BSNL नहीं बिकेगा, निजीकरण की संभावनाओं को मंत्री सिंधिया ने किया खारिज, बताया भारत की संपत्ति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएसएनएल के प्राइवेटाइजेशन का तो कोई सवाल ही नहीं उठता. BSNL भारत की जनता की है और भारत की जनता के लिए है. सिंधिया ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार BSNL को मजबूत करने और उसकी टेलीकॉम क्षमताओं का विस्तार करने पर फोकस कर रही है.
सिंधिया ने सदन को आश्वस्त किया कि BSNL सरकारी स्वामित्व में ही रहेगी और यह भारत के लोगों की संपत्ति है, जो देश की सेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
नईदिल्लीः केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को लोकसभा में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड के निजीकरण का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि यह सरकारी दूरसंचार ऑपरेटर सार्वजनिक स्वामित्व में ही बना रहेगा और सरकार इसे और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मंत्री सिंधिया ने कड़े शब्दों में कहा, बीएसएनएल के निजीकरण का सवाल ही नहीं उठता। यह कंपनी, भारत के लोगों की संपत्ति है और यह भारत की जनता की सेवा के लिए ही है। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पूरा ध्यान बीएसएनएल की क्षमताओं के विस्तार और इसके आधुनिकीकरण पर है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में निजीकरण का कोई मुद्दा नहीं है और बीएसएनएल देश की सेवा के प्रति समर्पित है।
बीएसएनएल के 4G रोलआउट के प्रति सरकार के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए सिंधिया ने बताया कि कंपनी के पास दो विकल्प थे: पहला, दक्षिण कोरिया, फिनलैंड, स्वीडन या चीन जैसे अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से उपकरण खरीदना और दूसरा, स्वदेशी क्षमताओं को विकसित करना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक साहसी निर्णय लेते हुए मेक इन इंडिया पर जोर दिया। इसके परिणामस्वरूप, भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश बन गया है जो अपना स्वयं का दूरसंचार उपकरण (टेलीकॉम स्टैक) बना रहा है। अब भारत का 4 जी डिजिटल स्टैक एक उपकरण निर्माता के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना चुका है।
मंत्री ने यह भी साझा किया कि प्रधानमंत्री ने सितंबर 2025 में इस स्वदेशी पहल का उद्घाटन किया था, जिसके बाद बीएसएनएल के ग्राहक आधार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। ग्राहकों की संख्या 8 करोड़ 55 लाख से बढ़कर अब 9 करोड़ 27 लाख हो गई है। उन्होंने अंत में कहा कि सरकार जल्द से जल्द 5 जी तकनीक लाने की दिशा में भी काम कर रही है, लेकिन उससे पहले 4 जी नेटवर्क को पूरी तरह स्थिर करना प्राथमिकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस