जिला जज ने किया कारागार का निरीक्षण, निरुद्ध महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एवं खानपान पर दिए सख्त निर्देश

निरीक्षण में बंदी मुकदमों की पैरवी, विधिक सहायता, महिला बंदियों और उनके बच्चों की चिकित्सा व खान-पान की व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। जिला जज ने निर्देश दिए कि जिन बंदियों के पास निजी अधिवक्ता नहीं हैं या जो न्यायालय में पैरवी नहीं कर पा रहे, उन्हें विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। दोषसिद्ध बंदियों की अपील समय पर सुनिश्चित की जाए।

जिला जज ने किया कारागार का निरीक्षण, निरुद्ध महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा एवं खानपान पर दिए सख्त निर्देश

जिला जज ने किया कारागार का त्रैमासिक निरीक्षण, निरुद्ध महिलाओं के बच्चों को स्वस्थ्य खानपान के दिए निर्देश

उरई । उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जनपद न्यायाधीश विरजेन्द्र कुमार सिंह ने आज जिला कारागार उरई का त्रैमासिक निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया और वहां निरूद्ध बन्दियों से पूछ-तांछ करते हुये उनकी समस्यों को जाना समझा तथा जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। इस मौके पर जिला मजिस्ट्रेट श्री राजेश कुमार पाण्डेय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे, पुलिस अधीक्षक डॉ० दुर्गेश कुमार, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शाम्भवी-।, प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी श्री वीरेन्द्र कुमार एवं जेल प्रशासन के अधिकारीगण मौजूद रहे।

निरीक्षण में जिला जज ने बन्दियों के मुकदमों की पैरवी, उनको दी जाने वाली विधिक सहायता/सलाह और महिला बन्दी व उनके साथ रह रहे बच्चों की चिकित्सा व खान-पान इत्यादि के बारे में जाना-परखा। उन्होंने कई बन्दियों से अलग-अलग जानकारी ली एवं जेल प्रशासन को निर्देशित किया कि कोई भी ऐसा बन्दी जिसका निजी अधिवक्ता न हो अथवा विधिवत् ढंग से न्यायालयों में पैरवी न हो पा रही हो, को विधिक सहायता दिलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करें। यदि किसी विचाराधीन बन्दी को पैरवी हेतु सरकारी खर्चे पर अधिवक्ता की आवश्यकता हो तो सम्बन्धित न्यायालय में बन्दी की ओर से प्रार्थनापत्र दिलवाया जाना सुनिश्चित करें ताकि एमाइकस क्यूरी (न्यायमित्र) की सुविधा उपलब्ध हो सके। इसीप्रकार जो बन्दी दोषसिद्ध हो चुके हैं, की अपील न हो पाने की स्थिति में नियमानुसार जेल अपील करायी जाये। इसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आवश्यक समन्वय बनाकर ऐसे प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निस्तारण किया जाये ताकि अपील की मियाद समाप्त न होने पाये। जेल अपील कराये जाने में यदि कोई विधिक समस्या आ रही है तो उसको सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संज्ञान में लाते हुये द्वारा उचित माध्यम माननीय उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से यथा आवश्यक पत्राचार किया जाये। जिला कारागार में स्थित चिकित्सालय का निरीक्षण करते समय दवाओं की जाँच की गयी, जिसमें सभी दवायें ठीक पायी गयी।

मा० जनपद न्यायाधीश के द्वारा जेल प्रशासन को निर्देशित किया गया कि जिन विचाराधीन बन्दियों की जमानत सक्षम न्यायालय से हो चुकी हैं एवं जमानतगीर के अभाव में जेल में रिहा नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे बन्दियों की सूची कार्यालय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अविलम्ब उपलब्ध कराये जिससे कि उनकी रिहाई सम्भव हो सके।

इस अवसर पर कारापाल श्री प्रदीप कुमार, जेल चिकित्सक डॉ० राहुल बर्मन, उप कारापाल श्री अमर सिंह व श्री रामलखन एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जालौन के लिपिक श्री शुभम् शुक्ला उपस्थित रहे।