दिग्विजय सिंह ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन में पारदर्शिता की मांग

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन में शामिल 108 आदिवासी ग्रामों की आशंकाओं पर ध्यान दिलाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 285 पृष्ठों का मास्टर प्लान ग्राम सभाओं में ठीक से प्रस्तुत नहीं किया गया और पेसा एक्ट के तहत आवश्यक सहमति व सहभागिता नहीं हुई।

दिग्विजय सिंह ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन में पारदर्शिता की मांग

पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन में 108 आदिवासी ग्रामों की चिंता

771 वर्ग किमी क्षेत्र को ईएसजेड घोषित, आंचलिक महायोजना पर सवाल

285 पृष्ठों का मास्टर प्लान ग्राम सभाओं में प्रस्तुत नहीं करने का आरोप

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर महाकौशल क्षेत्र के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में स्थित पेंच टाइगर रिजर्व के ईको सेंसिटिव जोन (ESZ) में शामिल 108 आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में व्याप्त आशंकाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

771 वर्ग किमी क्षेत्र घोषित, आंचलिक महायोजना पर सवाल

सिंह ने पत्र में उल्लेख किया कि वर्ष 2019 में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अधिसूचना के तहत इंदिरा प्रियदर्शनी पेंच राष्ट्रीय उद्यान और पेंच मोगली अभ्यारण को सम्मिलित करते हुए गठित पेंच टाइगर रिजर्व के चारों ओर 771 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था। अधिसूचना के अनुसार कोर और बफर जोन से लगे 2 किलोमीटर क्षेत्र को शामिल करते हुए “आंचलिक महायोजना” तैयार किए जाने तथा पंचायतराज संस्थाओं सहित 11 विभागों से परामर्श अनिवार्य किया गया था।

285 पृष्ठों का मास्टर प्लान ग्राम सभाओं में नहीं रखा गया

दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि 285 पृष्ठों के विस्तृत मास्टर प्लान को विधिवत ग्राम सभाओं में प्रस्तुत नहीं किया गया। केवल 24 घंटे की सूचना पर ग्राम सभाएं आयोजित कर औपचारिकता निभाई गई। ग्राम पंचायतों को मात्र 4 पृष्ठों की संक्षिप्त जानकारी दी गई, जबकि संपूर्ण दस्तावेज अंग्रेजी में होने से ग्रामीणों को पूरी जानकारी नहीं मिल सकी।

पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट के प्रावधानों का हवाला

उन्होंने कहा कि सिवनी और छिंदवाड़ा जिले के अधिकांश क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, जहां पेसा एक्ट लागू है। ऐसे में जल, जंगल और जमीन से जुड़े मामलों में ग्राम सभाओं की सहमति और सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। कुरई जनपद पंचायत (जिला सिवनी) के 55 ग्राम पेसा एक्ट के दायरे में हैं, जो सीधे तौर पर ईको सेंसिटिव जोन से प्रभावित हैं।

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई मांग

इस मुद्दे पर केवलारी विधायक रजनीश सिंह, कांग्रेस जिला अध्यक्ष नरेश मरावी, कांग्रेस वन प्रकोष्ठ अध्यक्ष आशिक इकबाल खान सहित कई जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन सौंपा है। सरपंच संघ, जनपद पंचायत कुरई ने कलेक्टर को पत्र लिखकर मांग की है कि—

मास्टर प्लान का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराया जाए

285 पृष्ठों की संपूर्ण प्रति ग्राम सभाओं में रखी जाए

कम से कम 30 दिन का समय देकर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाएं

पूरी प्रक्रिया पंचायतराज अधिनियम और पेसा एक्ट के अनुरूप पारदर्शी ढंग से पूरी की जाए

पर्यटन महायोजना में आदिवासियों की भागीदारी पर जोर

सिंह ने कहा कि प्रभावित 108 ग्रामों में 90 प्रतिशत से अधिक परिवार अनुसूचित जनजाति समुदाय से हैं, जिनकी आजीविका वन संसाधनों पर आधारित है। ईको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत प्रस्तावित आंचलिक महायोजना के साथ “पर्यटन महायोजना” भी बनाई जानी है। उन्होंने सुझाव दिया कि होम स्टे, छोटे होटल, रिसॉर्ट, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और वन उत्पाद आधारित उद्यमों में आदिवासी परिवारों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

पारदर्शिता नहीं हुई तो आजीविका पर संकट की आशंका

पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि यदि पारदर्शिता और सहभागिता सुनिश्चित नहीं की गई तो आदिवासी परिवारों की आजीविका पर संकट आ सकता है और उन्हें अनावश्यक प्रतिबंध या विस्थापन जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा करते हुए न्यायसंगत और सहभागी विकास मॉडल अपनाएगी।