उम्मीद की मशाल: समाजसेवी सतीश जादोनी ने स्कूली बच्चियों के लिए बनवाया शौचालय
भेरूंदा तहसील के बाबरी निवासी समाजसेवी सतीश जादोनी ने अपनी कमाई का 40% समाज सेवा में लगाते हुए शासकीय हाई स्कूल, बाबरी में 2.50 लाख रुपए की लागत से बालिका शौचालय का निर्माण कराया। जरूरतमंदों की निरंतर मदद करने वाले जादोनी अपने गांव में सेवाभाव के लिए जाने जाते हैं। स्कूल में शौचालय निर्माण से छात्राओं को बड़ी राहत मिली है और समाज में एक सकारात्मक मिसाल स्थापित हुई है।
शिवराज राजपूत
बालिकाओं की सुविधा के लिए समाजसेवी सतीश जादोनी की अनोखी पहल, 2.50 लाख की लागत से शासकीय स्कूल में शौचालय निर्माण
अपने घर में आज का राशन देखकर यह सोच लेना कि "क्यों न उन घरों के चूल्हे जलाने में मदद करूं, जहाँ निवाले का संकट है"—ऐसी सोच हर किसी में नहीं होती। लेकिन भेरूंदा तहसील के बाबरी निवासी सतीश जादोनी और उनका परिवार इसी सोच को जीवन का हिस्सा बना चुके हैं।
सतीश जादोनी ने हाल ही में बाबरी स्थित शासकीय हाई स्कूल में 2 लाख 50 हजार रुपए की लागत से बालिका शौचालय का निर्माण कराया। स्कूल में लंबे समय से बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा पर्याप्त नहीं थी, जिससे छात्राओं को समस्याओं का सामना करना पड़ता था। जादोनी की इस पहल ने न सिर्फ स्कूल प्रशासन की चिंता दूर की बल्कि बच्चियों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के प्रति भी एक सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया।
कमाई का 40% समाज सेवा में
सतीश जादोनी अपनी कमाई का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा समाज सेवा में लगाते हैं। अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में वे समाजसेवी के नाम से पहचाने जाते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में जरूरतमंदों की मदद करना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग देना, बीमार और वृद्ध लोगों के लिए सहायता जुटाना—ये सब उनके जीवन की दिनचर्या का हिस्सा है।
गांव के विकास में अग्रणी कदम
सरकारी स्कूल में अपने खर्च पर शौचालय निर्माण कराना हो या फिर अत्यंत गरीब परिवारों को संकट की घड़ी में मदद पहुंचाना—हर काम को सतीश जादोनी बिना किसी दिखावे के करते हैं। उनका कहना है कि “जब किसी की मदद से किसी के चेहरे पर मुस्कान दिखती है, वही मेरे लिए सबसे बड़ा संतोष है।”
समाज में मिसाल
आज जब समाज में संवेदनशीलता और सहयोग भावना की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है, ऐसे समय में सतीश जादोनी जैसे लोग उम्मीद की मशाल जलाए हुए हैं। उनका यह योगदान आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह सिखाता है कि बदलाव बड़े कदमों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सत्कार्यों से शुरू होता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस