मानक के विपरीत खनन कर यमुना नदी के जलस्रोत को समाप्त कर रहा खनन माफिया

ठेकेदार को खनन करने की अनुमति होती है लेकिन ऐसा करने में ठेकेदार अक्षम रहता है क्योंकि जब किसी मौरंग खंड के मौरंग की उपलब्धता कम होती है तो उसकी भरपाई के लिए 5 से 10 मीटर गहरी नदी के तल से खुदाई कराने के लिए मजबूर हो जाते है क्योंकि अधिक लाभ पाने का लालच होता है ।

मानक के विपरीत खनन कर यमुना नदी के जलस्रोत को समाप्त कर रहा खनन माफिया

मानकों के विपरीत गहरी खुदाई से यमुना के जलस्रोत पर खतरा, जल संकट बढ़ने की आशंका; खनन पट्टों के खिलाफ NGT में याचिका की तैयारी।

उरई । कालपी तहसील के ग्राम हीरापुर के नाम से दो खंड जिला प्रशासन ने स्वीकृत किए है जिसको खंड संख्या 2 और 3 नाम दिया गया है । यह खंड वैभव गुप्ता जो राष्ट्रकवि मैथिलीशरण के परिवार के नाम अनुमोदित हुआ है और खंड संख्या 3 रवि पंजवानी के नाम से स्वीकृत हुआ है । इन दोनों ठेकेदारों और विभाग के बीच इकरारनामा के पहले शर्ते तय हुई थी । उन्हीं शर्तों के मुताबिक़ ठेकेदार को खनन करने की अनुमति होती है लेकिन ऐसा करने में ठेकेदार अक्षम रहता है क्योंकि जब किसी मौरंग खंड के मौरंग की उपलब्धता कम होती है तो उसकी भरपाई के लिए 5 से 10 मीटर गहरी नदी के तल से खुदाई कराने के लिए मजबूर हो जाते है क्योंकि अधिक लाभ पाने का लालच होता है । यह दोनों नौसिखिए ठेकेदार भी है जिनको खनन से अधिक लाभांश प्राप्त करने की ललक है । धार्मिक नगरी कालपी के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने का डर है जिस स्थान के आस पास खनन होता है वहां पानी का संकट होता है क्योंकि नदी के तल से अत्यधिक खनन नदी के जलस्रोत को खत्म कर देता है । वही दूसरी ओर जल पर काम करने वाली परमार्थ समाज सेवी संस्थान के सचिव संजय सिंह ने बताया कि यमुना को निर्मल बनाने के लिए जल सहेलियों द्वारा 500 किलोमीटर की यात्रा अभी पूर्ण हुई है। जिसमें 620 जल सहेलियों की सहभागिता हुई। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का मकसद ही यही था कि यमुना नदी को बचाया जाय । उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा जो खनिज के प्लॉट ठेकेदारों खनन के लिए दिए गए उसमें जो मानक है उसके विपरीत यदि वो जाएंगे तो निश्चित ही यमुना नदी को भारी नुकसान होगा वैसे हमारा मानना है कि सरकार को यमुना नदी में खनिज के लिए अनुमति देनी ही नहीं चाहिए थी । उन्होंने कहा पूरे देश आज सबसे बड़े जलस्रोत के रूप में यदि है वो नदियां ही है जिसको सरकार जानबूझकर खत्म कर रही है । उन्होंने कहा कि जिस जिस स्थान पर खनन होगा वहां के 10 से 15 किलोमीटर तक के गांवों में जल संकट गहराएगा । उन्होंने कहा कि ठेकेदार नदी के तल से इतना खनन करता है कि जो नदी के अपने जलस्रोत होते है वो भी नष्ट हो जाते है । उन्होंने कहा कि अभी मैने जालौन, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर में देखा कि यमुना नदी के स्वरूप को खनन माफिया ने बिगाड़ दिया है उन्होंने कहा कि हम लोग मिलकर एनजीटी में एक रिट दायर कर रहे है जिसमें यमुना नदी में जो खनन के पट्टे दिए गए इनको निरस्त किया जाय या जो मानक एनजीटी और विभाग के है उनके अनुरूप खनन हो ।