व्यापमं घोटाला फिर चर्चा में: सुप्रीम कोर्ट ने CBI और MP सरकार से मांगी 320 पेज की शिकायत पर कार्रवाई की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार को स्पष्ट आदेश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट सख्त: 320 पन्नों की शिकायत पर CBI और MP सरकार से मांगा जवाब, 16 अप्रैल को अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं महाघोटाले में सख्ती दिखाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार से 320 पन्नों की शिकायत पर अब तक की कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने जांच और चार्जशीट की पूरी जानकारी एफिडेविट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामला पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका से जुड़ा है, जिसे पहले हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और अगली तारीख 16 अप्रैल 2026 तय की गई है।
व्यापमं महाघोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार से 320 पन्नों की विस्तृत शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा मांगा है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच एजेंसी और राज्य शासन अब तक की जांच, दर्ज मामलों और दाखिल चार्जशीट की जानकारी शपथ पत्र (एफिडेविट) के साथ पेश करें। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इतनी विस्तृत शिकायत पर आखिर अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान सकलेचा की ओर से सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा के साथ सर्वम रितम खरे, विपुल तिवारी और इंद्रदेव सिंह मौजूद रहे। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू और CBI की तरफ से दविंदर पाल सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।
इससे पहले इंदौर हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में सकलेचा की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वे इस मामले में सीधे तौर पर प्रभावित पक्ष नहीं हैं। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सकलेचा की ओर से दलील दी गई कि भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायतकर्ता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए अब जवाब तलब किया है।
मामले की पृष्ठभूमि में जाएं तो यह शिकायत करीब 11 साल से लंबित है।
2014 में STF के विज्ञापन के बाद पारस सकलेचा ने पुख्ता दस्तावेजों के साथ पहली शिकायत दर्ज कराई थी।
2015 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच CBI को सौंपी गई, जिसके बाद उन्होंने 320 पन्नों की विस्तृत शिकायत दिल्ली में जमा की।
2016 में CBI और STF ने बयान दर्ज किए, लेकिन ठोस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी और फाइलें विभिन्न विभागों में घूमती रहीं।
लंबे समय तक कार्रवाई न होने पर 2023 में सकलेचा ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां से याचिका खारिज होने के बाद मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा सख्त रुख के बाद अब इस बहुचर्चित व्यापमं महाघोटाले की जांच में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस