दिग्विजय सिंह ने RSS के रजिस्ट्रेशन और राम मंदिर ट्रस्ट पर उठाए सवाल, सीहोर में दिया विवादित बयान
सीहोर में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने RSS के रजिस्ट्रेशन और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संघ का कोई औपचारिक पंजीयन नहीं है, इसलिए उसके फंड की जांच होनी चाहिए। मोहन भागवत के हिंदू धर्म वाले तर्क पर भी उन्होंने कटाक्ष किया। साथ ही राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि अयोध्या में भ्रष्टाचार का माहौल है। दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने नवंबर 2025 में मोहन भागवत को पत्र लिखकर RSS के वित्तीय स्रोतों और संगठनात्मक ढांचे को सार्वजनिक करने की मांग की थी।
RSS के रजिस्ट्रेशन पर दिग्विजय के सवाल
संघ के फंड और वित्तीय पारदर्शिता की जांच की मांग
मोहन भागवत के बयान पर साधा निशाना
हिंदू धर्म और RSS की तुलना पर जताई आपत्ति
चंपत राय पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
अयोध्या को बताया भ्रष्टाचार का केंद्र
सीहोर (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh ने एक बार फिर अपने बयानों से राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। सीहोर दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रजिस्ट्रेशन, उसकी वित्तीय पारदर्शिता और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
RSS के रजिस्ट्रेशन पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने कहा कि देश में किसी भी संस्था, समिति या संगठन के संचालन के लिए पंजीकरण, सदस्यता व्यवस्था और बैंक खातों का होना आवश्यक माना जाता है। उन्होंने दावा किया कि Rashtriya Swayamsevak Sangh एक ऐसा संगठन है, जिसका कोई औपचारिक रजिस्ट्रेशन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संगठन पंजीकृत नहीं है तो उसके नाम पर एकत्र होने वाला धन कहां जाता है और उसका हिसाब किस प्रकार रखा जाता है। दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की और कहा कि पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल आधार है, इसलिए किसी भी संगठन को उससे अलग नहीं रखा जा सकता।
मोहन भागवत के बयान पर तंज
RSS प्रमुख Mohan Bhagwat के हालिया बयानों का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने उन पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जब रजिस्ट्रेशन को लेकर सवाल उठते हैं तो संघ यह तर्क देता है कि हिंदू धर्म का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने इस तुलना को गलत बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म एक प्राचीन धार्मिक परंपरा है, जबकि संगठन आधुनिक कानूनी ढांचे के तहत आते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपरा और एक संगठित संस्था की तुलना उचित नहीं है और इसे आधार बनाकर जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।
अयोध्या और राम मंदिर ट्रस्ट पर आरोप
अपने बयान में दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अयोध्या में निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी भी आरोप के समर्थन में ठोस दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किए, लेकिन उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
“अयोध्या भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है” – दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि अयोध्या में चल रहे विकास और मंदिर निर्माण कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से परियोजनाओं को लेकर चर्चाएं सामने आती हैं, उससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने इसे “चिंताजनक स्थिति” बताते हुए कहा कि जिम्मेदार संस्थाओं को जनता के सामने पूरी जानकारी रखनी चाहिए।
12 नवंबर 2025 के पत्र का जिक्र
सीहोर में दिए बयान के दौरान दिग्विजय सिंह ने यह भी बताया कि उन्होंने 12 नवंबर 2025 को RSS प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने संघ के अपंजीकृत स्वरूप, वित्तीय स्रोतों और संगठनात्मक संरचना पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा कि देश में लाखों सामाजिक और धार्मिक संगठन कानून के तहत पंजीकृत हैं और वे अपने आय-व्यय का पूरा विवरण देते हैं। ऐसे में RSS जैसी बड़ी संस्था को भी पारदर्शिता के दायरे में आना चाहिए।
संगठन और राजनीति पर टिप्पणी
दिग्विजय सिंह ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने लंबे राजनीतिक अनुभव में उन्होंने पहले कभी ऐसी परिस्थितियां नहीं देखीं, जहां संस्थागत जवाबदेही पर इतने सवाल उठ रहे हों।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी संगठन को बदनाम करना नहीं है, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना
दिग्विजय सिंह के इन बयानों के बाद राजनीतिक विवाद तेज होने की संभावना है। आमतौर पर ऐसे बयानों पर भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेता तीखी प्रतिक्रिया देते रहे हैं। हालांकि इस मामले में अभी तक किसी बड़ी प्रतिक्रिया का औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी राजनीतिक माहौल में और अधिक बहस को जन्म दे सकता है, खासकर तब जब संगठनात्मक पारदर्शिता और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका पर बहस पहले से ही जारी है।
सीहोर में दिए गए इस बयान ने एक बार फिर मध्य प्रदेश की राजनीति को गर्म कर दिया है। एक ओर जहां दिग्विजय सिंह ने पारदर्शिता और जांच की मांग उठाई है, वहीं दूसरी ओर यह मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर की शुरुआत कर सकता है। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस