कोचिंग सेंटर में भीषण आग: 15 की मौत, बाथरूम में छिपे छात्रों की दम घुटने से गई जान, शॉर्ट सर्किट की आशंका
लखनऊ में अलीगंज स्थित एक इमारत में आग लगने से 15 बच्चों की मौत हुई है और पांच बच्चे घायल हुए हैं. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि आग कोचिंग सेंटर में लगी है.
लखनऊ में भीषण आग लगने की घटना सामने आई है, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई.
लखनऊ, यूपी: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे शहर को दहला दिया। एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिसमें अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में 3 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं। अधिकतर मृतक छात्र और युवा कर्मचारी बताए जा रहे हैं, जो इमारत के दूसरे फ्लोर पर स्थित कोचिंग और कामकाजी स्टूडियो में मौजूद थे।
घटना दोपहर करीब 2:15 बजे की बताई जा रही है, जब इमारत के बेसमेंट में अचानक धुआं उठना शुरू हुआ और कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग में फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने और बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
इमारत के भीतर मची अफरा-तफरी
जिस इमारत में हादसा हुआ, उसमें अलग-अलग फ्लोर पर विभिन्न गतिविधियाँ चल रही थीं। बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप और क्लीनिक संचालित हो रहे थे, जबकि दूसरे फ्लोर पर “लर्निंग स्पेस” नाम की लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर था। इसी फ्लोर पर एक स्टूडियो भी संचालित होता था, जहाँ 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम किया जाता था।
आग लगते ही सबसे ज्यादा नुकसान दूसरे फ्लोर पर हुआ, जहां बड़ी संख्या में छात्र और कर्मचारी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि धुआं तेजी से फैलने के कारण कई लोग बाहर निकलने की कोशिश में सफल नहीं हो पाए।
बचने के लिए बाथरूम में छिपे छात्र
हादसे से जुड़े चौंकाने वाले विवरण सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, आग और धुएं से घबराकर कई छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था, यह सोचकर कि वहां वे सुरक्षित रहेंगे। लेकिन धुआं वहां भी पहुंच गया और दम घुटने से कई लोगों की जान चली गई।
कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए खिड़कियों और सीढ़ियों का सहारा लिया। एक छात्र जयंत ने जान बचाने के लिए पहले फ्लोर से छलांग लगा दी। वहीं, पांच अन्य लोग तारों के सहारे नीचे उतरने में सफल रहे, हालांकि कई घायल हो गए।
आग का कारण: AC में शॉर्ट सर्किट की आशंका
फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती जांच में बेसमेंट में लगे एयर कंडीशनर (AC) में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि वहीं से आग की शुरुआत हुई, जो वेंटिलेशन सिस्टम के माध्यम से तेजी से ऊपर के फ्लोर तक फैल गई।
फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इमारत में आग बुझाने के पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे। न तो स्मोक अलार्म ठीक से काम कर रहा था और न ही कोई प्रभावी फायर एग्जिट व्यवस्था थी, जिससे लोगों को बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता मिल सके।
राहत और बचाव कार्य में भारी मशक्कत
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की करीब 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। इसके अलावा SDRF और NDRF की टीमें भी राहत कार्य में जुटीं। आग पर काबू पाने में कई घंटे लग गए।
बचाव कार्य के दौरान फायरकर्मियों ने इमारत की पीछे की दीवार को तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। इसी रास्ते से कई शवों को बाहर निकाला गया। मौके पर एंबुलेंस की कमी के कारण राहत कार्य में और भी दिक्कतें आईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह थी कि कई एंबुलेंस बार-बार आने के बावजूद पर्याप्त नहीं पड़ रही थीं।
प्रशासन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद प्रदेश प्रशासन और सरकार ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौके पर पहुंचे और हालात देखकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यह दृश्य अत्यंत दर्दनाक है और उन्होंने अपनी आंखों के सामने शवों को बाहर निकलते देखा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी अधिकारी या लापरवाह व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का भी निरीक्षण किया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भी दिल्ली से लखनऊ पहुंचने की सूचना है, ताकि स्थिति का जायजा लिया जा सके और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की जा सके।
इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस हादसे ने इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इमारत में न तो पर्याप्त फायर सेफ्टी व्यवस्था थी और न ही इमरजेंसी एग्जिट मौजूद था। यही वजह रही कि आग लगने के बाद लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।
बताया जा रहा है कि इमारत का नक्शा अलग-अलग नामों से पास हुआ था और इसमें कई व्यावसायिक गतिविधियां चल रही थीं। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि क्या इमारत निर्माण और संचालन में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
तकनीकी लॉक सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किल
हादसे में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। बताया गया है कि इमारत के मुख्य गेट पर थंब इंप्रेशन आधारित ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम लगा हुआ था। आग लगने के बाद यह सिस्टम खुलने में देरी कर गया, जिससे अंदर मौजूद लोग समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। इस तकनीकी खामी ने हादसे की गंभीरता को और बढ़ा दिया।
जांच जारी, जिम्मेदारी तय करने की तैयारी
प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। फायर विभाग, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त टीम यह पता लगाने में जुटी है कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कैसे हुआ और किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम लागू किए जाएंगे।
एक दर्दनाक सबक
लखनऊ का यह हादसा केवल एक इमारत में लगी आग नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक का प्रतीक बन गया है। जहां एक ओर कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, वहीं यह घटना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर गई है।
यह हादसा इस बात की याद दिलाता है कि शहरी इलाकों में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों के साथ फायर सेफ्टी और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस