स्टाफ नर्स ने सोलह हजार में किया था गर्भपात का सौदा,जांच कमेटी ने गर्भपात मामले में नर्सिंग ऑफिसर को बताया दोषी, कार्रवाई का पत्र जेडी ऑफिस ने दबाया
जांच कमेटी द्वारा संविदा स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर प्रीतू दुबे को अवैध रूप से पैसा लेकर गर्भपात कराने और एमपीटी एक्ट 1971 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जांच प्रतिवेदन तैयार होकर सीएमएचओ कार्यालय से जेडी सागर को भेजा जा चुका है, लेकिन दो माह से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो एफआईआर दर्ज कराई गई और न ही नर्स के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई।
जेडी ऑफिस में दो महीने से दबी जांच फाइल, प्रशासनिक मिलीभगत के आरोप
छतरपुर। बीती मई 2025 बड़ामलहरा सिविल अस्पताल में पदस्थ महिला संविदा नर्सिंग ऑफिसर के द्वारा टीकमगढ़ जिले की बिना शादीशुदा लड़की का गर्भपात अस्तपाल में कराया गया इसके एवज में नर्स ने 16 हजार रुपए की राशि पीड़िता से ली थी और इसी दौरान गर्भपात कराने वाली लड़की की हालत बिगड़ने के कारण उसे जिला अस्पताल डाक्टर के फर्जी साइन बनाकर रिफर कर दिया था जिसके बाद पीड़ित लड़की को गंभीर हालत में उसके परिजन झांसी और ग्वालियर इलाज के लिए ले गए थे.

जिसके बाद दोषी स्टाफ नर्स के खिलाफ 16 हजार रूपए लेकर कर जान जोखिम में डालने के संबंध में शिकायत छतरपुर निवासी रामकुमार कुशवाहा ने मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन संचालक स्वास्थ महिला आयोग ओर मानव अधिकार आयोग में की थी
जांच कमेटी द्वारा जांच में पाया कि, उपरोक्त घटना में नर्सिंग ऑफिसर के द्वारा बच्चेदानी की सफाई कर पैसे लिया जाने की सत्यता पाई जाती हैं।
नर्सिंग ऑफिसर प्रीतो दुबे के द्वारा अपनी ड्यूटी के दौरान लगातार लापरवाही और अनियतिताएं करने की शिकायते पहले भी सामने आ चुकी है लेकिन अवैध तरीके से गर्भपात मामले की शिकायत पर संचालक स्वास्थ्य सेवाएं भोपाल के द्वारा जेडी सागर को मामले की जांच करने के लिए निर्देशित किया गया था। इसके बाद जेडी सागर ने सीएमएचओ को मामले की जांच के आदेश दिए जिस पर जांच अधिकारी डॉ. एस प्रजापति, डॉ सुरेखा खरे और कपिल डावर की टीम के द्वारा पूरे मामले की जांच की गई जिसमें निकल कर आया कि, बड़ामलहरा अस्पताल में पदस्थ रही संविदा स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर प्रीतू दूबे के द्वारा सोलह हजार रुपए लेकर गर्भपात किया ओर पीड़िता की जान जोखिम मे डाली साथ ही गलत बयान दिया गया हैं कि, उसके द्वारा कोई भी इलाज नहीं किया गया है न ही कोई पैसा लिया गया
लेकिन उसके साथ उपस्थित नर्सिंग ऑफिसर यामिनी भारती द्वारा कथन में कहा गया कि, प्रीतू दुबे द्वारा मरीज़ को मैनेज किया गया था और उसे रेफर किया गया वही ड्यूटी पर उपस्थित डॉ. राकेश शुक्ला को किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी गई थी और रेफर स्लिप पर डॉ. हरगोविंद राजपूत का नाम बिना बताए ही लिख दिया गया है जो की प्रीतू दुबे द्वारा किया गया है इस संबंध मे डॉ हरगोविंद राजपूत ने भी कथन में रेफर पेपर पर अपने साइन होने से इंकार किया है
जिला अस्पताल की डॉ. साक्षी गंगले के द्वारा भी अपने कथन में लेख किया गया है कि, मरीज के साथ आए लोगों के द्वारा प्रीतू दुबे स्टाफ नर्स द्वारा बच्चेदानी की सफाई की जाना बताया गया हैं जिसके सबूत के तौर पर डॉ साक्षी गंगेले द्वारा अपने ओर सुमन हेल्प डेस्क के कर्मचारी राजाराम की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच कमेटी को दी गई जिसमें प्रीतो दुबे के द्वारा अवैध तरीके से पैसा लेकर गर्भपात करने का जिक्र है।
पीड़ित ने कहा16 हजार लेकर प्रीतो दुबे ने कराया था गर्भपात
टीकमगढ़ जिला की बड़ागांव ब्लॉक के ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता के द्वारा घटना के बारे में जांच टीम को लिखित रूप से बयान में कहा कि, 16 हजार रुपए का लेने-देन कर उसका गर्भपात प्रीतू दुबे के द्वारा कराया गया था। लेकिन हालत नाजुक होने के बाद उसे रैफर कर दिया गया। वहीं ग्वालियर के सुविधा हॉस्पिटल के दस्तावेजों का अवलोकन करने पर यह पाया गया कि, उसकी बच्चादानी फटी हुई थी जिसकी सर्जरी, सुविधा हॉस्पिटल ग्वालियर के द्वारा किया गया एवं उसे दिनांक 28 मई को भर्ती किया गया और 6 जून तक भर्ती कर इलाज किया गया सुविधा अस्पताल अस्पताल प्रबंधन के द्वारा लड़की का गर्भपात होने की सूचना संबधित झांसी रोड थाने को थाने को दी गई थी। जांच टीम ने इस पूरे मामले की बारीकी से जांच करके संविदा स्टाफ नर्स प्रीतो दुबे के द्वारा पैसा लेकर गर्भपात करने
ओर पैरामेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेन्सी एक्ट, 1971 (MPT Act) का उल्लंघन की घटना की सत्य बताया है किया जाना दर्शाता है
जेडी ऑफिस ने दवाई जांच रिपोर्ट
सीएमएचओ के निर्देश पर जांच पूरी हुए दो माह का समय व्यतीत हो गया है। लेकिन जेडी ऑफिस सागर के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दोषी नर्सिंग ऑफिसर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की बल्कि कार्रवाई की फाइल को दबा के रख दी।
जेडी ऑफिस में ये फाइल नर्सिंग शाखा प्रभारी के पास दबी पड़ी हुई है।
वही शिकायतकर्ता रामकुमार कुशवाहा का कहना है यदि जेडी ऑफिस के द्वारा दोषी नर्स के विरुद्ध एमपीटी एक्ट 1971 के तहत एफआईआर दर्ज नहीं कराती तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी।
सीएमएचओ ने
मानव अधिकार और महिला आयोग भेजा जांच प्रतिवेदन
शिकायतकर्ता रामकुमार कुशवाहा ने बड़ामलहरा अस्पताल में अवैध तरीके से पैसा लेकर प्रीतो दुबे स्टाफ नर्स द्वारा गर्भपात करने की शिकायत राज्य मानव अधिकार आयोग ओर महिला आयोग से भी की थी जिस पर आयोग द्वारा कलेक्टर छतरपुर से जांच प्रतिवेदन मांगा था जिस पर सीएमएचओ ने कलेक्टर के माध्यम से पहुंचा दिया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस