सीएम मोहन यादव पर लगे जमीन विवाद के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले- OBC नेतृत्व कांग्रेस को नहीं पचता

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव पर लगे आरोपों पर प्रदेश अध्यक्ष ने सफाई दी है। हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि सीएम बनने के बाद उन्होंने कोई जमीन नहीं खरीदी है।

सीएम मोहन यादव पर लगे जमीन विवाद के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बोले- OBC नेतृत्व कांग्रेस को नहीं पचता

मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगे जमीन से जुड़ें आरोपों को बीजेपी ने सिरे से खारिज कर दिया है. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस तथ्यहीन आरोप लगाकर भ्रम फैला रही है.

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जुड़े जमीन विवाद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री और उनके परिवार की संपत्तियों में कथित वृद्धि को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी खुलकर उनके बचाव में उतर आई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों को निराधार, भ्रामक और राजनीतिक दुष्प्रचार करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीनों में मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है तथा कांग्रेस जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

हेमंत खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास कार्यों, निवेश, किसानों के हित और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर चर्चा होने के बजाय कांग्रेस जानबूझकर व्यक्तिगत आरोपों के जरिए राजनीतिक माहौल बिगाड़ना चाहती है। उन्होंने कहा कि जनता सच्चाई जानती है और ऐसे दुष्प्रचार का जवाब समय आने पर देगी।

क्या है पूरा विवाद?

पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस लगातार मुख्यमंत्री मोहन यादव, उनके परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों की जमीनों को लेकर सवाल उठा रही है। कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार की संपत्तियों और जमीनों में वृद्धि हुई है। विपक्ष ने कुछ कंपनियों और रिश्तेदारों के नामों का भी उल्लेख करते हुए जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

इन आरोपों के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और बीजेपी ने दस्तावेजों के आधार पर जवाब देने का निर्णय लिया। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

2023 और 2026 में जमीन का आंकड़ा समान : खंडेलवाल

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान नामांकन पत्र में जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया था, वही स्थिति आज भी बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज 17 एकड़ भूमि में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

इसी प्रकार उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज 12.29 एकड़ भूमि भी पहले जितनी ही है। खंडेलवाल ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री या उनके परिवार ने कोई नई जमीन खरीदी होती तो उसका उल्लेख आधिकारिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों में दिखाई देता, लेकिन ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि मुख्यमंत्री की घोषित संपत्तियों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।

सिद्धि विनायक कंपनी को लेकर भी दी सफाई

विवाद के केंद्र में आई सिद्धि विनायक कंपनी को लेकर भी बीजेपी ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। पार्टी के अनुसार, वर्ष 2023 में कंपनी के पास लगभग 68 एकड़ भूमि थी, जो वर्तमान में घटकर करीब 65 एकड़ रह गई है।

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मोहन यादव वर्ष 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से इस्तीफा दे चुके थे। इसलिए कंपनी के वर्तमान संचालन, भूमि लेन-देन या अन्य निर्णयों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पुरानी जानकारियों को नए संदर्भ में पेश कर मुख्यमंत्री को विवादों में घसीटने की कोशिश कर रही है। बीजेपी का कहना है कि कंपनी से जुड़े तथ्यों को जानबूझकर अधूरा प्रस्तुत किया गया है।

बेटे और बहू की जमीन को लेकर भी दिया जवाब

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यादव और बहू शालिनी यादव की जमीनों को लेकर भी सवाल उठाए थे। इस पर बीजेपी ने कहा कि वैभव यादव के नाम जो लगभग 16 एकड़ भूमि पहले से दर्ज थी, उसमें मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है।

वहीं शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई करीब 10 एकड़ कृषि भूमि को लेकर पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह जमीन मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर स्थित है और इसकी खरीद पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।

बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए तथ्यों को छिपाकर आरोप लगा रहा है और जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।

रिश्तेदारों के नाम घसीटने पर जताई आपत्ति

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस जिन रिश्तेदारों का नाम इस मामले में जोड़ रही है, उनका मुख्यमंत्री और उनके परिवार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और वह अपने फैसले स्वयं लेने के लिए स्वतंत्र है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जिन लोगों के नाम सार्वजनिक रूप से लिए गए हैं, वे अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी कर सकते हैं।

कांग्रेस पर लगाया OBC नेतृत्व के खिलाफ राजनीति का आरोप

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस पर बड़ा राजनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि जब-जब मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग (OBC) से कोई नेता मुख्यमंत्री बना है, तब-तब कांग्रेस ने उसके खिलाफ अभियान चलाया है।

उन्होंने कहा कि पहले उमा भारती, फिर शिवराज सिंह चौहान और अब मोहन यादव को निशाना बनाया जा रहा है। खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस को OBC नेतृत्व स्वीकार नहीं होता और यही कारण है कि वह लगातार ऐसे नेताओं को विवादों में घेरने का प्रयास करती है।

विकास कार्यों से ध्यान भटकाने की कोशिश

बीजेपी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश में किसानों के हित, उद्योगों में निवेश, रोजगार सृजन और आधारभूत संरचना के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। ऐसे समय में कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों से ध्यान हटाने के लिए व्यक्तिगत आरोपों का सहारा ले रही है।

पार्टी का दावा है कि जनता विकास कार्यों को देख रही है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित नहीं होगी।

आगे क्या?

मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़ा यह भूमि विवाद अब प्रदेश की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है, जबकि बीजेपी दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को खारिज कर रही है।

आने वाले दिनों में यदि विपक्ष नए दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक करता है, तो विवाद और गहरा सकता है। वहीं बीजेपी का कहना है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप तथ्यहीन हैं और केवल राजनीतिक लाभ के लिए फैलाए जा रहे हैं। फिलहाल इस मामले पर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और सभी की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।