ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिए निर्देश, 100 वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों के चिन्हित कर संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश

विश्व पर्यावरण दिवस-2026 के अवसर पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने वर्चुअल बैठक में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु दिए निर्देश, 100 वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों के चिन्हित कर संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश

विश्व पर्यावरण दिवस-2026 पर जिलाधिकारी ने की समीक्षा बैठक

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी अनुपालन के निर्देश

ग्राम पंचायतों में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा

प्लास्टिक मुक्त ग्राम अभियान और जल संरक्षण पर विशेष जोर

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील

विश्व पर्यावरण दिवस-2026 मनाए जाने के सम्बंध में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक आयोजित की गई, जिसमें जनपद के समस्त खण्ड विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत), निवर्तमान प्रधानों, प्रशासकों, ग्राम पंचायत सचिवों तथा जनपद एवं विकासखण्ड स्तरीय अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। मा० सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी अनुपालन पर विस्तृत चर्चा करते हुए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता एवं सतत विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए तथा कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, स्रोत पर कूड़ा पृथक्करण, प्लास्टिक अपशिष्ट नियंत्रण एवं स्वच्छता गतिविधियों को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं तथा पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है।जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में ग्राम पंचायतों में व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, जल संरक्षण गतिविधियां, प्लास्टिक मुक्त ग्राम अभियान तथा सामुदायिक सहभागिता आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनजागरूकता से जोड़ते हुए प्रत्येक ग्राम पंचायत में लोगों को स्वच्छता एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जाए। पर्यावरणीय स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण, हरित आवरण विस्तार, प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अक्षरशः पालन के संबंध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संवेदनशील बनाया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में ‘‘स्वच्छ गांव-सुरक्षित जलवायु’’ अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से सफल बनाते हुए स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और हरित विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जाएगा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को निर्देश दिए कि जनपद में 100 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु वाले प्राचीन एवं विरासत स्वरूप वृक्षों का विशेष सर्वेक्षण कर उनका चिन्हांकन किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे शतायु वृक्ष हमारी सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक विरासत एवं पर्यावरणीय संतुलन के महत्वपूर्ण आधार हैं। इन वृक्षों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन प्राकृतिक धरोहरों से प्रेरणा प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि शतायु वृक्षों का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जैव विविधता को सुरक्षित रखने तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे वृक्षों के आसपास स्वच्छता, सुरक्षा एवं हरित वातावरण बनाए रखने के लिए स्थानीय समुदायों एवं ग्राम पंचायतों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।जिलाधिकारी ने कहा कि यह पहल विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनपद से पर्यावरण संरक्षण का एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायी संदेश देगी तथा जालौन को हरित एवं सतत विकास के मॉडल जनपद के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान करेगी।जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने तथा अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्धारित गतिविधियों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए उनकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य धरातल पर प्रभावी रूप से प्राप्त किए जा सकें।