मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में VIP को मिला गंदा पानी, आबकारी अधिकारी को नोटिस; कलेक्टर पर लगाए साजिश के आरोप
शाजापुर में सीएम कार्यक्रम के दौरान पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इसे लेकर आबकारी अधिकारी को नोटिस जारी किया है। नोटिस पर आबकारी अधिकारी का कहना है कि यह कलेक्टर की साजिश है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में वीआईपी और हेलीकॉप्टर के क्रू मेंबर को गंदा और मटमैला पानी पिलाना शाजापुर के आबकारी अधिकारी को भारी पड़ गया।
शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में मुख्यमंत्री के वीआईपी कार्यक्रम के दौरान पेयजल व्यवस्था में हुई कथित लापरवाही अब बड़ा प्रशासनिक विवाद बन गई है। कार्यक्रम में वीआईपी मेहमानों और क्रू मेंबर्स को उपलब्ध कराए गए पेयजल के नमूने लैब जांच में मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच रिपोर्ट में पानी में अत्यधिक गंदलापन (हाई टर्बिडिटी) पाए जाने के बाद उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने शाजापुर के जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर रंगशाही ने पूरे मामले को अपने खिलाफ रची गई साजिश बताते हुए तत्कालीन कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सेमलीधाम आश्रम में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा मामला
यह विवाद 30 अप्रैल 2026 को शाजापुर जिले की पोलायकलां तहसील स्थित सेमलीधाम आश्रम में आयोजित एक वीआईपी कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री समेत कई महत्वपूर्ण अतिथियों के आने की तैयारी की गई थी। प्रशासनिक आदेश के अनुसार हेलीपैड व्यवस्था, क्रू मेंबर्स के भोजन और पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को सौंपी गई थी।
कार्यक्रम संपन्न होने के बाद पेयजल की गुणवत्ता को लेकर भोपाल स्तर से आपत्ति दर्ज कराई गई। इसके बाद पानी के नमूनों की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में पानी में अत्यधिक गंदलापन और मटमैलापन पाया गया, जिसे तकनीकी भाषा में हाई टर्बिडिटी कहा जाता है। रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला गंभीर माना गया और इसकी जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
संभागायुक्त ने जारी किया नोटिस
पानी की गुणवत्ता संबंधी रिपोर्ट मिलने के बाद उज्जैन संभाग के आयुक्त आशीष सिंह ने 18 मई को जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में उनसे सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया कि वीआईपी कार्यक्रम में निम्नस्तरीय पेयजल उपलब्ध कराने की स्थिति क्यों बनी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
हालांकि नोटिस जारी होने के बाद भी रंगशाही की ओर से तत्काल जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने मामले से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी। उनका कहना है कि आवश्यक दस्तावेज उन्हें विलंब से प्राप्त हुए, जिसके कारण जवाब देने में देरी हुई। अब दस्तावेज प्राप्त होने के बाद वे विस्तृत जवाब तैयार कर रहे हैं।
रंगशाही ने लगाए गंभीर आरोप
नोटिस मिलने के बाद जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को अपने खिलाफ सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए कहा कि उनके विभाग को ऐसे कार्यों की जिम्मेदारी दी गई जो मूल रूप से दूसरे विभागों के दायरे में आते हैं।
रंगशाही का कहना है कि पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) या सत्कार विभाग की होनी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने इस जिम्मेदारी को संबंधित विभाग को सौंपने का सुझाव दिया, तब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा उन पर स्वयं यह कार्य संभालने के लिए दबाव बनाया गया।
उनके अनुसार अब उसी व्यवस्था में खामियां निकलने पर उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी अन्य विभागों की थी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पुराना विवाद भी आया सामने
यह पहला अवसर नहीं है जब विनय रंगशाही किसी वीआईपी दौरे को लेकर विवादों में आए हों। जानकारी के अनुसार सितंबर-अक्टूबर 2025 में मुख्यमंत्री के एक दौरे के दौरान हेलीकॉप्टर में फूड बास्केट उपलब्ध नहीं कराने और ड्यूटी में कथित लापरवाही को लेकर भी उन्हें नोटिस जारी किया गया था। उस मामले में भी उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था।
अब एक बार फिर वीआईपी कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर उन पर कार्रवाई होने से प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
कलेक्टर और आबकारी अधिकारी के बीच पुरानी खींचतान
शाजापुर के तत्कालीन कलेक्टर ऋजु बाफना और जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के बीच लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई बताई जाती है। दोनों अधिकारियों के बीच मतभेद पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार कलेक्टर ऋजु बाफना ने रंगशाही के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा उज्जैन संभाग आयुक्त को भेजी थी। इसके बाद 16 फरवरी को रंगशाही को निलंबित कर दिया गया। हालांकि इससे पहले 20 जनवरी को ही जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार उनसे लेकर उनके अधीनस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी निमिषा परमार को सौंप दिया गया था।
इस कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था। रंगशाही ने इसे चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने निलंबन पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी। अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि कलेक्टर ने संभाग आयुक्त को निलंबन की अनुशंसा बाद में भेजी, लेकिन उससे पहले ही अपने स्तर पर जिला आबकारी अधिकारी का प्रभार अधीनस्थ अधिकारी को सौंप दिया गया था।
अदालत ने प्रारंभिक तौर पर माना कि इस प्रकार की जल्दबाजी प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि घटनाक्रम की समय-सीमा और निर्णय लेने की प्रक्रिया की गहन जांच आवश्यक है। इसी आधार पर रंगशाही को अंतरिम राहत प्रदान की गई थी।
प्रशासनिक हलकों में बढ़ी चर्चा
अब वीआईपी कार्यक्रम के दौरान दूषित या मानकों से नीचे पाए गए पेयजल का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर शाजापुर प्रशासन चर्चा के केंद्र में आ गया है। एक ओर संभागायुक्त कार्यालय जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया में जुटा है, वहीं दूसरी ओर संबंधित अधिकारी इसे व्यक्तिगत प्रताड़ना और साजिश करार दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि पेयजल व्यवस्था में गंभीर लापरवाही हुई थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि जिम्मेदारी निर्धारण में प्रक्रियागत खामियां सामने आती हैं, तो मामला और अधिक जटिल हो सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें जिला आबकारी अधिकारी विनय रंगशाही के जवाब और प्रशासन द्वारा आगे की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारी किस पर तय होती है और क्या यह मामला केवल पेयजल व्यवस्था की चूक है या फिर प्रशासनिक टकराव का नया अध्याय।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस