गोविंद सिंह राजपूत : उपार्जन व्यवस्था में बड़ा सुधार, तौल पर्ची का समय बढ़ाकर रात 10 बजे तक, 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूँ खरीदी
खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में अब तक 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी हो चुकी है। किसानों की सुविधा के लिए तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक और देयक जारी करने का समय रात 12 बजे तक कर दिया गया है।
गोविंद सिंह राजपूत ने बढ़ाया उपार्जन समय, किसानों को बड़ी राहत : 7.48 लाख किसानों से 39.02 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी
भोपाल। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने गेहूँ उपार्जन व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए किसानों को राहत प्रदान की है। उन्होंने जानकारी दी कि राज्य में अब तक 7 लाख 48 हजार किसानों से 39 लाख 2 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। किसानों की सुविधा और उपार्जन प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने के लिए तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है, जबकि देयक (बिल) जारी करने का समय रात 12 बजे तक निर्धारित किया गया है।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इस वर्ष गेहूँ उपार्जन व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ किसानों की समस्याओं को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अभी तक 14 लाख 75 हजार किसानों द्वारा उपार्जन के लिए स्लॉट बुक कराए जा चुके हैं, जो कि इस बात का संकेत है कि किसान बड़ी संख्या में सरकारी समर्थन मूल्य योजना से जुड़ रहे हैं।
उपार्जन अवधि बढ़ाई गई, केंद्रों पर बढ़ाई गई सुविधाएँ
किसानों की सुविधा को देखते हुए गेहूँ उपार्जन की अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक कर दी गई है। इससे उन किसानों को भी लाभ मिलेगा जो किसी कारणवश पहले अपनी उपज नहीं बेच पाए थे।
राज्य सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया है। प्रत्येक केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है, ताकि किसानों को लंबी कतारों और प्रतीक्षा से राहत मिल सके। इसके साथ ही जिलों को यह अधिकार दिया गया है कि आवश्यकता अनुसार तौल कांटों की संख्या और बढ़ाई जा सके।
सरकार ने उपार्जन प्रणाली को सुचारू रखने के लिए तकनीकी सुधार भी किए हैं। एनआईसी सर्वर की क्षमता और संख्या में वृद्धि की गई है, जिससे स्लॉट बुकिंग और उपार्जन प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटे स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की मॉनीटरिंग की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
किसानों को 6490 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि अब तक किसानों को 6490.56 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह भुगतान सीधे किसानों के खातों में किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर और बिना किसी परेशानी के मिल सके। भुगतान प्रक्रिया को तेज और डिजिटल बनाया गया है, जिससे किसानों को आर्थिक राहत मिल रही है।
उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं का विस्तार
किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों पर कई आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इनमें पीने के पानी की व्यवस्था, बैठने के लिए छायादार स्थान, स्वच्छता सुविधाएँ और अन्य जन सुविधाएँ शामिल हैं। इसके साथ ही केंद्रों पर बारदाने, तौल कांटे, हम्माल, तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, पंखे, छन्ना आदि की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और पूरी प्रक्रिया सहज एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो।
भंडारण और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
सरकार ने उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए हैं। उपार्जित गेहूँ को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण क्षमता को बढ़ाया गया है, ताकि किसी प्रकार की क्षति या नुकसान की संभावना न रहे।
इसके अलावा उपार्जन केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं की फोटो ग्राफिक रिपोर्ट भारत सरकार के PCSAP पोर्टल पर अपलोड की जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
गेहूँ उपार्जन में समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है, जिससे किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।
किसानों के हित में सरकार की प्राथमिकता
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उपार्जन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले और उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्रणाली और तकनीकी सुधारों के माध्यम से पूरी उपार्जन व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो सके और किसानों का विश्वास प्रणाली पर बना रहे।
निष्कर्ष
राज्य सरकार द्वारा गेहूँ उपार्जन व्यवस्था में किए गए ये बदलाव किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। समय बढ़ाने से लेकर भुगतान और तकनीकी सुधारों तक, हर स्तर पर किसानों की सुविधा का ध्यान रखा गया है। 7 लाख से अधिक किसानों से 39 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी इस बात का संकेत है कि उपार्जन व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर रही है और किसानों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस