माघ मेले को बीच में छोड़ चल दिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद! कहा- बिना स्नान दुखी मन से लौट रहा हूं, इसकी कल्पना नहीं की थी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।

माघ मेले को बीच में छोड़ चल दिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद! कहा- बिना स्नान दुखी मन से लौट रहा हूं, इसकी कल्पना नहीं की थी

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती माघ मेला में मौनी अमावस्या पर स्नान न कर पाने के बाद प्रयागराज से काशी रवाना हो गए। प्रशासन द्वारा रोके जाने और संतों के अपमान का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सनातनी लोगों पर हमला हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी सकारात्मक निर्णय न लेने का आरोप लगाया और सनातनियों से एकजुट होकर 'असली-नकली हिंदू' का फर्क समझने का आह्वान किया।

Swami Avimukteshwaranand PC: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आज (बुधवार को) यूपी के प्रयागराज में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसके बाद अब वे प्रयागराज से वापस लौट गए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेले से जाते-जाते एक बार फिर प्रशासन पर निशाना साधा और न्याय का इंतजार करने की बात की। मौनी अमावस्या पर जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए संगम की तरफ जा रहे थे तब मेला प्रशासन की तरफ से उन्हें रोका गया था, तब से वह अनशन पर बैठे हुए थे। तभी से यह विवाद जारी था।

हमने अन्याय को अस्वीकार किया- अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, 'हमने अन्याय को अस्वीकार किया है और न्याय की प्रतीक्षा करेंगे। आज स्वर बोझिल हैं और शब्द साथ नहीं दे रहे हैं। भारी मन लेकर प्रयाग से लौटना पड़ रहा है। प्रयाग में जो घटित हुआ उसने झकझोर दिया है। आज मन व्यथित है, बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं। न्याय की प्रतीक्षा कभी खत्म नहीं होती।'

प्रशासन का प्रस्ताव क्यों नहीं किया कबूल?

कल शाम और आज सुबह प्रशासन की ओर से एक प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें कहा गया था कि जब भी स्नान के लिए जाना चाहेंगे तब ससम्मान आपको पालकी के साथ स्नान करने के लिए ले जाएंगे। प्रस्ताव में कहा गया कि जो भी अधिकारी उस दिन मौजूद थे वही स्वागत में मौजूद रहेंगे। पुष्प वर्षा भी की जाएगी। लेकिन प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे इसलिए प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

अभी भी किस बात से नाराज अविमुक्तेश्वरानंद?

उन्होंने आगे कहा कि अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा-याचना कर सकते हैं तब तो ठीक। लेकिन अगर नहीं तो और कोई प्रस्ताव मंजूर नहीं। बटुकों, सन्यासी और साधुओं के साथ जो व्यवहार हुआ वो मुख्य मुद्दा है। 10 दिन शिविर के बाहर बैठने के बाद जब जाने का निर्णय किया तब प्रस्ताव आया। हम भारी मन से जा रहे हैं।

शब्द साथ नहीं दे रहे, मन व्यथित है"

प्रयाग से रवानगी के वक्त शंकराचार्य के स्वर बोझिल थे. उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "प्रयाग में जो कुछ घटित हुआ उसने भीतर तक झकझोर दिया है. आज मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही यहां से विदा ले रहे हैं. अन्याय को हमने अस्वीकार कर दिया है और अब केवल न्याय की प्रतीक्षा करेंगे." 

प्रशासन का प्रस्ताव और शंकराचार्य की 'न'

सूत्रों के अनुसार, विवाद को सुलझाने के लिए प्रशासन ने शंकराचार्य के सामने एक औपचारिक प्रस्ताव रखा था. इस प्रस्ताव में कहा गया था कि जब भी महाराज जी स्नान के लिए जाना चाहें, उन्हें ससम्मान पालकी के साथ ले जाया जाएगा. जिस दिन विवाद हुआ, उस दिन तैनात सभी अधिकारी स्वागत के लिए मौजूद रहेंगे. उनके ऊपर पुष्प वर्षा की जाएगी. शंकराचार्य ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें 'क्षमा' का कोई शब्द नहीं था. उन्होंने कहा, "अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा याचना कर सकते हैं, तब तो ठीक है; वरना पुष्प वर्षा वाला कोई भी प्रस्ताव मंजूर नहीं. असली मुद्दा हमारे बटुकों, संन्यासियों और साधुओं के साथ हुआ दुर्व्यवहार है." 

मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा था नोटिस

जान लें कि माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने से मेला पुलिस ने रोका था। उनके जुलूस के रोके जाने के बाद से ही विवाद जारी है। इसके बाद मेला प्रशासन ने उन्हें 2 नोटिस भेजे थे। दूसरे नोटिस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछा गया था कि क्यों न उनकी संस्था को मेला प्रशासन की तरफ से दी जा रहीं भूमि और सुविधाओं को निरस्त कर दिया जाए। क्यों ना मेले में उनका प्रवेश से प्रतिबंधित कर दिया जाए।

अविमुक्तेश्वरानंद का मेला प्रशासन को जवाब

इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि मेला प्रशासन की तरफ से लगाया गया यह आरोप कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी से मौनी अमावस्या स्नान के लिए गए थे, यह पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और निराधार है। फिलहाल स्वामी शिविर में नहीं हैं। ना ही उनके किसी आश्रम में कोई बग्घी है।