भोपाल नगर निगम में लोकायुक्त का छापा :संबल योजना और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच, लोकायुक्त की टीम कर रही पूछताछ

भोपाल नगर निगम की कम्प्यूटर शाखा पर शुक्रवार को लोकायुक्त की टीम ने छापा मारा। कार्रवाई फतेहगढ़ स्थित कार्यालय और लिंक रोड नंबर-2 पर बने मुख्य कार्यालय में एक साथ की गई। लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर और डीएसपी अजय मिश्रा टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।

भोपाल नगर निगम में लोकायुक्त का छापा :संबल योजना और ऑनलाइन रिकॉर्ड की जांच, लोकायुक्त की टीम कर रही पूछताछ

भोपाल नगर निगम कार्यालय में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को छापा मारा। लोकायुक्त टीम ने वित्त और कंप्यूटर शाखाओं के 10 साल पुराने रिकॉर्ड जब्त किए हैं। आशंका है कि यह एक सुनियोजित घोटाला है।

भोपाल ,मध्य प्रदेश लोकायुक्त पुलिस ने भोपाल नगर निगम में करोड़ों रुपए के कर्थित फर्जी भुगतान के मामले में छापेमारी कर जांच शुरू कर दी हैं। शिकायत में आरोप गलाया गया है कि बिना काम कराए ही फर्जी बिल लगाकर परिचितों की फर्जों को करोड़ों का भुगतान किया गया। इसके एवज में निगम के जिम्मेदारी से मोटी रकम कमीशन के रूप में ली। शुक्रवार को लोकायुक्त पुलिस की टीम ने नगर निगम के डाटा सेंटर कार्यालय समेत अन्य संबंधित शाखाओं में पहुंचकर दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के मामले सही पाए गए हैं। अब लोकायुक्त पुलिस ने भुगतान के सर्वर का डाटा जब्त कर उसका परीक्षण किया जाएगा। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

शिकायत के सत्यापन में अनियमितता के मिले सबूत

लोकायुक्त पुलिस को निगम में भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत में करोड़ों रुपये के फर्जी भुगतान का आरोप लगाया गया था। लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत का प्रारंभिक सत्यापन किया, जिसमें कुछ तथ्य सही पाए जाने के बाद न्यायालय से वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद टीम ने निगम कार्यालय और डाटा सेंटर में छापेमारी की कार्रवाई शुरू की।

दस साल के दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड कब्जे में

छापेमारी के दौरान लोकायुक्त टीम ने पिछले करीब दस वर्षों से जुड़े रिकॉर्ड और फाइलों को अपने कब्जे में लिया है। इसके साथ ही भुगतान से जुड़े एसएपी (SAP) सॉफ्टवेयर का डाटा भी जब्त किया गया है। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों और डिजिटल डाटा का विश्लेषण कर यह पता लगाएगी कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में वे काम हुए भी थे या नहीं। साथ ही इनमें कौन कौन सी फर्म और अधिकारियों की मिलीभगत थी।