पुरानी रंजिश में तीन युवकों का अपहरण, 6 घंटे तक बीहड़ में बनाकर रखा ‘मुर्गा’, डंडों से पीटा; फंसाने को कट्टा और चोरी की बाइक रखकर बनाया वीडियो
मुरैना के पोरसा क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते आठ आरोपियों ने तीन युवकों का कथित अपहरण कर उन्हें ज्ञानंदपुरा के पास बीहड़ में ले जाकर करीब छह घंटे तक मुर्गा बनाकर डंडों से पीटा। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें बाइक चोरी कबूल कराने के लिए प्रताड़ित किया गया और फंसाने के लिए उनके पास कट्टा व चोरी की बाइक रखकर वीडियो बनाया गया। सौरभ तोमर की शिकायत पर पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, धमकी और वसूली सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
पुरानी रंजिश में तीन युवकों का अपहरण
बीहड़ में ले जाकर 6 घंटे तक बेरहमी से पिटाई
‘मुर्गा’ बनाकर युवकों को दी गई यातना
झूठे केस में फंसाने के लिए रची साजिश का आरोप
मुरैना। जिले के पोरसा कस्बे में पुरानी रंजिश का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आठ आरोपियों ने तीन युवकों का कथित रूप से अपहरण कर उन्हें जंगल और बीहड़ क्षेत्र में ले जाकर घंटों तक प्रताड़ित किया। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें करीब छह घंटे तक ‘मुर्गा’ बनाकर रखा गया, लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया और झूठे मामले में फंसाने के लिए उनके पास अवैध कट्टा और चोरी की मोटरसाइकिल रखकर वीडियो भी बनाया गया। घटना के करीब 10 दिन बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है। सभी आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।
पुरानी दुश्मनी बनी हिंसा की वजह
पुलिस जांच में सामने आया है कि फरियादी सौरभ तोमर और मुख्य आरोपी आकाश तोमर पहले कथित रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के सरकारी चावल की खरीद-फरोख्त के अवैध कारोबार में जुड़े हुए थे। पिछले वर्ष प्रशासन ने चावल से भरा एक ट्रक जब्त किया था। बताया जा रहा है कि मुख्य आरोपी आकाश तोमर को संदेह था कि इस कार्रवाई की सूचना सौरभ तोमर ने अधिकारियों को दी थी।
इसी शक के चलते दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव और रंजिश चल रही थी। पुलिस का मानना है कि इसी पुरानी दुश्मनी का बदला लेने के लिए आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया।
युवकों को जबरन उठाकर ले गए आरोपी
पीड़ित सौरभ तोमर और उसके साथियों के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें अचानक घेर लिया और जबरन अपने साथ ले गए। इसके बाद उन्हें ज्ञानंदपुरा क्षेत्र के पास स्थित बीहड़ और जंगल में ले जाया गया, जहां उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने उन्हें कई घंटों तक मुर्गा बनाकर रखा और लगातार डंडों से मारपीट की। इस दौरान उनसे बाइक चोरी की बात कबूल कराने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने आरोपों को झूठा बताया तो मारपीट और बढ़ा दी गई।
पीड़ितों के मुताबिक, आरोपियों ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते हुए लगातार धमकियां भी दीं। उन्हें कहा गया कि यदि वे आरोप स्वीकार नहीं करेंगे तो उन्हें और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
झूठे केस में फंसाने की कोशिश का आरोप
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि बदमाश उन्हें अपराधी साबित करना चाहते थे। इसके लिए उनके पास एक अवैध कट्टा और कथित चोरी की मोटरसाइकिल रख दी गई।
इसके बाद आरोपियों ने वीडियो रिकॉर्डिंग की, ताकि बाद में यह दिखाया जा सके कि तीनों युवक चोरी और अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। पीड़ितों का दावा है कि यह पूरी साजिश उन्हें बदनाम करने और पुलिस कार्रवाई में फंसाने के उद्देश्य से रची गई थी।
सौरभ तोमर ने स्पष्ट कहा है कि उसने कोई बाइक चोरी नहीं की और न ही किसी अवैध हथियार से उसका कोई संबंध है। उसके अनुसार, यह सब पुरानी दुश्मनी के कारण किया गया।
एक लाख रुपये मांगने का भी आरोप
पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि मारपीट और धमकियों के दौरान उनसे एक लाख रुपये की मांग भी की गई। आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि यदि रकम नहीं दी गई तो उन्हें चोरी और अन्य अपराधों में फंसा दिया जाएगा।
यह मामला केवल मारपीट या अपहरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कथित रूप से रंगदारी और जबरन वसूली का पहलू भी सामने आया है। पुलिस इसी दिशा में भी जांच कर रही है।
पीड़ितों ने उठाए कई सवाल
घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाया है कि यदि वास्तव में मोटरसाइकिल चोरी हुई थी तो आरोपियों ने इसकी शिकायत पुलिस में क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासन की है, न कि किसी व्यक्ति या समूह की।
पीड़ितों का कहना है कि आरोपियों ने खुद को कानून से ऊपर समझते हुए फैसला सुनाने और सजा देने की कोशिश की, जो बेहद गंभीर और खतरनाक प्रवृत्ति है।
आठ आरोपियों पर दर्ज हुआ मामला
पीड़ित सौरभ तोमर की शिकायत के आधार पर पोरसा थाना पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपियों में आकाश तोमर, खिलाड़ी, मनीष सिंह, वीरू, विष्णु सिंह, हिमांशु सिंह, छोटू और प्रमोद तोमर के नाम शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट, धमकी, अवैध रूप से बंधक बनाने, जबरन वसूली की कोशिश तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीमों को आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी
पोरसा पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पीड़ितों द्वारा लगाए गए कट्टा रखने और चोरी की बाइक रखकर वीडियो बनाने के आरोप कितने सही हैं।
जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने, वीडियो और अन्य सबूतों की जांच करने तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने में जुटे हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्र में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
घटना सामने आने के बाद पोरसा और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। यदि आरोप सही हैं तो यह कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है।
नागरिकों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति निजी दुश्मनी निकालने के लिए इस तरह की हिंसक और गैरकानूनी हरकत करने का साहस न कर सके।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि निजी रंजिश और बदले की भावना किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकती है। अब पूरे मामले में पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस