सीएस अनुराग जैन एक्शन मोड में : अवैध खनन, कानून व्यवस्था और अफसरों की लापरवाही पर सख्त चेतावनी, अब गुजरे जमाने के ढर्रे पर काम नहीं चलेगा
मध्य प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने सुशासन के दावों की जमीनी हकीकत पर तीखे सवाल खड़े किए। प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चलेगा।
जनसुनवाई में जहर और आत्मदाह की घटनाओं पर सीएस सख्त
अवैध खनन माफियाओं पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश
बिना नंबर प्लेट वाहनों को जब्त कर नीलाम करने के आदेश
पुराने खनन माफियाओं की फाइलें दोबारा खोलने के निर्देश
दोषियों को सजा दिलाने के लिए लंबित मामलों की समीक्षा होगी
भोपाल। मध्यप्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, अवैध खनन, प्रशासनिक सुस्ती और जनसुनवाई में बढ़ती गंभीर घटनाओं को लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आए। बुधवार को आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अधिकारियों को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि अब गुजरे जमाने के ढर्रे पर काम नहीं चलेगा। जनता की समस्याओं के प्रति लापरवाही और संवेदनहीनता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में जनसुनवाई के दौरान लोग जहर खा रहे हैं, आत्मदाह कर रहे हैं और प्रशासन के सामने अपनी पीड़ा जाहिर करने के लिए खतरनाक कदम उठा रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे सरकार की छवि पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से सवाल करते हुए कहा कि आखिर ऐसी नौबत क्यों आ रही है कि आम नागरिक को न्याय पाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।
उन्होंने अवैध खनन और खनन माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस पर भी नाराजगी जताई। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई व्यक्ति प्रशासनिक अमले या पुलिस पर ट्रैक्टर और बाइक चढ़ाने की हिम्मत कर ले। यह सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को चुनौती है। उन्होंने निर्देश दिए कि अवैध परिवहन करते हुए पकड़े गए वाहनों को केवल जब्त न किया जाए, बल्कि तत्काल राजसात कर नीलाम किया जाए। बिना नंबर प्लेट या टूटी नंबर प्लेट वाले वाहनों पर भी कठोर कार्रवाई करने के आदेश दिए गए।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने पुराने खनन माफियाओं की फाइलें फिर से खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह पता लगाया जाए कि किन मामलों में अब तक दोषियों को सजा मिली है और किन मामलों में कार्रवाई लंबित है। जिन मामलों में अब तक सजा नहीं हुई है, वहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोषियों को सजा दिलाने के प्रयास किए जाएं।
बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने भी पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को ड्रग्स और नारकोटिक्स से मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। स्कूल और कॉलेजों के आसपास फैल रहे नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए। डीजीपी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास ‘ड्रग फ्री जोन’ बनाए जाएं और युवाओं को नशे से बचाने के लिए अभियान चलाया जाए।
इसके अलावा पोक्सो एक्ट और विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। हुड़दंगियों, शांति भंग करने वाले तत्वों और अपराधियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने को कहा गया।
कॉन्फ्रेंस के दौरान कई जिलों के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई गई। राजस्व मामलों की समीक्षा करते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को जमीनों के नामांतरण और बंटवारे के मामलों में बढ़ती पेंडेंसी को लेकर फटकार लगाई गई। वहीं सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल को प्रदूषण, पेयजल संकट और कानून व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं देने पर कड़ी चेतावनी दी गई।
मुख्य सचिव ने दो टूक कहा कि अब हर जिले को अपनी अर्थव्यवस्था मजबूत करनी होगी। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे विकास संभव नहीं है। जिलों को कृषि, उद्यानिकी और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर रोजगार और निवेश के नए अवसर तैयार करने होंगे। उन्होंने याद दिलाया कि प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि का योगदान लगातार बढ़ रहा है, लेकिन औद्योगिक विकास के बिना संतुलित प्रगति संभव नहीं होगी।
उन्होंने लोक सेवा गारंटी, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई को सरकार की छवि से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि यदि इनमें लापरवाही मिली तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय होगी। जनता की शिकायतों का समय पर और संवेदनशीलता के साथ निराकरण करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
शहरी और ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताई गई। मुख्य सचिव ने कहा कि पात्र हितग्राहियों को समय पर आवास उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में पेयजल संकट और जल संरक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बचे हुए कार्य 21 जून से पहले हर हाल में पूरे किए जाएं। लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
मुख्य सचिव ने सरकारी हैंडपंपों पर कब्जों का मामला भी गंभीरता से उठाया। जानकारी दी गई कि प्रदेश के कई जिलों में 104 सरकारी हैंडपंपों पर निजी लोगों और रसूखदारों ने कब्जा कर रखा है। इस पर तत्काल कब्जा हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
नरवाई जलाने के मामलों में लापरवाही बरतने पर जबलपुर और नरसिंहपुर कलेक्टरों को फटकार लगाई गई। वहीं खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों को खाद वितरण की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या विवाद की स्थिति न बने।
बरगी क्रूज हादसे का उल्लेख करते हुए मुख्य सचिव ने सभी जिलों में जलाशयों और पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए।
बैठक के अंत में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार अब परिणाम चाहती है, बहाने नहीं। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान में लापरवाही करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस