एसीबी की बड़ी कार्रवाई: 26 साल पुराने घोटाले में पूर्व प्रबंधक गिरफ्तार, ₹1 करोड़ 86 लाख के गबन का है आरोप

भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अभियान के तहत आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) ने 26 साल पुराने एक बड़े गबन मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। ब्यूरो ने ‘सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल’ के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को गिरफ्तार किया है । यह पूरी कार्रवाई वर्ष 2000 में दर्ज अपराध क्रमांक 19/2000 के तहत की गई है ।

एसीबी की बड़ी कार्रवाई: 26 साल पुराने घोटाले में पूर्व प्रबंधक गिरफ्तार, ₹1 करोड़ 86 लाख के गबन का है आरोप

छत्तीसगढ़ में वर्ष 1995-98 के गृह निर्माण ऋण गबन मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए 1.86 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है।

रायपुर, छत्तीसगढ़ में लगभग 28 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन प्रकरण में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो ने शनिवार को इस मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे लंबे समय से लंबित इस घोटाले की जांच में नई गति आई है।जानकारी के अनुसार, अपराध क्रमांक 19/2000 के तहत दर्ज इस मामले में सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले 18 मार्च 2026 को इस प्रकरण में दो अन्य आरोपी—थावरदास माधवानी और बसंत कुमार साहू—को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो अन्य नामजद आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

जांच में सामने आया है कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच शासन की एक आवासीय योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को मकान निर्माण के लिए ऋण दिया जाता था। इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए ‘आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर’ के 186 सदस्यों के नाम पर एक-एक लाख रुपये के हिसाब से कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया गया।

हालांकि, जब इस मामले का भौतिक सत्यापन किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिन स्थानों पर मकान निर्माण दर्शाया गया था, वहां न तो कोई मकान मिला और न ही संबंधित लाभार्थी मौजूद पाए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पूरी प्रक्रिया फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित प्रमाण पत्रों के आधार पर संचालित की गई थी।

एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने में तत्कालीन अध्यक्ष, आवास पर्यवेक्षक और प्रबंधक की मिलीभगत सामने आई है। आरोप है कि प्रदीप कुमार निखरा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कागजी हेरफेर के जरिए राशि निकाली और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 1.86 करोड़ रुपये का गबन किया।

7 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर आरोपी

गिरफ्तार आरोपी प्रदीप कुमार निखरा को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 07 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है । इस प्रकरण में धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं (120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 IPC एवं 13(1)(सी), 13(2) PC Act) के तहत मामला दर्ज है ।

बता दें कि इस केस में दो अन्य नामजद आरोपियों की मौत हो चुकी है । ब्यूरो अब रिमांड के दौरान आरोपी से अन्य कड़ियों और गबन की गई राशि की वसूली के संबंध में पूछताछ करेगा।