दीवाली 2025 की बिक्री में 30% गिरावट: बारिश, बिहार चुनाव और उपभोक्ता सुस्ती से बाजार पर असर; सूरत में 15–20 दिन देरी से लौटेंगे श्रमिक : चम्पालाल बोथरा
बिक्री में गिरावट वाले सेगमेंट: सूट, कुर्ती, ड्रेसेज़, गारमेंट फैब्रिक्स, टी-शर्ट, जींस, शर्ट, साड़ी
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स (Flipkart, Meesho, Myntra, Ajio) पर भारी छूट से ऑफलाइन बिक्री 20% घटी
Surat: कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी की ओर से देशभर के व्यापारियों, उद्योगपतियों, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
इस वर्ष देशभर में कपड़ा और परिधान बाजारों की दीवाली बिक्री पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25–30% कम रही। CAIT टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी की सभी मंडियों की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख बाजारों — सूरत, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इरोड, तिरुपुर, लुधियाना और दिल्ली — में यह मंदी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है।
भारी वर्षा और असमय मौसम ने ग्राहकी को प्रभावित किया। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश , पंजाब और बिहार में लगातार बारिश के कारण बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम रही।
महंगाई और नकदी की कमी से उपभोक्ताओं का बजट प्रभावित हुआ, जिससे मध्यमवर्गीय वर्ग ने ₹1000 से ₹3000 रेंज की खरीदारी टाल दी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Flipkart, Meesho, Ajio और Myntra पर भारी छूट के कारण ऑफलाइन दुकानों की बिक्री 20 प्रतिशत तक घट गई।
जॉबवर्क और उत्पादन में भी सुस्ती रही। सिलाई, पैकिंग और फिनिशिंग यूनिटों में ऑर्डर घटने से दैनिक मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ा।
दीवाली के बाद बाजार की स्थिति सूरत जैसे बड़े बाजार सामान्यतः लाभ पंचमी के बाद खुलते हैं,परंतु बिहार विधानसभा चुनाव, जिसके परिणाम 14 नवंबर को आने हैं, के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गृह राज्य से देरी से लौटेंगे ।
चम्पालाल बोथरा ने कहा कि सूरत और दक्षिण गुजरात के कारखानों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत श्रमिक बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से आते हैं। चुनाव के चलते उनकी वापसी में 15 से 20 दिन की देरी होगी। इसका असर उत्पादन, निर्यात और थोक आपूर्ति पर नवंबर मध्य तक रहेगा।
इस बार सूट, कुर्ती और ड्रेसेज़ , गारमेंट फैब्रिक्स , टी शर्ट , जीन्स ,शर्ट , साड़ी की बिक्री में लगभग 30 प्रतिशत कमी आई। मध्यम वर्ग की खर्च करने की क्षमता कमजोर रही। फैशन और वेस्टर्न वियर में स्थिति स्थिर रही, जबकि शादी-ब्याह के परिधानों में हल्की बढ़त दर्ज की गई।
बच्चों के कपड़ों में भी सीमित मांग रही।
वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिक्री में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे पारंपरिक बाजारों की प्रतिस्पर्धा और बढ़ गई।
आने वाले सप्ताहों की
अब व्यापारी वर्ग को लगन और शादी के सीजन से बड़ी उम्मीदें हैं। नवंबर मध्य से फरवरी तक लगभग 48 शुभ मुहूर्त हैं, जिसके चलते परिधान, गारमेंट और फैब्रिक की मांग में 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है।
सर्दियों की शुरुआत से ऊनी कपड़े, जैकेट और स्वेटर की बिक्री उत्तर भारत में तेज़ रहेगी। बिहार चुनाव परिणाम आने के बाद श्रमिकों की वापसी से 20 नवंबर के बाद उत्पादन पूरी क्षमता से शुरू होने की उम्मीद है।
वैश्विक मंदी के कारण निर्यात ऑर्डर में लगभग 10 से 12 प्रतिशत की गिरावट आई है। यूरोप और अमेरिका में मांग कम रही है, जिससे तैयार वस्त्रों के निर्यात पर असर पड़ा है। हालांकि डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी बने हुए हैं। यदि दिसंबर से वैश्विक मांग सुधरती है, तो निर्यात में भी सुधार की संभावना है।
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति ने सरकार से निम्न सुझाव दिए हैं —
1. छोटे व्यापारियों के लिए “रिटेल रिवाइवल पैकेज” लाया जाए, जिससे उन्हें ब्याज-मुक्त कार्यशील पूंजी सहायता मिल सके।
2. “त्योहारी कार्यशील पूंजी योजना” के तहत MSME व थोक व्यापारियों को लघु ऋण राहत दी जाए।
3. बारिश व बाढ़ से प्रभावित बाजारों के लिए “मौसमी आपदा राहत फंड” की स्थापना की जाए।
4. “ऑफलाइन मार्केट प्रमोशन स्कीम” के तहत स्थानीय व्यापारिक प्रदर्शनियों और त्योहारी मेलों को बढ़ावा दिया जाए।
चम्पालाल बोथरा ने कहा कि “दीवाली 2025 में कपड़ा उद्योग ने कई चुनौतियों का सामना किया — मौसम, उपभोक्ता सुस्ती और चुनावी प्रभाव। परंतु भारतीय बाजार की वास्तविक शक्ति घरेलू मांग और पारंपरिक व्यापार नेटवर्क में है।
आने वाले लगन सीजन में व्यापार में नई रौनक लौटेगी और कपड़ा उद्योग पुनः विकास की दिशा में अग्रसर होगा।”
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस