शिक्षकों को बड़ी राहत: मनचाहे तबादलों में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, अन्य दस्तावेजों से भी होगा सत्यापन

अपनी मर्जी से ट्रांसफर के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए, मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की अनिवार्य शर्त को हटा दिया है.

शिक्षकों को बड़ी राहत: मनचाहे तबादलों में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, अन्य दस्तावेजों से भी होगा सत्यापन

स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षक ट्रांसफर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी है और वैकल्पिक दस्तावेज मान्य होंगे।

भोपाल। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया में शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र (मैरिज सर्टिफिकेट) जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। विभाग के इस फैसले से उन हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं को राहत मिली है, जो केवल मैरिज सर्टिफिकेट नहीं होने के कारण अपने स्थानांतरण आवेदन पूरे नहीं कर पा रहे थे। अब पति-पत्नी के आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने वाले शिक्षक समग्र आईडी, सत्यापित सेवा पुस्तिका की प्रति अथवा अन्य मान्य दस्तावेजों के आधार पर भी आवेदन कर सकेंगे।

लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि पति-पत्नी संबंधों के सत्यापन के लिए केवल विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र ही एकमात्र दस्तावेज नहीं माना जाएगा। ऐसे अन्य दस्तावेज भी स्वीकार किए जाएंगे जिनसे वैवाहिक संबंध की पुष्टि हो सके। विभाग के इस निर्णय को शिक्षकों के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दरअसल, प्रदेशभर से बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षकों की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिनका विवाह कई वर्ष पहले हुआ था लेकिन उन्होंने विवाह पंजीयन नहीं कराया था। ऐसे शिक्षक तबादला पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। कई मामलों में पात्र शिक्षक केवल तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर हो रहे थे। इस समस्या को लेकर शिक्षक संगठन लगातार विभाग का ध्यान आकर्षित कर रहे थे।

गौरतलब है कि 6 जून को जारी की गई तबादला नीति में विवाह प्रमाण पत्र को अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल नहीं किया गया था। इसके बावजूद ऑनलाइन आवेदन पोर्टल पर मैरिज सर्टिफिकेट अपलोड करना आवश्यक दिखाया जा रहा था। इससे शिक्षकों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। कई शिक्षक लगातार विभागीय अधिकारियों और जिला शिक्षा कार्यालयों से संपर्क कर इस विसंगति को दूर करने की मांग कर रहे थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी।

शिक्षा विभाग का कहना है कि पात्र शिक्षकों को केवल तकनीकी कारणों से तबादला प्रक्रिया से वंचित नहीं रखा जाएगा। इसी सोच के तहत मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त की गई है ताकि अधिक से अधिक पात्र शिक्षक स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल हो सकें। विभाग के इस निर्णय का शिक्षक वर्ग और विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है।

हालांकि मैरिज सर्टिफिकेट से जुड़ी समस्या का समाधान होने के बावजूद तबादला प्रक्रिया में कई अन्य परेशानियां अब भी बनी हुई हैं। शिक्षक संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन पोर्टल में लगातार तकनीकी खामियां सामने आ रही हैं। कई शिक्षकों को आवेदन सबमिट करने में कठिनाई हो रही है, जबकि अनेक मामलों में आवश्यक दस्तावेज अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। इससे आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

तबादले के लिए निर्धारित अंतिम तिथि नजदीक आने के कारण शिक्षकों की चिंता और बढ़ गई है। बड़ी संख्या में आवेदक लगातार पोर्टल पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उनका आवेदन पूरा नहीं हो पा रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो अनेक पात्र शिक्षक तबादले के अवसर से वंचित रह जाएंगे।

तबादला प्रक्रिया में 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी विवाद का विषय बनी हुई है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि प्रदेश के कई स्कूलों में नेटवर्क और तकनीकी समस्याओं के कारण नियमित रूप से ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाई है। ऐसे में इस शर्त के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक आवेदन करने के योग्य नहीं रह गए हैं। संगठनों का मानना है कि इस नियम में व्यावहारिक संशोधन किया जाना चाहिए।

इसके अलावा जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों पर स्थानांतरण प्रतिबंध तथा न्यूनतम तीन वर्ष की सेवा अवधि जैसी शर्तों को लेकर भी शिक्षक संगठन नाराज हैं। उनका दावा है कि इन नियमों के कारण हजारों शिक्षक आवेदन करने से वंचित हो गए हैं। संगठनों का कहना है कि कई शिक्षक पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से स्थानांतरण चाहते हैं, लेकिन वर्तमान नियमों के कारण उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।

दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित शिक्षकों को भी पोर्टल संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार कई दिव्यांग शिक्षकों के पास स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं, लेकिन पोर्टल केवल एक वर्ष के भीतर जारी किए गए प्रमाण पत्र को ही स्वीकार कर रहा है। इससे उनके आवेदन लंबित हो रहे हैं और प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। प्रभावित शिक्षकों का कहना है कि स्थायी दिव्यांगता प्रमाण पत्र की वैधता पर प्रश्न नहीं उठाया जाना चाहिए और पोर्टल में आवश्यक सुधार किया जाना चाहिए।

तबादला प्रक्रिया में आ रही इन समस्याओं को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात भी की है। राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव सहित कई प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष शिक्षकों की समस्याएं रखीं और नियमों में व्यावहारिक संशोधन की मांग की। वहीं शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने पोर्टल की तकनीकी खामियों को तत्काल दूर करने तथा आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यदि आवेदन की समय सीमा में विस्तार नहीं किया गया तो अनेक पात्र शिक्षक केवल तकनीकी कारणों से आवेदन नहीं कर पाएंगे। ऐसे में विभाग को शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लेना चाहिए। फिलहाल मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त होने से शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है और उम्मीद की जा रही है कि विभाग अन्य लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में भी जल्द कदम उठाएगा।