चुनाव आयोग सख्त: पश्चिम बंगाल में 285 बूथों पर पुनर्मतदान, फाल्टा सीट पर टकराव तेज, मतगणना से पहले सियासी पारा चरम पर
चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट के 285 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया है। 29 अप्रैल को मतदान के दौरान हुई हिंसा और ईवीएम में गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह फैसला लिया गया। अब फाल्टा में 21 मई को दोबारा मतदान होगा और 24 मई को नतीजे आएंगे। इस सीट को लेकर तृणमूल कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा है।
294 में से 293 सीटों के आएंगे नतीजे, फाल्टा पर रहेगा इंतजार
हिंसा और गड़बड़ी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी माहौल बेहद गर्म हो गया है। राज्य की 294 सीटों में से अधिकांश पर मतगणना सोमवार को होनी है, लेकिन इस बार पूरी तस्वीर एक साथ सामने नहीं आएगी। दक्षिण 24 परगना जिले की फाल्टा विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान के आदेश के कारण यहां का परिणाम बाद में घोषित किया जाएगा। चुनाव आयोग ने इस सीट के 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की सियासत को भी एक नए मोड़ पर ला दिया है।
294 में से 293 सीटों के आएंगे नतीजे
राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान के चलते इस बार 293 सीटों के ही नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार फाल्टा में 21 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान होगा, जबकि इसकी मतगणना 24 मई 2026 को की जाएगी। यह निर्णय राज्य में हालिया हिंसा और मतदान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों के बाद लिया गया है।
हिंसा और गड़बड़ी के आरोपों के बाद बड़ा फैसला
फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल को मतदान के दौरान भारी हिंसा और तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली थी। कई स्थानों पर राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, जिससे मतदान प्रक्रिया बाधित हुई। भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए।
चुनाव आयोग ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पूरे क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया। आयोग का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फाल्टा सीट पर बहुकोणीय मुकाबला
दक्षिण 24 परगना की फाल्टा विधानसभा सीट इस चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में से एक बन गई है। यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय है।
सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट से जहांगीर खान को उम्मीदवार बनाया है, जिन पर पार्टी का गढ़ बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने देबांग्शु पांडा को मैदान में उतारा है, जो पार्टी के लिए मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।
इसके अलावा कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के शंभू नाथ कुर्मी भी मैदान में हैं। चार प्रमुख दलों की मौजूदगी ने इस सीट को हाई-प्रोफाइल बना दिया है और यहां हर वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
हिंसा के बीच मतदान प्रक्रिया पर सवाल
फाल्टा में मतदान के दिन हालात कई बार नियंत्रण से बाहर होते दिखे। कई बूथों पर मतदाताओं को डराने-धमकाने और मतदान में बाधा डालने के आरोप सामने आए। विभिन्न स्थानों पर झड़पों की घटनाएं भी दर्ज की गईं, जिससे प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
दोनों प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान कराने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईवीएम विवाद ने बढ़ाई सियासी गर्मी
इस चुनाव में सबसे बड़ा विवाद ईवीएम से जुड़ा सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ बूथों पर ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई।
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि फाल्टा के बूथ नंबर 144 और 189 में ईवीएम पर भाजपा के चुनाव चिन्ह को सफेद टेप से ढक दिया गया था। उनका कहना है कि यह कदम मतदाताओं को भ्रमित करने और मतदान प्रभावित करने के उद्देश्य से किया गया।
इस मामले ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है।
अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला
फाल्टा विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है और जनता के जनादेश को प्रभावित करने के लिए झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जनता ने वोट देकर अपना निर्णय दे दिया है और अब परिणाम को स्वीकार करना सभी दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा हर चुनाव में हार की आशंका से पहले ही विवाद खड़ा करने की रणनीति अपनाती है।
चुनाव आयोग की सख्ती
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि फाल्टा में पुनर्मतदान का निर्णय पूरी तरह से निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। आयोग ने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा, दबाव या तकनीकी गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा।
285 बूथों पर दोबारा मतदान कराने का निर्णय इस बात का संकेत है कि आयोग किसी भी कीमत पर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता नहीं करना चाहता।
राजनीतिक समीकरण और संभावित असर
फाल्टा सीट पर होने वाला पुनर्मतदान पूरे राज्य के राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकता है। हालांकि 293 सीटों के नतीजे पहले घोषित हो जाएंगे, लेकिन फाल्टा का परिणाम सरकार गठन के बाद भी राजनीतिक संदेश देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर वोटिंग पैटर्न राज्य में चल रही राजनीतिक लहर का संकेत देगा। खासकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला इस सीट को और महत्वपूर्ण बना देता है।
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव पहले ही देश की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में से एक बन चुका है। फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान ने इसे और अधिक जटिल और रोचक बना दिया है। हिंसा, ईवीएम विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी निगाहें 21 मई के मतदान और 24 मई की मतगणना पर टिकी हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जनता एक बार फिर तृणमूल कांग्रेस पर भरोसा जताती है या भाजपा इस बार राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने में सफल होती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस