हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, IAS अधिकारियों को दो माह की सजा -नियमितीकरण के मामले में रिटायर्ड IAS मो. सुलेमान, तरुण राठी भी अदालत की अवमानना के दोषी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के एक रिटायर्ड, एक तत्कालीन और दो मौजूदा अफसरों को दो-दो महीने के कारावास की सजा सुनाई है। जस्टिस प्रणय वर्मा की सिंगल बेंच ने यह आदेश स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण संबंधी मामले में पूर्व में पारित आदेश का पालन न करने पर दिया है। हालांकि, सजा के आदेश को तीन सप्ताह के लिए स्थगित रखा जाएगा।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, IAS अधिकारियों को दो माह की सजा -नियमितीकरण के मामले में रिटायर्ड IAS मो. सुलेमान, तरुण राठी भी अदालत की अवमानना के दोषी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मंदसौर के स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में अदालती आदेश की 22 बार अनदेखी करने पर सख्त कदम उठाया है।

इंदौर। कोर्ट के आदेश की अनदेखी अधिकारियों पर भारी पड़ी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने पूर्व अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मोहम्मद सुलेमान, पूर्व में आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं रहे और वर्तमान में आयुक्त आदिम जाति कल्याण तरुण राठी, उज्जैन स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. डीके तिवारी और मंदसौर सीएमएचओ डॉ. गोविंद चौहान को कोर्ट की अवमानना का दोषी पाते हुए दो-दो माह कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सजा को तीन सप्ताह के लिए स्थगित रखा है ताकि आदेश का पालन किया जा सके।

सजा पाने वालों में रिटायर्ड आईएएस और तत्कालीन हेल्थ एसीएस मो. सुलेमान, तत्कालीन हेल्थ कमिश्नर तरुण राठी, उज्जैन के तत्कालीन ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. डीके तिवारी और मंदसौर सीएमएचओ गोविंद चौहान शामिल हैं।

मामला मंदसौर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। जिले के एक वार्ड बॉय और 8 स्वीपरों ने मिलकर नियमितीकरण की मांग करते हुए अदालत में याचिका पेश की थी। ये कर्मचारी 1994, 1995 और 1996 से सेवा में हैं और 2003-04 से ही नियमितीकरण की मांग करते आ रहे थे।

सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रकरण पर विचार कर निर्णय लेने के आदेश दिए थे। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी याचिकाकर्ताओं को 2016 से नियमित किया था।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने साल 2018 में स्वास्थ्य विभाग के आदेश को यह कहते हुए चुनौती दी कि उन्हें पहली नियुक्ति के तारीख से नियमित किया जाए। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 को आदेश दिया कि पहली नियुक्ति की तारीख से नौकरी के 10 साल पूरे होने के बाद से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए। साथ ही तीन माह के भीतर 2016 तक का एरियर और नियमितीकरण के सभी लाभ दिए जाएं।

9 कर्मचारियों ने अलग-अलग अवमानना याचिकाएं लगाईं

दिसंबर 2023 में आदेश के पालन के लिए तीन माह की अवधि दी गई थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बाद अप्रैल 2024 में सभी नौ याचिकाकर्ताओं ने अलग-अलग अवमानना याचिकाएं दायर कीं।

अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कहा गया कि वे आदेश का पालन कर रहे हैं। लेकिन अदालत की बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही बरती गई। 6 फरवरी 2026 को हाई कोर्ट ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि आदेश का जानबूझकर पालन नहीं किया जा रहा है।

इसके बाद 12 मार्च को स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त ने एक आदेश जारी किया, जिसमें नौ में से केवल दो याचिकाकर्ताओं को एरियर देने की स्वीकृति दी गई। लेकिन उन्हें भी वास्तविक आर्थिक लाभ नहीं दिया गया।

हाईकोर्ट ने 16 मार्च को सुनाया दो-दो महीने का कारावास

हाईकोर्ट में 16 मार्च को जज प्रणय वर्मा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि याचिका की 22वीं बार लिस्टिंग की गई है। अभी तक आदेश का पालन नहीं किया गया है। ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो-दो माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। अदालत का विस्तृत आदेश मंगलवार को सामने आया।