34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिला स्थायित्व का अधिकार: खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयास से वर्षों की सेवा को मिला सम्मान

मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य एवं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोगों में कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा देने की मंजूरी दी है। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विशेष प्रयासों से लिए गए इस निर्णय को 9 जून 2026 की मंत्रिपरिषद बैठक में स्वीकृति मिली थी। इनमें 29 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और 5 ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर शामिल हैं। शासन ने इस मामले में "वन टाइम रिलेक्सेशन" देते हुए वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा, नियमानुसार वेतन और अन्य सुविधाओं का लाभ देने का रास्ता साफ किया है। सरकार के इस कदम को कर्मचारी हित और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मिला स्थायित्व का अधिकार: खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयास से वर्षों की सेवा को मिला सम्मान

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के प्रयास से शासन ने जारी किए आदेश

राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के 34 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

29 चतुर्थ श्रेणी और 5 कार्यालयीन कर्मियों को दी गई मान्यता

विशेष प्रकरण मानकर सरकार ने दी ‘वन टाइम रिलेक्सेशन’

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने कर्मचारी हित में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लेते हुए राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग तथा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोगों में वर्षों से कार्यरत 34 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा देने की अनुमति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में लिया गया यह फैसला लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विशेष प्रयासों से यह निर्णय संभव हो सका, जिसके बाद विभाग ने संबंधित आदेश भी जारी कर दिए हैं।

सरकार के इस फैसले से उन कर्मचारियों को स्थायित्व और सेवा सुरक्षा मिलेगी, जो लंबे समय से दैनिक वेतनभोगी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे। कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए यह निर्णय किसी सौगात से कम नहीं माना जा रहा है।

29 चतुर्थ श्रेणी और 5 कार्यालयीन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग एवं जिला आयोगों में कार्यरत 29 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तथा 5 ऑफिस मोहर्रिर-सह-डिस्पेचर पदों पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ दिया जाएगा। ये कर्मचारी लंबे समय से विभागीय कार्यों का निर्वहन कर रहे थे, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों की सुविधाएं प्राप्त नहीं थीं।

अब शासन के आदेश के बाद इन कर्मचारियों को नियमित सेवा से जुड़े विभिन्न लाभ प्राप्त हो सकेंगे, जिससे उनके भविष्य को नई सुरक्षा मिलेगी।

विशेष प्रकरण मानकर दी गई वन टाइम रिलेक्सेशन

उल्लेखनीय है कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा वर्ष 2016 में जारी परिपत्र के अनुसार 16 मई 2007 के बाद नियुक्त दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का लाभ देने के लिए शासन की पूर्व अनुमति आवश्यक थी। इसी कारण लंबे समय से कार्यरत होने के बावजूद कई कर्मचारी स्थायी दर्जा प्राप्त नहीं कर पा रहे थे।

इस मामले को विशेष परिस्थिति मानते हुए राज्य सरकार ने "वन टाइम रिलेक्सेशन" प्रदान किया है। इस विशेष छूट के माध्यम से उन कर्मचारियों को स्थायी कर्मी का दर्जा देने का मार्ग प्रशस्त हुआ, जो वर्षों से निरंतर सेवाएं दे रहे थे और अपने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।

मंत्रिपरिषद की बैठक में मिली थी मंजूरी

इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को 9 जून 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वीकृति प्रदान की गई थी। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने औपचारिक आदेश जारी कर संबंधित कर्मचारियों को स्थायी कर्मी मान्यता देने की प्रक्रिया को अमल में ला दिया।

सरकार के इस कदम को कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक सकारात्मक और दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है, बल्कि शासन की संवेदनशील कार्यशैली भी सामने आई है।

सेवा सुरक्षा के साथ मिलेंगी अन्य सुविधाएं

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि स्थायी कर्मी का दर्जा मिलने के बाद कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा प्राप्त होगी। साथ ही उन्हें शासन के नियमानुसार वेतन निर्धारण, भत्तों और अन्य पात्र सुविधाओं का लाभ भी मिल सकेगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की कार्यक्षमता उसके कर्मचारियों के समर्पण और मनोबल पर निर्भर करती है। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। यही सोच इस निर्णय के पीछे रही है।

कर्मचारियों में खुशी की लहर

सरकार के आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों और उनके परिवारों में खुशी का माहौल है। कई कर्मचारियों ने इसे वर्षों के संघर्ष और प्रतीक्षा का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि अब उन्हें नौकरी की अनिश्चितता से मुक्ति मिलेगी और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

कर्मचारियों का मानना है कि स्थायी दर्जा मिलने से उनके सामाजिक और आर्थिक जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। परिवारों को भी भविष्य को लेकर अधिक सुरक्षा का एहसास होगा।

संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण बना फैसला

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय केवल 34 कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की कर्मचारी हितैषी सोच और संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण भी है। लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सम्मान देना प्रशासनिक व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है।

सरकार द्वारा दी गई यह राहत उन कर्मचारियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है, जिन्होंने वर्षों तक सीमित सुविधाओं में रहकर अपनी सेवाएं दीं। अब उन्हें न केवल सम्मान मिला है बल्कि उनके भविष्य को भी स्थायित्व प्राप्त हुआ है।

इस फैसले को कर्मचारी कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और वे अधिक उत्साह, निष्ठा तथा समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे।