसिन का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बंद हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे घटनाक्रम से गैस की आपूर्ति में जो बाधा आई है, उसे देखते हुए भारत सरकार ने विकल्प के तौर पर केरोसिन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। प्रदेश को 10 लाख लीटर से अधिक केरोसिन प्राप्त भी हो गया है।

केंद्र से मिला केरोसिन

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अनुसार, जिन जिलों के कलेक्टर मांग भेजेंगे, वहां प्रति परिवार तीन लीटर के हिसाब से केरोसिन उपलब्ध कराया जाएगा। केंद्र सरकार ने प्रदेश को करीब 10 लाख लीटर केरोसिन का आवंटन दिया है, जो राज्य को प्राप्त भी हो चुका है।

फिर शुरू किया जा रहा वितरण

अधिकारियों के मुताबिक, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिलने के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में केरोसिन वितरण बंद कर दिया गया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते गैस आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए अब इसे वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में फिर लागू किया जा रहा है।

बनाई जा रही व्यवस्थाएं

वितरण व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयल कंपनियां पुराने वितरकों और परिवहनकर्ताओं से संपर्क कर रही हैं, वहीं प्रत्येक जिले में दो-दो पेट्रोल पंप भी चिन्हित किए जा रहे हैं, जहां से केरोसिन उपलब्ध कराया जाएगा।

वितरण के लिए पेट्रोल पंपों का किया जा रहा चयन

पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से इसका वितरण होता था, जिसके लिए ड्रम आदि की व्यवस्था रहती थी। आयल कंपनियों के जिलेवार वितरक भी थे, जो डिपो से केरोसिन लेकर दुकानों तक वितरण का काम करते थे। पांच साल पहले व्यवस्था बंद होने के कारण आयल कंपनियां परिवहनकर्ताओं के साथ वितरकों से चर्चा कर रही हैं। साथ ही प्रत्येक जिले के दो-दो पेट्रोल पंप भी चिह्नित किए जा रहे हैं, जहां से इसका वितरण करवाया जा सके।