राजेंद्र भारती की बढ़ीं मुश्किलें: हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, तीसरी बार टली सुनवाई; दतिया में उपचुनाव की सरगर्मियां तेज
दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड मामले में मिली सजा के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को होने वाली सुनवाई 14 जुलाई तक टल गई है। इस स्थगन से उनकी राजनीतिक उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। राजेंद्र भारती ने दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की है।
राजनीतिक गलियारों में अब उपचुनाव की तारीखों की घोषणा को लेकर चर्चा तेज है।.
दतिया की सियासत में बढ़ी हलचल: पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को हाईकोर्ट से राहत नहीं, बैंक फ्रॉड मामले की सुनवाई तीसरी बार टली; उपचुनाव की चर्चाएं तेज
दतिया। मध्यप्रदेश की राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मामले की सुनवाई लगातार तीसरी बार टलने से न केवल कानूनी स्थिति जटिल बनी हुई है, बल्कि दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है।
दतिया विधानसभा सीट वर्ष 2023 के चुनाव परिणामों के बाद से ही राजनीतिक रूप से चर्चा में रही है। कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra को हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। लेकिन अब कानूनी संकट के चलते उनकी राजनीतिक स्थिति पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
26 साल पुराने बैंक हेराफेरी मामले ने बदली राजनीतिक तस्वीर
राजेंद्र भारती के खिलाफ मामला दतिया के सहकारी बैंक से जुड़े कथित फिक्स्ड डिपॉजिट घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित बताया जा रहा है। यह मामला करीब 26 वर्ष पुराना है, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट खातों में हेराफेरी और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।
बताया जा रहा है कि अप्रैल 2026 की शुरुआत में दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राजेंद्र भारती को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। सजा दो वर्ष से अधिक होने के कारण जनप्रतिनिधित्व कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त मानी गई और विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता शून्य घोषित कर दी।
इस कार्रवाई के बाद दतिया विधानसभा सीट रिक्त हो गई और क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे।
हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन राहत अभी दूर
सजा सुनाए जाने के बाद राजेंद्र भारती ने अपनी सदस्यता बहाल कराने और सजा पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उनके वकीलों ने अदालत में यह दलील दी कि अंतिम निर्णय आने तक राहत दी जाए और दोषसिद्धि पर रोक लगाई जाए।
हालांकि, लगातार तीसरी बार सुनवाई स्थगित होने से उन्हें कोई बड़ी राहत नहीं मिल सकी है। अदालत ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक बरकरार रखी है, लेकिन सदस्यता बहाली पर अभी कोई निर्णय सामने नहीं आया है।
सूत्रों के अनुसार अब मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को प्रस्तावित है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह सुनवाई दतिया की राजनीतिक दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।
दतिया में भाजपा की सक्रियता बढ़ी
राजेंद्र भारती की विधायकी समाप्त होने के बाद भाजपा ने दतिया में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विशेष रूप से पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि वर्ष 2023 में मिली हार के बाद नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटे हुए हैं। पिछले कुछ समय में उन्होंने कई दौरे किए हैं और स्थानीय स्तर पर संपर्क अभियान भी तेज किया है।
भाजपा के भीतर यह चर्चा तेज है कि यदि उपचुनाव होता है तो नरोत्तम मिश्रा पार्टी का प्रमुख चेहरा बन सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कांग्रेस के सामने चुनौती: गढ़ बचाने की तैयारी
दूसरी ओर कांग्रेस के सामने दतिया सीट को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। राजेंद्र भारती की कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पार्टी वैकल्पिक रणनीति पर विचार कर रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी चल रही है कि यदि कानूनी बाधाएं दूर नहीं होतीं तो कांग्रेस परिवार आधारित विकल्प पर विचार कर सकती है। चर्चाओं के अनुसार राजेंद्र भारती अपने परिवार के किसी सदस्य या बेटे को संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन संगठन स्तर पर संभावित समीकरणों पर मंथन जारी बताया जा रहा है।
चुनाव आयोग की तैयारियां भी शुरू
दतिया सीट रिक्त हुए लगभग दो माह का समय होने जा रहा है। निर्वाचन नियमों के अनुसार रिक्त सीटों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव कराना आवश्यक माना जाता है।
इसी बीच निर्वाचन आयोग की सक्रियता भी बढ़ती दिखाई दे रही है। क्षेत्र में मतदान केंद्रों की समीक्षा, मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रशासनिक तैयारियों की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है।
हालांकि चुनाव कार्यक्रम की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक तैयारियों ने उपचुनाव की अटकलों को और मजबूत कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट से राजेंद्र भारती को राहत नहीं मिलती है, तो दतिया में उपचुनाव लगभग तय माना जा सकता है।
प्रदेश राजनीति पर भी असर संभव
दतिया सीट केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व भी रखती है। यहां होने वाला संभावित उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन सकता है।
भाजपा इसे अपनी खोई हुई सीट वापस पाने के अवसर के रूप में देख रही है, जबकि कांग्रेस के लिए यह अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की परीक्षा होगी।
इसके साथ ही यह मुकाबला प्रदेश स्तर पर नेतृत्व, संगठन क्षमता और जनाधार की भी परीक्षा माना जाएगा। विशेष रूप से नरोत्तम मिश्रा की वापसी और कांग्रेस की रणनीति पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी रहेंगी।
फिलहाल सबकी निगाहें 14 जुलाई को प्रस्तावित हाईकोर्ट सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का अगला फैसला यह तय कर सकता है कि दतिया में उपचुनाव का बिगुल बजेगा या राजेंद्र भारती की राजनीतिक वापसी की संभावनाएं बची रहेंगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस