सीएम मोहन यादव बोले- साढ़े सात सौ साल बाद भोजशाला में दर्शन-पूजन का सौभाग्य मिला, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा ‘सरस्वती लोक’; राजा भोज शोध संस्थान भी होगा स्थापित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोजशाला का दौरा किया, जहां उन्होंने मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना की और मुख्यमंत्री के रूप में यहां पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने। उन्होंने महाकाल लोक की तर्ज पर सरस्वती लोक और राजा भोज शोध संस्थान बनाने की घोषणा की, साथ ही लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने के प्रयासों का भी जिक्र किया।

सीएम मोहन यादव बोले- साढ़े सात सौ साल बाद भोजशाला में दर्शन-पूजन का सौभाग्य मिला, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा ‘सरस्वती लोक’; राजा भोज शोध संस्थान भी होगा स्थापित

धार में सीएम मोहन यादव ने सरस्वती लोक बनाने की घोषणा की है। साथ ही भोजशाला आंदोलन के बलिदानियों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए देने की घोषणा की है। साथ ही वहां राजा भोज शोध संस्थान का निर्माण करवाया जाएगा।

भोजशाला पहुंचे सीएम मोहन यादव, बोले- 750 साल बाद मिला दर्शन-पूजन का सौभाग्य; धार में बनेगा ‘सरस्वती लोक’, राजा भोज शोध संस्थान भी स्थापित होगा

मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और लंबे समय से विवाद तथा चर्चाओं के केंद्र में रही भोजशाला सोमवार को एक अहम और प्रतीकात्मक अवसर की साक्षी बनी। Mohan Yadav दोपहर करीब 1:30 बजे धार स्थित भोजशाला पहुंचे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी (सरस्वती) के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भोजशाला पहुंचने वाले वे प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। इस दौरान परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, भगवा ध्वजों की उपस्थिति और “जय मां वाग्देवी” के उद्घोष के बीच सांस्कृतिक संरक्षण और विकास से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं की गईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “करीब साढ़े सात सौ साल बाद हमें भोजशाला में दर्शन-पूजन का सौभाग्य मिला है।” उन्होंने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए धार के सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

750 वर्षों के संघर्ष का किया उल्लेख

सीएम मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भोजशाला से जुड़ा संघर्ष लगभग 750 वर्षों पुराना रहा है और इस विषय पर लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय के पीछे वर्षों का जनसंघर्ष और सामाजिक प्रयास जुड़े रहे हैं। मुख्यमंत्री ने धारवासियों को बधाई देते हुए कहा कि अब समय जिले के समग्र विकास और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का है।

धार में बनेगा ‘सरस्वती लोक’

मुख्यमंत्री ने भोजशाला परिसर और धार के सांस्कृतिक विकास को लेकर बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि यहां “सरस्वती लोक” विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना Mahakal Lok की तर्ज पर तैयार होगी।

उन्होंने कहा कि सरस्वती लोक को पर्यटन, साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जो कुछ लोगों ने वर्षों से चाहा, वह सब यहां विकसित किया जाएगा। यह स्थान साहित्य और पर्यटन दोनों का प्रमुख केंद्र बनेगा।”

राजा भोज शोध संस्थान की घोषणा

सीएम मोहन यादव ने इस अवसर पर “राजा भोज शोध संस्थान” स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राजा भोज के शासनकाल, इतिहास, साहित्य, जल प्रबंधन और सांस्कृतिक योगदान पर अध्ययन और शोध का केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि राजा भोज केवल शासक नहीं बल्कि विद्वान, दूरदर्शी और संस्कृति संरक्षक थे। उनके कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शोध संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

औद्योगिक विकास और पीएम मित्रा पार्क का भी उल्लेख

मुख्यमंत्री ने धार जिले की औद्योगिक क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि जिला प्रदेश के सबसे बेहतर औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। उन्होंने कहा कि पीएम मित्रा पार्क परियोजना के माध्यम से आदिवासी समुदाय द्वारा उत्पादित कपास से वस्त्र निर्माण होगा और यहां से निर्यात भी किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और क्षेत्र आर्थिक रूप से और मजबूत होगा।

आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवारों को सहायता

भोजशाला आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले स्वर्गीय पंत सिंह, स्वर्गीय अंतर सिंह और स्वर्गीय लक्ष्मण सिंह के परिजनों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। साथ ही तीनों परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।

कार्यक्रम के दौरान तीनों दिवंगतों की स्मृति में मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई।

जल संरक्षण अभियान पर भी बोले मुख्यमंत्री

गंगा दशमी के अवसर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजा भोज ने जल प्रबंधन और संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए थे और आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत बड़े स्तर पर कार्य हो रहे हैं। अभियान के अंतर्गत 2 लाख 82 हजार 188 कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें वर्तमान में लगभग 2500 करोड़ रुपये के विकास कार्य संचालित हैं।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है और जनभागीदारी के माध्यम से अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा महत्व

गौरतलब है कि भोजशाला को लेकर लंबे समय तक न्यायालय में सुनवाई चली। हाल ही में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर निर्णय सुनाया था। मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्षों के तर्कों पर विस्तृत सुनवाई की गई थी।

इसी फैसले के बाद भोजशाला का मुद्दा फिर प्रमुखता से सामने आया और मुख्यमंत्री का यह दौरा राजनीतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अब सरस्वती लोक, शोध संस्थान और पर्यटन विकास की घोषणाओं के साथ धार को सांस्कृतिक पहचान के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल शुरू होती दिखाई दे रही है।