जीतू पटवारी की किरकिरी-कांग्रेस दफ्तर में खुला असंतोष: बैठक में ही घिरे प्रदेश अध्यक्ष , कार्यकर्ता बोला- आप अपने लोगों से ही मिलते हैं
भोपाल में हुई यूथ कांग्रेस की बैठक में कार्यकर्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। नेतृत्व पर पक्षपात और संवादहीनता के आरोप लगे, जिससे संगठन के अंदर गहराते असंतोष के संकेत मिल रहे हैं। बैठक के दौरान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को कार्यकर्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा।
जीतू पटवारी की किरकिरी: कांग्रेस दफ्तर में फूटा असंतोष, बैठक में ही कार्यकर्ता ने घेरा—“सिर्फ अपने लोगों से मिलते हैं”
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने खुद का रियलिटी चेक किया, लेकिन उनका यह दांव उलटा पड़ गया। भरी मीटिंग में उन्हें पता चल गया कि वे कितने पानी में हैं। साथ ही उन्हें बड़ी नसीहत भी मिल गई।
दरअसल, जीतू पटवारी युवा कांग्रेस की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से पूछ लिया कि मेरे नेतृत्व में संगठन कैसा चल रहा है, मेरा कामकाज कैसा है।
एक कार्यकर्ता ने उनसे कहा कि आप कार्यकर्ताओं से नहीं मिलते। कार्यकर्ता ने जीतू पटवारी को उनके मंत्रीकाल के दौरान का एक किस्सा सुना दिया कि कैसे वह डेढ़-दो घंटे उनसे मिलने के लिए इंतजार करता रहा। पटवारी आए और कार में बैठकर चले गए, उससे नहीं मिले।
कार्यकर्ता ने सबके सामने जीतू पटवारी को नसीहत दी कि कोई कार्यकर्ता आपसे मिलने आए, अपनी बात कहना चाहे तो थोड़ा सा, दो मिनट उसे गंभीरता से सुन लें।
वैसे खरी बात यह है कि इसी 'चलो-चलो' के चक्कर में कांग्रेस की सरकार चली गई थी। ऐसे में कार्यकर्ता ने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की आंखें खोलने का काम किया है। उम्मीद है पीसीसी चीफ कार्यकर्ता से मिले इस दिव्य ज्ञान को आत्मसात करेंगे।
पटवारी जी मंत्री थे, आप बिना मिले हाथ हिलाकर चले गए
कांग्रेस मध्य प्रदेश में कार्यकर्ताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच की बढ़ती खाई को कम करने की कोशिश में जुटी है. कांग्रेस संगठन सृजन जैसे अभियान उसी शुरुआत का हिस्सा है. लेकिन क्या केवल कार्यक्रमों से या जिलाध्यक्षों को पावर दे दिए जाने से ये खाई मिट जाएगी. विपक्ष में दो दशक से ज्यादा का समय गुजार चुकी कांग्रेस जब छोटे से अंतराल के लिए सत्ता में आई तो क्या हो पाई थी कार्यकर्ताओं की सुनवाई. क्या अब भी पार्टी में बने खेमे कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी की यूथ विंग की बैठक ले रहे थे.
जाहिर है पार्टी ने नौजवानों को अपनी बात रखने का ओपन फोरम भी दिया. लेकिन इसी ओपन फोरम में पटवारी को समझाईश भी मिल गई. समझाईश ये कि आखिर नेता को कार्यकर्ताओं से कैसा बर्ताव करना चाहिए. इस बैठक में शामिल हुए हुजूर विधानसभा में पार्टी की तरफ से विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त किए गए सोहन मेवाड़ा ने अपने साथ हुआ वाकया सबके सामने सुनाया. जीतू पटवारी को संबोधित करते हुए मेवाड़ा ने कमलनाथ सरकार के दौर का वो वाकया सुनाया जब जीतू पटवारी सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री थे.
कांग्रेस ने बताया लोकतंत्र, बीजेपी बोली-धड़ों में बंटी है पार्टी
जीतू पटवारी की बैठक का ये वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि, ''कांग्रेस धड़ों में बंटी, समूहों में बंटी पार्टी है. इस पार्टी में जो आम कार्यकर्ता हैं उससे किसी को कोई लेना देना नहीं है. कांग्रेस में दिक्कत ही यही है कि नेता केवल अपने धड़े के लोगों से मिलना जुलना संवाद करना पसंद करते हैं. अब देखिए ऊपर से नीचे तक यही सीन है पूरी दुनिया में घूमते रहे लेकिन अपने घर को ठीक नहीं कर सकते तो खुद कैसे ठीक होंगे.''
वहीं, कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे पीसी शर्मा इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के मजबूत लोकतंत्र की तरह बताते हैं. वे कहते हैं, ''छोटे-मोटे मामले इतनी बड़ी पार्टी में चलते रहते हैं. उन्होंने कहा कि, ''ऐसा केवल कांग्रेस में ही संभव है कि अध्यक्ष खुद अपनी परफार्मेंस रिपोर्ट कार्यकर्ता से ले और कार्यकर्ता भी खुलकर अपनी बात रखें. ये लोकतंत्र केवल कांग्रेस में ही है. भाजपा में तो कोई बोल ही नहीं सकता. कार्यकर्ताओं के मुंह पर बैठक से पहले ही ताले लगा दिए जाते हैं.''
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस